हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति की 141वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दया कृष्ण गोयल एवं महामंत्री ममता कुमारी जायसवाल के सान्निध्य में किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में जयंत मिश्र ने सरस्वती वंदना तथा नेमा रवि ने सरस्वती स्तुति प्रदान किया। डॉ दया कृष्ण गोयल ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
गोष्ठी के प्रारंभ में प्रस्तुत विषय “भारत में घटते नैतिक मूल्य और बढ़ते अपराध कारण और निवारण” विषय में प्रवेश करते हुए डॉक्टर अर्चना पांडे ने अपनी स्मरणीय लक्ष दीप यात्रा के उदाहरण द्वारा भारत की जनसंख्या नैतिक परिवेश बदलते प्रतिमानों वैयक्तिक जिम्मेदारी आदि का सटीक उदाहरणों द्वारा विषय का विहंगम अवलोकन किया।
विषय को गंभीर गूढ़ता प्रदान करते हुए विषय प्रमुख प्रवक्ता सीमा कुमारी सिंह ने वैयक्तिक सामाजिक सांस्कृतिक कानूनी पारिवारिक परिवेश की अपनी मर्यादाओं सीमाओं को उल्लिखित करते हुए यह कहा कि सामाजिक चुप्पी कानूनी ढिलाई आत्म चेतना की लिप्तता हमें पूर्ण शक्ति से यह संकेत दे रही हैं कि हम में सुधार ,बदलाव व आत्म संकल्प की दृढ़ता की भारी आवश्यकता है। उन्होंने विषय के साथ गंभीर सामंजस्य करते हुए विविध उदाहरण द्वारा विषय को सरस बनाया।
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अपने विचारों की समाप्ति के पूर्व सीमा सिंह ने सभी को आवाह्न करते हुए संकल्प लेने की दृढ़ता पर बल दिया कि वे अपने व्यक्तिगत नैतिक मूल्यों को स्थापित कर आगामी पीढ़ी को आदर्श स्थापित करें। दर्शन सिंह, ममता जायसवाल, राजेन्द्र रुंगटा आदि ने भी नैतिक मूल्यों की स्थापना में पारिवारिक सामाजिक सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित किया। प्रथम सत्र के अपने संचालन को विराम देते हुए समिति की महामंत्री ममता कुमारी जायसवाल ने द्वितीय सत्र काव्य गोष्ठी के संचालन की बागडोर उमेश चंद्र यादव को सौंपी।
काव्य गोष्ठी में गणमान्य कवियों सुनीता लुल्ला, इंदू सिंह गिरधारी, लाल गुप्ता बैजनाथ, सुनहरे राजेंद्र रुंगटा, दर्शन सिंह, सीमा जख्वाल, उमेश सिंह यादव, उमेश चंद श्रीवास्तव, नवांकुर विनोद, गिरि अनोखा, अमृत लाल पाठक, ममता कुमारी जायसवाल, दया कृष्ण गोयल आदि ने काव्य की विविध विधाओं गजल, गीत, नवगीत, मुक्तक, लोकगीतों की प्रस्तुति की। गोष्ठी में श्रुतिकांत भारती, सरिता दीक्षित, तृप्ति मिश्रा और अन्य की उपस्थिति रही।
काव्य गोष्ठी के उपरांत डॉ दया कृष्ण गोयल कार्यक्रम अध्यक्ष व समिति अध्यक्ष ने अध्यक्षीय भाषण में साहित्य सेवा समिति द्वारा प्रस्तुत समसामयिक व प्रासंगिक विषयों पर विषय प्रवक्ताओं की विशद प्रस्तुति की स्तुति की तथा काव्य लेखन में कवियों के उत्तरोत्तर प्रगति की प्रशस्ति की। विनोद गिरि अनोखा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
