31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती है। भारत के इतिहास में जब भी सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम लिया जाता है, तो हमारे सामने एक दृढ़ निश्चयी, अटूट नेतृत्व वाला और देश की एकता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाला व्यक्तित्व उभरता है।
गुजरात के नाडियाड गाँव में 1875 को जन्मे पटेल जी ने वकालत का पेशा अपनाया, परंतु जल्द ही उन्होंने देश की स्वतंत्रता को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। महात्मा गांधी के प्रभाव से प्रेरित होकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई और कई जनआंदोलनों की नींव रखी।
भारतीय संविधान सभा के वरिष्ठ सदस्य के रूप में उन्होंने संविधान निर्माण में अहम योगदान दिया। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कराने में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके अलावा वे संविधान सभा की ‘मौलिक अधिकार समिति’ के अध्यक्ष भी रहे।
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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पटेल जी ने भारत के एकीकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देश के 562 रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने का महान कार्य किया। हैदराबाद और जूनागढ़ जैसी रियासतों का भारत में विलीन कराने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।
1947 के बाद, जब भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय हैदराबाद राज्य (तेलंगाना क्षेत्र) को भारत में मिलाने की प्रक्रिया में पटेल जी ने निर्णायक भूमिका निभाई। हैदराबाद में सामाजिक असंतोष और सैन्य संकट की स्थिति उत्पन्न होने पर सरदार पटेल ने ‘यूनियन’ की प्रक्रिया को तेज किया। ‘ऑपरेशन पोलो’ के माध्यम से सेना भेजकर उन्होंने हैदराबाद को अंततः भारत का अभिन्न भाग बनाया।
रियासतों के विलीन में सरदार पटेल ने जो राजनीतिक कुशलता, दृढ़ता और देशप्रेम दिखाया, उसी कारण उन्हें ‘भारत की एकता का शिल्पी’ और ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है। उनकी कठोर, न्यायपूर्ण निर्णय-क्षमता के कारण ही भारत आज एक ध्वज, एक संविधान और एक सरकार के अंतर्गत संगठित राष्ट्र के रूप में खड़ा है। पटेल के दृष्टिकोण में भारत केवल एक राजनीतिक संघ नहीं था, बल्कि यह हृदयों की एकता थी। IAS और IPS जैसी प्रशासनिक सेवाओं की संरचना में उनका योगदान आज भी देश की प्रशासनिक रीढ़ बना हुआ है।
उनके विचार और उनके कार्य कर्नाटक से लेकर कश्मीर तक हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जगाते हैं। आज गुजरात के नर्मदा तट पर ‘सरदार पटेल की प्रतिमा’ — जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है — 182 मीटर ऊँची विश्व की सबसे विशाल प्रतिमा, उनके विशाल हृदय और राष्ट्रीय एकता के अडिग संकल्प का प्रत्यक्ष प्रतीक है।
प्रत्येक वर्ष 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर पूरे देश में ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाया जाता है। 24 अक्तूबर 2014 को केंद्र सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया था। इस दिन विद्यालयों में विद्यार्थियों द्वारा ‘राष्ट्रीय एकता प्रतिज्ञा’ ली जाती है, जिससे उनमें राष्ट्र की अखंडता और एकता की भावना का विकास होता है।
वल्लभभाई पटेल की जयंती हमारे लिए प्रेरणा का क्षण है, यदि हम उनके दिखाए एकता, कर्तव्यनिष्ठा और साहस के मार्ग पर चलें, तभी सच्ची देशभक्ति का प्रदर्शन कर सकते हैं।

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’
कवि, लेखक, अनुवादक
हैदराबाद
9848493223
