महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन, वर्तमान भारत और युवकों की भूमिका

आज महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) है। ऐसे महान गांधी के नेतृत्व में अनेक आंदोलन चलाया गया और देश आजाता हुआ। इनमें सबसे मुख्य सत्याग्रह आंदोलन रहा है। सत्याग्रह का मूल अर्थ है सत्य के प्रति आग्रह ( सत्य + आग्रह)। सत्य को पकड़े रहना और इसके साथ अहिंसा को मानना। अन्याय का सर्वथा विरोध करते हुए अन्यायी के प्रति वैरभाव न रखना, सत्याग्रह का मूल लक्षण है।

धैर्य एवं सहानुभूति से विरोधी को उसकी गलती से मुक्त करना चाहिए। धैर्य का तात्पर्य कष्टसहन से है। इस सिद्धांत का अर्थ हो गया विरोधी को कष्ट अथवा पीड़ा देकर नहीं बल्कि स्वयं कष्ट उठाकर सत्य का रक्षण। वास्तव में गांधी जी ने 11 सितंबर 1906 को सत्याग्रह पहली बार इस्तेमाल किया था। इसका इस्तेमाल उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ किया था।

सन 1915 में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कांग्रेस केवल संभ्रांत शहरी भारतीयों का एक क्लब था जो शहरों और गांवों में आम आदमी के साथ नहीं जुड़ा था। इस कमी में सुधार किया गया। भारत लौट कर कुछ दिन गांधी जी ने देश की स्थिति का जायजा लिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी संस्था को पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य देकर संघर्ष में कूद पड़े, क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेज सरकार ने भारतीयों के प्रति अपने रवैये में परिवर्तन नहीं किया था। गांधी जी ने अंग्रेजी कानूनों का बहिष्कार और सत्याग्रह का बिगुल बजा दिया।

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चंपारण सत्याग्रह (अप्रैल 1917)

अंग्रेज़ों ने व्यवस्था रखी थी कि हर बीघे में तीन कट्टा जमीन पर नील की खेती किसानों को करनी होगी। इसके उत्पादन से किसानों को कुछ मिलता नहीं है। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह और अहिंसा का आजमाया हुआ अस्त्र “सत्याग्रह” पहली बार चंपारण में किया। 35 सालों से चली आ रही नील की खेती बंद हुई। शोषण बंद हुआ।

दांडी सत्याग्रह (नमक मार्च)

भारत में अंग्रेजी शासन काल में नमक उत्पादन और विक्रय पर भारी मात्रा कर लगा दिया गया। नमक जीवन में आवश्यक होने के कारण, इस कानून से मुक्ति दिलाने के लिए 12 मार्च 1930 को साबरमती से अपने 78 लोगों साथ लेकर दांडी तक 240 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा की। हजारों लोग शामिल हुए। क़ानून तोडने में सफलता मिली। इस तरह गांधी जी पर विश्वास बढ़ता गया और लोग भी गांधी जी के सिद्धांतों के साथ जुड़ने लगे। भारत को स्वतंत्रता दिलाने में एक कदम और नजदीक पहुंच गए।

खेड़ा सत्याग्रह

गुजरात खेड़ा जिले में किसानों का अंग्रेजी सरकार की कर वसूली के विरुद्ध सत्याग्रह। सन 1918 में गुजरात में पूरे साल की फसल मारी गई। स्थिति को देखते हुए लगान माफ़ कर देना चाहिए। उल्टे किसानों के मवेशी, खेत व अन्य समान कुर्क की जाने लगी। किसानों की प्रार्थनाएं निष्फल हुई। गांधी जी के सत्याग्रह मंत्र अपनाने को अंततः सफलता मिली। कर माफ कर दिया गया।

बारदौली सत्याग्रह (1928)

किसानों के लगान में 30 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। सरदार पटेल के साथ मिलकर बारदौली सत्याग्रह किया। भारतवासियों के मानवाधिकारों का हनन करने वाले रॉयल एक्ट का स्थान स्थान पर विरोध होने लगा। सन 1919 में जालियां बाग में हो रही विरोध सभा पर हुए अत्याचार (जिसमें 1000 लोग मारे गए,1600 – 1700 लोग घायल हो गए। गांधी जी की अंतरात्मा को हिला कर रख दिया। उन्होंने पूरी स्वतंत्र आंदोलन की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसका संकेत पाते ही सारे देश में विरोधी आंदोलनों की आंधी सी छा गई। अंग्रेजी सरकार की लाठी गोलियां भी अंधाधुंध बरसने लगी। जेल सत्याग्रहियों से भर गई।

अंग्रेज़ों भारत छोड़ो

1857 की महान क्रांति पर काबू पा लेने वाली अंग्रेजी सरकार गांधी जी के सामने पस्त नजर आने लगी। सन 1942 में मुंबई कांग्रेस के अवसर पर गांधी जी द्वारा अंग्रेज़ों को चेतावनी “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” और भारतवासियों को “करो या मरो” की दी गई ललकार का भीषण परिणाम निकला। अंग्रेज घबरा गए और देश छोड़ने के लिए बाध्य हो गए। फलत: 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को स्वतंत्र कर अंग्रेज इंग्लैंड लौट गए।

आजाद भारत अनेक उतार चढ़ाव देख चुका है और देख रहा है। धनवान और धनवान और गरीब और गरीब होता जा रहा है। ऐसा लगता है कि यदि गांधी जी जीवित होते तो इस देश का स्वरूप कुछ अलग होता। इसीलिए युवा वर्ग को देश की बाग डोर संभालनी होगी और एक नये भारत का निर्माण करना होगा।

दर्शन सिंह मौलाली हैदराबाद

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