हैदराबाद : हिंदी पत्रकारिता में अपनी एक पहचान बना चुकी ममता रानी सक्सेना (अस्थाना) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मंत्रालय विभाग द्वारा दिल्ली से प्रकाशित, सहायक निदेशक पद पर कार्यरत और ‘योजना’ की वरिष्ठ संपादक 30 जनवरी को सेवानिवृत्त हो गई। नियम के अनुसार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होना चाहिए। हालांकि 31 (शनिवार) को कार्यालय को छुट्टी होने के कारण एक दिन पहले ही वह सेवानिवृत्त हो गईं। नियम के अनुसार सभी को आयु के 60 साल पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त होना पड़ता है। ममता रानी ने इस विभाग में केवल 26 साल मात्र कार्य किया है अर्थात काफी विलंब से उन्हें उस विभाग में कार्य करने का मौका मिला है।

गौरतलब है कि ममता रानी कबूतरखाना निवासी माता सत्यरूपा रानी और पिता दशरथ राज सक्सेना की बेटी है। उनके नाना प्रमुख समाजसेवी व हिंदी भाषा के प्रचारक एकनाथ प्रसाद थे। इन तीनों की प्रेरणा से उन्होंने हिंदी भाषा को अपना अस्त्र बनाया। इसी क्रम में ममता ने श्री शक्ति कन्या पाठशाला से दसवीं कक्षा (हिंदी माध्यम) उत्तीर्ण की। इसके बाद विज्ञान विषय को लेकर इंटरमीडिएट (अग्रवाल कॉलेज) और वनिता महाविद्यालय से बीएससी की। उस्मानिया विश्वविद्यालय (दूरस्थ शिक्षा) से एमए हिंदी पास किया। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा से एमफिल और हैदराबाद विश्वविद्यालय से ‘हिंदी पत्रकारिता की शब्दावली नये स्रोत नई संरचनाएं’ विषय पर पीएचडी उपाधि प्राप्त की। फिर भी पढ़ाई की भूख मिटी नहीं। इसके चलते भारतीय विद्या भवन से पीजी डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन किया।


साल 1992 में ‘डेली हिंदी मिलाप’ में उप संपादक पद पर कार्य किया। इसके बाद साल 1993 से वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मुनींद्र जी के सान्निध्य में प्रकाशित ‘दक्षिण समाचार’ से जुड़ी रही। तपश्चात 1997 में ‘स्वतंत्र वार्ता’ की पहली उपसंपादक बनीं। साल 2000 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करके सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में पत्र सूचना कार्यालय में सूचना सहायक का दायित्व निभाया। वर्ष 2007 में संपादक पद पर पदोन्नत होकर साल 2018 तक ‘रोजगार समाचार’ का संपादन किया। साल 2018 से 2026 तक ‘योजना’ पत्रिका का संपादन करती हैं।

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हिंदी पत्रकारिता क्षेत्र में हैदराबाद का नाम रोशन करने और हमेशा हंसमुख रहने वाली ममता रानी को दो बेटियां और एक बेटा- शुभ्रा अस्थाना, श्रेया अस्थाना और सारंग अस्थाना संतान हैं। ये तीनों दिल्ली में ही पढ़ाई कर रहे हैं। पति जितेंद्र कुमार आस्थाना का निधन हो चुका है। सेवानिवृत्ति और भविष्य कार्यक्रम के बारे में ‘तेलंगाना समाचार’ के एक सवाल के जवाब में ममता ने बताया कि दिमाग़ चल नहीं रहा है। बच्चे सेटल नहीं है। अब वेतन भी कम हो जाएगी। यही तनाव हो रहा है। फिर भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए वह दिल्ली में रहना ही पसंद करती है।

इस प्रकार के अनेक उलझनों में सेवानिवृत्त हो रही ममता रानी सक्सेना को ‘तेलंगाना समाचार’ की ओर से बधाई। एक बात सच है कि जब कभी किसी प्राणी के जीवन में एक रास्ता बंद हो जाता है तो दूसरा रास्ता खुलता है। यह प्रकृति का नियम है। इसके लिए केवल इंतजार की परीक्षा देनी होती है।
