क्रांतिकारी उर्फ दिगंबर कवि निखिलेश्वर जी को नहीं जानने वाला ऐसा कोई भी तेलुगु साहित्यकार नहीं है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी अनेक हिंदी साहित्यकार उनकी रचनाओं से अच्छी तरह से परिचित है। उनकी अनेक रचनाएं तेलुगु पाठ्यप्रणाली में भी शामिल किये गये हैं। ऐसे क्रांतिकारी कवि को साल 2017 में लिखी गई उनकी ‘अग्नि श्वासा’ कविता संकलन को केंद्रीय साहित्य अकादमी अवार्ड-2020 से सम्मानित किया गया।

सबसे मुख्य साल 1965-68 के बीच छह दिगंबर कवियों- नग्नमुनि, निखिलेश्वर, चेरबंडराजू, ज्वालामुखी, भैरवय्या और महास्वप्न की कविताओं के संकलन के तीन पुस्तकें ‘दिगंबरकवुलु’ नाम से प्रकाशित हो चुके हैं। ये पुस्तकें तेलुगु साहित्य जगत में हड़कंप मचा दिया।

अब भी क्रांतिकारी कवि निखिलेश्वर जी का लेखन कार्य निरंतर जारी हैं। इतना ही नहीं, वे एक युवक की तरह साहित्यिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में उत्साह के साथ भाग लेते हैं। समय-समय पर मीडियाकर्मी से भेंटवार्ता भी करते हैं। उनकी हर रचना और संबोधन समाज को मार्गदशन देता और करता है। उनके जीवन, व्यवहार और रचना शैली को देखकर लगता है कि निखिलेश्वर जी आज भी 86 साल के युवक है। हर व्यक्ति को ‘जी’ और ‘गारु’ कहकर संबोधित करना उनके बड़प्पन और मर्यादा को दर्शता है।

ऐसे महान साहित्यकार की रचनाओं को मैं पिछले 40 साल से हिंदी और तेलुगु अखबारों में पढ़ते आया हूं। वैसे तो मेरा घनिष्ट परिचय ‘फांसी’ (एक बहुजन की आत्मकथा) के दौरान हुआ। साल 1918 में ‘फांसी ‘ के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन और साल 2025 में तेलुगु अनुदित पुस्तक ‘उरीकंबम नीडलो’ के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन निखिलेश्वर जी ने ही किया है। इन दोनों कार्यक्रमों के अलावा मीटिंगों में उन्हें देखा और सुना हूं। मैंने कभी भी उनमें थकावट नहीं देखी। ‘उरीकंबम नीडलो’ पुस्तक उनकी ही देखरेख में प्रकाशित हुआ है। अब अंग्रेजी अनुदित पुस्तक के प्रकाशन का कार्य भी उनकी ही देखरेख में जारी है। विश्वास है कि अंग्रेजी अनुदित पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन भी जल्द ही निखिलेश्वर जी करेंगे।

ऐसे महान कवि, लेखक, आलोचक और साहित्यकार निखिलेश्वर जी के तीन तेलुगु पुस्तकों का लोकार्पण 7 दिसंबर को सुबह 10.30 बजे ध्रुव एलाइट (बतुकम्माकुंटा क्रास रोड, शिवम रोड, बागअंबरपेट) में होने वाला है। इन पुस्तकों का लोकार्पण उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के करकमलों से किया जाएगा। इस दौरान एमेस्को के संपादक डॉ डी चंद्रशेखर रेड्डी ‘एक्कडिकी गमनम्? एंत दूरम ई गम्यम्?’, ‘एवरिदी प्रजास्वाम्यम्? ए विलुवलकी प्रस्थानम्?’ और अंग्रेजी से अनुदित ‘गोडल वेनुका’ पुस्तकों का परिचय देंगे।

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साथ ही, प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रोफेसर कल्पना कन्नाभिरान, प्रोफेसर कट्टा मुत्यम रेड्डी, डॉ नंदिनी सिधा रेड्डी, तेलकपल्ली रवि और अन्य गणमान्य व्यक्ति निखिलेश्वर जी के साहित्य और जीवनी पर प्रकाश डालेंगे। इस अवसर पर निखिलेश्वर जी स्वयं उनकी साहित्यिक यात्रा पर अपने अनुभव को साझा करेंगे। विश्वास है कि बड़े-बड़े साहित्यकार से लेकर आम नागरिक इन पुस्तकों का लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। निखिलेश्वर जी को उनके इन तीन पुस्तकों के लोकार्पण पर हम बधाई देते हैं।
