नोट- कोंडापोचम्मा सागर से लेकर एर्रवल्ली के फार्महाउस तक इस समय चर्चा का विषय बना है। इसीलिए पाठकों की जानकारी के लिए इसे प्रकाशित कर रहे हैं। मुख्य रूप से केसीआर के शासनकाल में भ्रष्टाचार कैसे हुआ? लोगों का पैसा कैसे बर्बाद हुआ? विकास किसका होना चाहिए था? लाभ किसका हुआ? इन सवालों के जवाब ग्राउंड रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया। इसी क्रम में प्रकाशित और प्रसारित ग्राउंड रिपोर्ट पर बीआरएस ने बिना शर्त माफी मांगने के साथ 100 करोड़ का मानहानी का नोटिस जारी किया। इस पर उक्त मीडिया ने माफी मांगने से इनकार किया और कानून लड़ाई के तैयार होने का जवाब दिया है।
हैदराबाद : ‘करोड़ों लोगों की अपेक्षाएं और आकांक्षाओं के साथ लाए गए तेलंगाना में किसका विकास हुआ?’ पृथक तेलंगाना गठन के बाद से इस पर जोरदार बहस चल रही है। इसी दौरान कुछ हड़कंप मचाने वाले बातें सामने आई हैं। केसीआर के मुख्यमंत्री रहते सिद्धिपेट जिला मारकूक मंडल एर्रवल्ली में सैकड़ों एकड़ में उन्होंने और उनके परिवार ने जो फार्महाउस बनाया है, उसमें बड़े पैमाने पर सरकारी और असाइंड जमीनों को मिला लेने के आरोप हैं।
फार्महाउस के लिफ्ट इरिगेशन
इसमें सच क्या है यह पता लगाने के लिए तेलंगाना सरकार पहले से ही व्यापक सर्वे करा रही है। इसी बीच कोंडापोचम्मा सागर से केसीआर के फार्महाउस तक वॉटर ग्रिड की तरह पानी मोड़ने का मामला अभी सामने आया है। इसमें हकीकत देखने के लिए एक तेलुगु दैनिक और और टीवी चैनल टीम ने जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। इस दौरान आंखें चौंधिया देने वाले सच सामने आए हैं। खासकर फार्महाउस के लिफ्ट इरिगेशन के लिए पूरे 58 एकड़ में पांडुरंग तालाब खोदा गया। इस देख कर कोई भी ‘अरे वाह..’ कहे बिना रहा नहीं पाता। दस साल में इरिगेशन पर डेढ़ लाख करोड़ खर्च करने वाली केसीआर सरकार ने तेलंगाना में एक एकड़ भी सिंचित नहीं किया। हालांकि अपने फार्महाउस को स्वर्ग जैसा सुंदर बना लिया है। इसे देखने पर यह साफ हो रहा है।
2016 तक सागर नहीं था

कालेश्वरम प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर केसीआर के फार्महाउस के पास ही कोंडापोचम्मा सागर बनाया गया। 15 टीएमसी क्षमता वाले इस रिजर्वायर को 2018 में शुरू करके 2021 में पूरा किया गया। ऊपर मौजूद मल्लन्नासागर से पानी लेना है ऐसा शुरू में डिजाइन किया गया था। लेकिन अजीब तरह से मल्लन्नासागर पूरा होने से पहले ही कोंडापोचम्मा सागर को पूरा कर दिया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2016 तक वहां पर ऐसा कोई सागर नहीं था। कोंडापोचम्मा सागर के लिए पानी मोड़ने के लिए मल्लन्नासागर के बीच से बड़ी नहर खोदी गई। इसके लिए बड़ी रकम खर्च की गई। इस पर तब आरोप लगे थे। हालांकि भी केसीआर ही सीएम होने की वजह से कोई जांच करने की स्थिति में नहीं थी। कहा गया कि केसीआर विधायक के तौर पर प्रतिनिधित्व कर रहे गजवेल के कमांड एरिया को पानी देने के लिए ही यह रिजर्वायर बनाया गया है।
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भीतर की बात कोंडापोचम्मा ही जाने
केसीआर के फार्महाउस से नजर की दूरी पर ही कोंडापोचम्मा सागर है। करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर है। इस रिजर्वायर से शुरू होने वाली मुख्य नहर को ‘जगदेवपुर कैनाल’ कहते हैं। शुरू में भवानंदपुर, शिवारू वेंकटापुर जैसे छोटे गांव ही आते हैं। उन्हें पार करते ही सीधे केसीआर के फार्महाउस के सामने वाली सड़क के समानांतर यह नहर चलती है। फार्महाउस के सामने ही इस नहर के समानांतर एक और छोटी डायवर्जन कैनाल बनाई गई है। यह ठीक फार्महाउस के सामने मौजूद पांडुरंग तालाब में जाती है। कोंडापोचम्मा नहर के पानी को मोड़ कर इस तालाब को भर रहे हैं। गूगल मैप में नाम तक न दिखने वाला यही तालाब केसीआर के फार्महाउस का मुख्य जल स्रोत है।
एल-नीनो की वजह सरकार परेशान
एल-नीनो की वजह से इस बार बारिश न होने से उधर देश में, इधर तेलंगाना में जहां देखो वहां सूखा पड़ रहा है। देखते ही देखते तालाब, डैम, रिजर्वायर, बोरवेल का पानी सूख रहा है। कई जगह पानी न मिलने से हाथ आई फसलें सूख कर खराब हो रही हैं। आने वाले सात-आठ महीनों में लोगों को एक घूंट पीने का पानी कैसे देना है, यह समझ न आने से सरकार सिर पकड़ रही है।
सैकड़ों एकड़ में हरियाली से लहलहा रहा है

ऐसे समय में एक इलाका ही भरे-पूरे तालाब, लबालब कुएं, कल-कल बहती नहरों और पाइपलाइनों के साथ सैकड़ों एकड़ में हरियाली से लहलहा रहा है। यह अगर प्राकृतिक रूप से हुआ होता तो चमत्कार ही था। हालांकि दस साल की सत्ता को आड़ बनाकर, सैकड़ों करोड़ जनता के पैसे से एक ही व्यक्ति ने अपने लिए किया गया इंतजाम है!! वही सिद्धिपेट जिला मारकूक मंडल एर्रवल्ली में मौजूद पूर्व सीएम केसीआर का फार्महाउस है।
