स्मार्टफोन यूजर्स, खासकर WhatsApp और Telegram ज्यादा इस्तेमाल करने वालों के लिए केंद्र सरकार ने अलर्ट किया है। साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) सिम बाइंडिंग (SIM Binding) नियम सख्त कर रहा है। नए नियमों के अनुसार आपके फोन में ऐप्स ठीक से चलें, इसके लिए KYC से वेरिफाइड और ऐप अकाउंट से रजिस्टर्ड सिम का उसी मोबाइल में होना अनिवार्य है।
सिम बाइंडिंग क्या है: कम्युनिकेशन ऐप्स से हो रहे डिजिटल फ्रॉड और साइबर क्राइम को रोकना इसका मुख्य उद्देश्य है।
KYC जरूरी: DoT के आदेश से मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स के अकाउंट को संबंधित KYC सिम से जोड़ना/वेरिफाई करना होगा।
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डेडलाइन: केंद्र ने इन नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है।
किन फोनों पर असर पड़ेगा: सिर्फ Wi-Fi से बिना सिम के WhatsApp/Telegram चलाने वालों को आगे एक्सेस में दिक्कत हो सकती है।
बिना सिम वाले फोन: रजिस्टर्ड सिम के बिना सिर्फ Wi-Fi से ऐप चलाने वाले Android और iPhone यूजर्स पर ज्यादा असर।
Apple iOS में बदलाव: सिम बाइंडिंग के समर्थन में Apple अपने iOS में जरूरी सॉफ्टवेयर बदलाव करने वाला है।
किसे दिक्कत: विदेश जाने वाले, एक अकाउंट कई डिवाइस (Secondary devices) पर चलाने वाले, और Wi-Fi से सेकेंडरी फोन चलाने वालों को अपना सेटअप चेक करना होगा।
6 घंटे वाले ऑटो लॉगआउट पर स्पष्टता: पहले 28 नवंबर 2025 को टेलीकॉम विभाग ने हर 6 घंटे में WhatsApp Web से ऑटो लॉगआउट का नियम दिया था। अब केंद्र ने इस अनिवार्य नियम को वापस ले लिया है।
रिस्क-बेस्ड लॉगआउट: अब साइबर खतरा या संदिग्ध लॉगिन दिखने पर ही सिस्टम ऑटो लॉगआउट करेगा।
क्या सभी ऐप्स पर लागू होगा: WhatsApp और Telegram ही सिम बाइंडिंग के दायरे में आएंगे।
छूट: रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्नैपचैट को इन नियमों से छूट दी गई है। एक और पॉपुलर ऐप सिग्नल ने अभी तक सरकार के नोटिस का जवाब नहीं दिया है। यूज़र्स को तब तक इंतज़ार करना होगा जब तक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म इन बदलावों पर अपनी पॉलिसी की ऑफिशियल घोषणा नहीं कर देते, जो सरकारें इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी पक्का करने के लिए ला रही हैं।
