माओवादी के वरिष्ठ नेता गणपति ने किया आत्मसमर्पण! पढ़ें उनका संक्षिप्त परिचय

हैदराबाद : पता चला है कि दशकों तक माओवादी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले पार्टी के पूर्व महासचिव और वरिष्ठ नेता मुप्पाल्ला लक्ष्मणराव उर्फ गणपति (77) ने देश की राजधानी दिल्ली में आत्मसमर्पण कर दिया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, गणपति पुलिस की हिरासत में हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सामने पेश किया जा सकता है। 2026 मार्च तक देश में माओवादी को पूरी तरह से समाप्त करने के केंद्र के लक्ष्य के करीब आने के समय में यह आत्मसमर्पण अत्यधिक महत्व रखता है।

तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी और स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो के चीफ आईजी बी. सुमति वर्तमान में दिल्ली में हैं, जो इस खबर को और भी पुष्ट करता है। गत सप्ताह ही माओवादी पार्टी के सचिव तिप्पिरि तिरुपति उर्फ देवजी, मल्ला राजिरेड्डी और अन्य ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद, गणपति को भी जनजीवन में वापस लाने के लिए तेलंगाना पुलिस द्वारा की गई चर्चाएं सफल हो गई हैं।

लंबे तक भूमिगत रहने वाले गणपति ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव के रूप में कार्य किया। लगभग चार दशकों तक माओवादी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले गणपति पर कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। विशेष रूप से तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र राज्यों में हुई अनेक हिंसक घटनाओं में उनका नाम सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में है। गत कुछ समय से गणपति गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।

गणपति के परिवार के सदस्यों ने उनको बेहतर चिकित्सा प्रदान करने की अपील की है और सरकार द्वारा घोषित पुनर्वास पैकेज के प्रति उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, इस पर सरकार या पुलिस विभाग से आधिकारिक बयान जारी होना बाकी है। ऐसा विश्लेषकों का मानना है कि यदि गणपति का आत्मसमर्पण समाचार सच है, तो यह भारतीय माओवादी आंदोलन के इतिहास में एक लंबे अध्याय का अंत होगा।

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आपको बता दें कि जगित्याल जिले के बीरपुर मंडल केंद्र (करीमनगर जिले का सारंगपुर मंडल) से ताल्लुक रखने वाले मुपाल्ला लक्ष्मणराव उर्फ गणपति का जन्म 16 जून 1949 को बीरपुर में हुआ था। उन्होंने वहीं से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की। जगित्याल और करीमनगर में उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में सरकारी अध्यापक के रूप में काम किया। वर्तमान जगित्याल जिले के मेडिपल्ली मंडल के गोविंदराम के साथ पेद्दापल्ली जिले के एलिगेडु मंडल केंद्र के सरकारी स्कूल में भी काम किया।

1972-73 के आसपास बीईडी ट्रेनिंग के लिए वरंगल गए और भूमिगत हो गये। 1976 में मंचिर्याल जिले के जन्नारम मंडल के तबलापुर में भूमिस्वामी पितांबर राव की हत्या के मामले में जन्नारम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लक्ष्मणराव को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। तीन महीने बाद निजामाबाद जेल से बेल पर बाहर आए और भूमिगत हो गए। 9 सितंबर 1978 को उन्होंने जगित्याल में कोंडपल्ली सीतारामय्या के नेतृत्व में जगित्याल जैतयात्रा की। इस यात्रा में मल्लोजुला कोटेश्वरराव, नल्ला आदिरेड्डी, शीलम नरेश आदि शामिल थे।

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