खून से लथपथ आंदोलन: कब रुकेगी नक्सल-पुलिस हिंसा..? (भाग-8 समाप्त), “जो जोतेगा उसी की जमीन”

[नोट- हमारे खास मित्र और तेलुगु दैनिक ‘निर्देशम’ के मुख्य संपादक याटकर्ला मल्लेश ने खून से “लथपथ” आंदोलन: कब रुकेगी नक्सल-पुलिस हिंसा..? को धारावाहिक प्रकाशित करने की अनुमति दी है। इसके लिए हम उनके आभारी है। विश्वास है कि पाठकों और शोधकर्ताओं को ये रचनाएं लाभादायक साबित होगी।]

तेलुगु दैनिक ‘निर्देशम’ के मुख्य संपादक याटकर्ला मल्लेश की कलम से…

नक्सलियों ने “जो जोतेगा उसी की जमीन” के नारे के साथ अपना आंदोलन तेज कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन गरीबों को संगठित किया। जमींदारों की भूमि में लाल झंडे गाड़े और ग्राम रक्षा बलों के नेतृत्व में भूमि का वितरण भी किया। भूमि संघर्षों से संबंधित ग्राम रक्षा बलों के नेतृत्व में ही सब कुछ करने का संकल्प लिया गया। किंतु, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) माओवादी के पोलित ब्यूरो ने समीक्षा बैठक में पाया कि भविष्य में आने वाली कानूनी समस्याओं पर चर्चा नहीं करने और लोगों की आर्थिक स्थिति का अध्ययन नहीं करने के कारण प्रतिबंध के दौरान भूमि संघर्ष आगे नहीं बढ़ पाया। अगर “जो जोतेगा उसी की जमीन” होना है, तो लोकतांत्रिक शक्ति की भावना को लोगों में और विकसित करना होगा, वैचारिक प्रतिबद्धता और त्याग के साथ कैडर बनाना होगा और शिक्षित लोगों को आकर्षित करना होगा।

पोलित ब्यूरो की समीक्षा बैठक में कैडर के आत्मसमर्पण के कारणों पर भी चर्चा की गई। इसमें पाया गया साहित्यिक अध्ययन की उपेक्षा हो गई या की गई है। साथ ही सुझाव दिया गया कि युवा और महिला संघों के गठन में सुधार किया जाये। ग्राम समितियों में सभी की भागीदारी बढ़ाने का अवसर दिया जाना चाहिए। खुफिया नेटवर्क को सहकारी समितियों तक विस्तारित किया जाये। साथ ही अध्ययन निर्माण पर यदि ध्यान केंद्रित करें तो संकटों से बाहर आ सकते हैं। समीक्षा बैठक में नक्सली आंदोलन को इसी तरह से आगे ले जाने का फैसला लिया गया। समीक्षा बैठक में सम्पूर्ण पार्टी संरचना की कमियों पर समीक्षा की गई। हालांकि, संपूर्ण आंदोलन के स्वरूप को बदलने या आंदोलन की रणनीति या परिवर्तन करने पर कोई खास सुझाव नहीं दिया। पुलिस को मुख्य दुश्मन मानने की सोच में कोई बदलाव भी नहीं किया गया और सशस्त्र संघर्ष सिद्धांत से भी पीछे नहीं हटने का निर्णय लिया गया।

वर्तमान में आंदोलन की स्थिति

दुश्मन के मजबूत प्रहार से कुछ समय के लिए जैसे सदमे की स्थिति उत्पन्न होती है वैसी स्थिति नक्सल आंदोलन के दौरान हुई और व्यक्त की गई। इसीलिए नक्सल के बिखर जाने और आत्मसमर्पण करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि आंदोलन को कुछ क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय पूरे भारत में फैलाया जाए। फिर से आंदोलन के निर्माण करने जरूरत महसूस किया गया। इसके अस्थायी रुकावट को दूर करने लिए आंदोलन में शहीद नेताओं- सुरपनेनी जनार्दन राव, मल्लोजुला कोटेश्वर राव, नल्ला आदिरेड्डी, माधव, शीलम नरेश, संतोष रेड्डी, राज कुमार, दोंतु मार्केंडेय, पटेल सुधाकर, रामचंदर, मल्लन्ना और सत्यम के संघर्ष की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया गया। इसी के अंतर्गत कभी-कभी विस्फोटों के माध्यम से अपनी उपस्थिति को स्थापित करने और कैडर के मनोबल बढ़ाने के प्रयास किये गये। हिंसा में विश्वास व्यक्त करते हुए भारती कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) माओवादी पार्टी ने निर्णय लिया है कि नई लोकतांत्रिक क्रांति के लिए सशस्त्र संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में विश्वास जगाना मात्र है।

