MIDHANI: ‘मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रसार में परिवार की भूमिका’ पर डॉ अहिल्या मिश्र का दमदार व्याख्यान

हैदराबाद : “विश्व में आज हिंदी का बड़ी तेजी से प्रसार हो रहा है। इसमें प्रवासी भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। भारत की संस्कृति को बचाए रखने के लिए उन्होंने भारत की भाषा हिंदी को अपनाया है। देश विदेश में हिंदी के प्रचार-प्रसार में रामायण और हिंदी फिल्मों की भी अहम भूमिका रही है। भारतवासी को चाहिए कि वे अपनी मातृभाषा का  प्रयोग अपने परिवार में और राष्ट्रभाषा का प्रयोग अपने दैनिक कामकाज के लिए करते रहें। अंग्रेजी के प्रभाव में आकर अपनी भाषा-अपनी धरोहर को नष्ट न करें।” हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति विद्युत मंत्रालय भारत सरकार डॉ. अहिल्या मिश्र ने यह बात कही।

अहिल्या मिश्र ने मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि), हैदराबाद में उद्यम की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किए जा रहे व्याख्यान शृंखला की कड़ी और विश्व हिंदी दिवस समारोह 2023 के उपलक्ष्य में मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रसार में परिवार की भूमिका विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किये।

उन्होंने आगे कहा कि माँ, बेटी, मातृभाषा और राष्ट्रभाषा का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह सीख परिवार से ही शुरु होनी चाहिए। बालकों को परिवार के वातावरण में जिस भाषा और संस्कृति की सीख मिलती है, वही वह अपने दैनिक जीवन में अपनाते हैं।

समाज और दुनिया के साथ रू-ब-रू होने पर उसी का व्यवहार करते हैं। इसीलिए माताओं, दादियों और नानियों पर विशेष जिम्मेदारी है कि वे अपने बालकों को अपनी भाषा और संस्कृति का अवश्य ज्ञान कराएँ। उन्हें अपनी भाषा सिखाएँ। अपनी भाषा से प्राप्त ज्ञान निर्विवाद रूप से प्रथम श्रेणी का होता है।      

अवसर पर मिधानि के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ संजय कुमार झा ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की जनता भारतीय संस्कृति, लोकगीत और हिंदी फिल्म आदि से काफी जुड़ी हुई है। इनके माध्यम से हिंदी के प्रसार बहुत तेजी से हुआ है। सरकारी कामकाज के साथ-साथ आम जनता में हिंदी के प्रसार के लिए विश्व हिंदी दिवस जैसे समारोह अत्यंत कारगर सिद्ध होते हैं। मिधानि में सांस्कृतिक कार्यक्रम व विशेष व्याख्यान का आयोजन का उद्देश्य है कि मिधानि में हिंदी के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सके।

उन्होंने सभी उपस्थित कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हिंदी का प्रचार-प्रसार केवल कार्यालय में ही नहीं बल्कि समाज में भी होना चाहिए जिसके लिए हम सब को कार्यालय के बाहर के कार्यकलाप हिंदी में करने चाहिए। उन्होंने मिधानि के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि मिधानि में भाषा और संस्कृति के संयोजन से राष्ट्रीयता की भावना जगाने का महत्तर कार्य किया जा रहा है।

अवसर पर उद्यम के मुख्य सतर्कता अधिकारी डॉ. उपेंदर वेन्नम, आईपीओएस ने “डाक टिकट के माध्यम से हिंदी का प्रसार” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि न केवल भारत में बल्कि विदेशों में डाक टिकटों के माध्यम से हिंदी का प्रसार बहुत पुराना है। भारत सहित मॉरिश, फिजी, वेंडा आदि देशों में भी हिंदी दिवस, विश्व हिंदी दिवस तथा विश्व हिंदी सम्मेलनों के अवसर पर देवनागरी लिपि में डाक टिकट जारी करने का प्रचलन है। भारतीय संस्कृति, महात्मा गांधी, विवेकानंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला आदि से संबंधित डाक टिकट जारी होते रहते हैं। इससे हिंदी के महत्व को रेखांकित किया जा सकता है।

मिधानि में स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किए जा रहे व्याख्यान शृंखला की कड़ी और विश्व हिंदी दिवस समारोह 2023 के अवसर पर आयोजित व्याख्यान का शुभारंभ डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. संजय कुमार झा व श्रीमती कल्पाना झा, डॉ. उपेंदर वेन्नम व श्रीमती स्वप्ना वेन्नम द्वारा दीप प्रज्वलन व डॉ. बी. बालाजी द्वारा गणेश वंदना से किया हुआ। रोहित निगुडकर, उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) ने उपस्थित कर्मचारियों व उनके परिवार सहित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर विशेष व्याख्यान के साथ ही मिधानि के कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के लिए अंत्याक्षरी प्रतियोगिता और बच्चों के लिए सांस्कृतिक नृत्य, कविता पाठ, हिंदी फिल्मों पर नृत्य व गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। अंत्यक्षारी प्रतियोगिता में गरिमा ओझा, सहायक  प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) के परिवार ने प्रथम, प्रतीक शर्मा, प्रबंधक (विपणन) के परिवार ने द्वितीय तथा अमित सिंह, प्रबंधक (विपणन)  व वर्षा, कनिष्ठ  प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) के परिवारों ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किए।

इसी क्रम में अन्य प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले– अक्षया, प्रिया शंमुखी, प्रचिती निगुडकर, अनन्य शर्मा, शसिता जैन, आत्रेयी मलिक, सान्वी दुर्गा, साई श्रद्धा, विहान वजस, प्रत्यूषा साहू, अश्विनी, मृदुला को उत्कृष्टता पुरस्कार तथा प्रतिभागी यामिनी तेजस, जागृति, पल्लवी, साहिती, त्रिशा सिंह, निहारिका, साई पूजा, दुर्गा, सृजना और बी. निहारिका को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए। प्रतियोगिताओं के निर्णायक, बीपीडीएवी स्कूल के प्राध्यापक– संतोष, दीपाली, सिंधु, साई ज्योति, शैलजा, अपर्णा दीप्ति, रेवती, पार्वती तथा नीना साह को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।  

अंत्याक्षरी प्रतियोगिता तथा कार्यक्रम का संचालन उद्यम के उप प्रबंधक (हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार) डॉ बी बालाजी ने किया। समारोह के सफल आयोजन में हिंदी विभाग की श्रीमती रत्नकुमारी, वरिष्ठ कार्यकारी अधीक्षक का सक्रिय सहयोग रहा।      

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