हैदराबाद : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एक बार फिर विवादों में फंस गये हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाया है। दावा किया है कि पूर्व मिस स्विट्जरलैंड और मॉडल बीट्रिस केउल ने ट्रंप पर बलात्कार का आरोप लगाया है। केउल का दावा है कि नवंबर 1993 को ट्रंप ने उसके साथ रेप किया था। इसके अलावा ट्रंप और कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एप्स्टीन के कथित संबंधों का ब्योरा दिया है। व्हाइट हाउस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि इसका मकसद राष्ट्रपति ट्रंप की ऐतिहासिक उपलब्धियों और रिपब्लिकन पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से अमेरिकी जनता का ध्यान भटकाना मात्र है।

डेमोक्रेट्स ने 53 पन्नों की रिपोर्ट में ट्रंप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को फिर से उठाया है। साथ ही कहा क ट्रंप कभी जेफरी एपस्टीन के करीबी दोस्त थे। गौरतलब है कि एपस्टीन की 2019 में नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोपों में जेल में मौत हो गई थी। इसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या करार दिया गया था। बलात्कार के आरोपों को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने पूर्व मिस स्विट्जरलैंड बीट्रिस केउल के इंटरव्यू का हवाला दिया है। केउल के मुताबिक उनकी मुलाकात ट्रंप से तब हुई थी जब वह 24 साल की थीं। यह मुलाकात न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल में एक प्रतियोगिता में हुई थी। इस होटल के मालिक उस समय ट्रंप ही थे। केउल का आरोप है कि ट्रंप ने उनसे कहा था कि मैं तुम्हारा ध्यान रखूंगा। इसके अलावा उन्हें वीजा दिलवाने और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में एडमिशन का वादा दिया था। इसके तुरंत बाद जेफरी एपस्टीन ने उनसे संपर्क किया और उन्हें मार-ए-लागो में एक पार्टी के लिए आमंत्रित किया था।

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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाद में ट्रंप के एक प्रतिनिधि ने केउल को अटलांटिक सिटी स्थित ट्रंप प्लाजा होटल में ऊपर एक कमरे में मिलने के लिए बुलाया। केउल का आरोप है कि कमरे में प्रवेश करते ही ट्रंप ने उन्हें पकड़ लिया और रेप किया। इस दौरान इस दौरान उनके कपड़े फट गए और शरीर पर कई जगह चोटें और खरोंचें आईं। केउल ने इंटरव्यू में इस घटना का काफी क्रूर बताया। ट्रंप का हमेशा से यह कहता रहा है कि एपस्टीन के किसी भी गलत या गैर-कानूनी काम में फंसने से बहुत पहले ही उन्होंने उससे अपनी दोस्ती तोड़ ली थी। ट्रंप ने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन फाइल्स को जारी किए जाने से रोकने के लिए महीनों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। हालांकि, अंततः उन्होंने अमेरिकी संसद की ओर से पारित उस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके तहत इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया।