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भविष्य

नक्सली आंदोलन का जन्म भूमि समस्याओं से हुआ है। इसलिए जब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है अर्थात जारी रहेगा। जब कभी प्रतिबंध अधिक होता है तो आंदोलन में रुकावट दिखाई देता है। नक्सलियों के मारे जाने पर हमेशा की गतिविधियां कुछ समय के लिए रुक जाती है। इसके बाद अपनी रणनीति के चलते वे पुनः संगठित हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती बेरोजगारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बंद कर देना या बेच देना, कर्मचारियों की संख्या में कमी करना, किसानों को कृषि से दूर करने वाली मूल्य नीति जैसे हालात ही आंदोलन को बढ़ावा देती हैं और दे रही हैं। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक भूख, निराशा, बेरोजगारी और उत्पीड़न से ग्रस्त समाज का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता है। तब तक नक्सली आंदोलन जारी रहेगा। मुख्य रूप से रोजगार, आजादी, उत्पीड़न से सुरक्षा और व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध होना अति आवश्यक है। इसीलिए नक्सली आंदोलन में जो कुछ दिख रहा है वह विराम मात्र है। समाप्ति नहीं है।

नग्न सत्य

यह नग्न सत्य है और माओवादियों का मानना ​​है भी कि जब तक इस देश में नई लोकतांत्रिक क्रांति हासिल नहीं हो जाती, तब तक दीर्घकालिक सशस्त्र संघर्ष जारी रहेगी। हां, यह भी नग्न सत्य है कि ऑपरेशन कगार और मुठभेड़ के नाम पर मासूम लोगों को मौत के घाट उतारा जा रह है। इनमें मारने और मरने वालों में दलित, आदिवासी, पिछड़ी जाति समुदाय के ही अधितर हैं। इनमें कोई भी जमींदार, कुलीन या नेता का बेटा नहीं है। हां, यह भी नग्न सत्य है कि तेजी से बढ़ते इस वैज्ञानिक युग में माओवादियों को दीर्घकालिक सशस्त्र संघर्ष पर पुनर्विचार करने की अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि मारने और मरने से अच्छा है कि जी कर कुछ हासिल किया जाये। भारत के संविधान में सत्ता में अनेक रास्ते मौजूद हैं। आप सत्ता में आने के बाद “जो जोतेगा उसी की जमीन है” नियम लागू किया जा सकता है। नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड मुख्यमंत्री बने और लोगों ने इसका स्वागत किया। हां, यह बात अलग है कि वे ज्यादा समय सत्ता पर नहीं रह पाये। एक बात और देश की जनता एक बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) माओवादी की सरकार देखना चाहती है।

రక్తంతో ‘‘తడిసిన’’ ఉద్యమం
నక్సల్స్ – పోలీసుల హింస ఆగేదెప్పుడు..?
ధారావాహిక – 08

‘‘దున్నేవానిదే భూమి’’ అనే నినాదంతో నక్సలైట్లు తమ ఉద్యమాన్ని ఉదృతం చేశారు. గ్రామీణ ప్రాంతాలలో భూములు లేని పేదలను సంఘటితం చేశారు. భూస్వాముల భూములలో ఎర్రజెండాలు పాతి గ్రామ రక్షణ దళాల ఆధ్వర్యంలో భూములు పంపిణి చేశారు. కానీ.. భూపోరాటాలకు సంబంధించి దళాలు అన్ని చేయాలనే దృక్పథం వల్ల, భవిష్యత్‌లో రానున్న లీగల్‌ సమస్యలు చర్చించక పోవడం, ప్రజల్లో ఆర్థిక వాదాన్ని అధ్యయనం చేయక పోడంతో నిర్బంధ కాలంలో భూపోరాటాలు ముందుకు వెళ్లలేని పరిస్థితి ఏర్పడిందని అభిప్రాయపడ్డది భారత కమ్యూనిష్టు పార్టీ (మార్క్సిస్ట్‌`లెనినిస్ట్‌) మావోయిస్టు పొలిట్‌బ్యూరో.. దున్నెవానిదే భూమి నిజం కావాలంటే ప్రజారాజ్య అధికారం కావాలన్న సృహను ప్రజల్లో ఇంకా పెంచాలని, సిద్ధాంత నిబంద్ధత, త్యాగనిరతి కలిగిన క్యాడర్‌ను రూపొందించాలని, చదువుకున్న వారిని ఆకర్షించాలని పేర్కొంది.

క్యాడర్‌ లొంగుబాటుకు సాహిత్య అధ్యానాన్ని నిర్లక్ష్యం చేయడం ఒక కారణంగా సమీక్షలో చర్చించింది. యువజన, మహిళ సంఘాల నిర్మాణం పనితీరు మెరుగు పరుచాలని, గ్రామ కమిటీల్లో కొందరి పెత్తనానికి చరమ గీతం పాడి అందరి భాగస్వామ్యం పెంచాలని సహాకార పంఘాలకు కూడా ఇవ్వాలని ఇంటిలిజెన్స్‌ నెట్‌వర్క్‌ మరింత పెంచుకోవాలని సూచించింది. అధ్యయనం నిర్మాణంపై దృష్టి కేంద్రీకరించినట్లయితే సంక్షోభాల నుంచి బయటపడగలమని అభిప్రాయపడింది.

