हैदराबाद : बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ रही है। खासकर सीमांचल में बीजेपी और जेडीयू को जबरदस्त फायदा मिलता दिख रहा है और इसका क्रेडिट ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को दिया जा रहा है। वैसे तो सीमांचल में एनडीए को कमजोर माना गया था, लेकिन ओवैसी की पार्टी को अच्छे वोट मिलते नजर आ रहे हैं। इसका फायदा अब एनडीए को मिलता दिख रहा है। गौरतलब है कि सीमांचल मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां पर अभी तक महागठबंधन का भारी प्रभाव दिखता रहा है। लेकिन ओवैसी ने महागठबंधन के मुस्लिम वोट बैंक को ढाहकर रख दिया है।
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल में जमकर प्रचार किया था। उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं का विश्वास जीता और ओवैसी, ये विश्वास दिलाने में कामयाब नजर आ रहे हैं कि मुस्लिम हितों की बात करने वाली पार्टियां, असल में उनका इस्तेमाल कर रही हैं। अभी तक के वोटिंग ट्रेंड को देखते हुए यही पता चल रहा है कि सीमांचल की मुस्लिम मतदाताओं ने ओवैसी की बातों पर यकीन किया है और राजद, कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया है।
खबर लिखे जाने तक सीमांचल के 24 विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए को करीब 20 सीटों पर बढ़त मिलते दिख रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 2020 के विधानसभा चुनाव में भी 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में उनके विधायकों ने ओवैसी से दगाबाजी करते हुए लालू की पार्टी में शामिल हो गये थे।
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ज्ञातव्य है कि सीमांचल के विधानसभा क्षेत्रों की करें तो इस क्षेत्र में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले आते हैं। इन चारों जिलों को मिलाकर करीब अलग अलग क्षेत्रों में 30 प्रतिशत से 65 प्रतिशत तक मतदाता हैं। सीमांचल में महागठबंधन की बात करें तो कांग्रेस सबसे ज्यादा 12 सीटों पर, आरजेडी 9 सीटों पर, वीआईपी 2 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, बात अगर एनडीए की करें तो सीमांचल में बीजेपी सबसे ज्यादा 11 सीटों पर, जेडीयू 10 सीटों पर और चिराग पासवान की एलजेपी तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी तरफ सीमांचल की 24 में से ओवैसी की एआईएमआईएम 15 सीटों पर चुनाव लड़ है। (एजेंसियां)