నక్సల్స్‌ ఉద్యమ అద్యయనం.. సమీక్ష ఉద్యమాన్ని ఇదే రీతిలో ముందుకు తీసుకుపోవాలన్న నిర్ణయాన్నే వెల్లడిరచింది. సమీక్ష యావత్తూ పార్టీ నిర్మాణ లోపాలను సమీక్షించింది. మొత్తంగా ఉద్యమ స్పరూపాన్ని మార్చడం, ఉద్యమ ఎత్తుగడలతో గాని, చర్చలు ప్రతి చర్యలు విషయంలో గానీ మార్పులు సూచించలేదు. పోలీసులను ముఖ్య శత్రువులుగా పరిగణించడంలో మార్పులేదు. సాయుధ పోరాటం విషయంలో వెనకడుగూ లేదు.

నేటి ఉద్యమం పరిస్థితి

శతృవు బలమైన దెబ్బకు కొద్దిసేపు ఏర్పడే దిగ్భ్రాంతి వంటి పరిస్థితి ఉద్యమంలో వ్యక్తమైంది. దళాలు చెదిరి పోవడం లొంగిపోవడంతో నక్సల్స్‌ ఉద్యమాన్ని కొన్ని ప్రాంతాలకే పరిమితం చేయకుండా భారత దేశ వ్యావ్తంగా విస్తరించాలని నిర్ణయించింది. మళ్లీ నిర్మాణం చేసుకుని రావాల్సి రావడంతో తాత్కలికంగా ఏర్పడిన స్థబ్దతను అమరులైన ముఖ్యనేతలు సురపనేని జనార్దన్‌ రావు, మల్లోజుల కోటేశ్వర్‌రావు, నల్లా ఆదిరెడ్డి, మాధవ్‌, శీలం నరేష్‌, సంతోష్‌రెడ్డి, రాజ్‌ కుమార్‌, దొంతు మార్కెండెయా, పటెల్‌ సుధాకర్‌, రాంచందర్‌, మల్లన్న, సత్యంలు అస్తమయం అయినా వారి సితాభస్మం నుంచే పునర్జన్మ పొందాలన్న పట్టుదల, అక్కడక్కడా పేల్చివేతలతో ఉనికి చాటే యత్నం, కాడర్‌లో మనోధైర్యానికి యత్నాలు. హింసపైనే విశ్వాసం. ప్రజల్లో ప్రారంభమైన వ్యతిరేకతను గమనించని పరిస్థితి రాజ్యం వేయి చేతులతో విరుచకపడ్డా పోరాటమును ఒంటి చేత్తోనే ఎదుర్కొనే వ్యూహంతో నూతన ప్రజాస్వామిక విప్లవం కోసం సాయుద పోరాటమే ఏకైక మార్గంగా ముందుకు వెళ్లాలని నిర్ణయించింది భారత కమ్యూనిష్టు పార్టీ (మార్క్సిస్ట్‌`లెనినిస్ట్‌) మావోయిస్టు పార్టీ.

రేపు…

ఉద్యమం పుట్టింది సమస్యల్లోంచి కాబట్టి సమస్య తీరనంత వరకూ ఉద్యమం నిలిచిపోదు. నిర్బంధం ఎదురైన ప్రతిసారీ నీరుగారినట్టు కన్పించడం. దళాలు అంతమైనప్పుడు కార్యకలాపాలు ఆగిపోవడం మళ్లీ శక్తియుక్తులు కూడదీసుకోవడం గత అనుభవం. నానాటికీ పెరుగుతున్న నిరుద్యోగం, ప్రభుత్వ రంగ సంస్థల మూసివేత, అమ్మివేత, ఉద్యోగుల కుదింపు, రైతును వ్యవసాయం నుంచే తరిమివేసే ధరల విధానం ఇవన్నీ ఉద్యమానికి ఊతమిచ్చే పరిస్థితి. ఆకలి, నిరాశ, నిరుద్యోగం, పీడన తిష్ట వేసిన సమాజంలో ఉపాధి, స్వేచ్ఛ, పీడన నుంచి రక్షణ, వ్యక్తి వికాసానికి అనువైన వాతావరణం కల్పించనంత వరకు ఈ యుద్దకాండ కొనసాగుతూనే ఉంటుంది. అందుకే ఉద్యమాలకు ఇది విరామం.. విరమణ కాదు.. నూతన ప్రజాస్వామిక విప్లవం సాధించే వరకు దీర్ఘకాలిక సాయుధ పోరాటం జరుగుతునే ఉంటుందని మావోయిస్టులు నమ్మి ఇంకా పోరాటాలు చేస్తున్నారనేది నగ్న సత్యం.

( ఇప్పటికి సమాప్తం.. )

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