आईसीएमआर – राष्ट्रीय पोषण संस्थान में 108वाँ स्थापना दिवस का भव्य आयोजन, मुख्य अतिथि ने दिया यह संदेश, ये रहे कार्यक्रम के खास आकर्षण

हैदराबाद : आई.सी.एम.आर. – राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आई.सी.एम.आर.-एन.आई.एन.) द्वारा अपना 108वाँ स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पोषण, स्वास्थ्य एवं खाद्य परिवेश से संबंधित वैज्ञानिक एवं सामाजिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया तथा राष्ट्र के स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के योगदान को स्मरण किया गया।

समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आई.सी.एम.आर.-एन.आई.एन. की निदेशक, डॉ. भारती कुलकर्णी ने वर्ष 1918 से अब तक संस्थान की गौरवशाली यात्रा तथा पोषण अनुसंधान, नीतियों और कार्यक्रमों में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत में कुपोषण एवं सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी के साथ-साथ बढ़ते हुए अधिक वजन एवं मोटापे की समस्या जैसी पोषण संबंधी चुनौतियों पर भी अपने विचार रखें।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर.) के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव, डॉ. राजीव बहल ने देश की पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान में आई.सी.एम.आर.-एन.आई.एन. महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करने तथा वैज्ञानिक कठोरता एवं सत्यनिष्ठा के साथ उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

स्थापना दिवस व्याख्यान पद्म विभूषण से सम्मानित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के संस्थापक-अध्यक्ष, डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी द्वारा ‘गट माइक्रोबायोम एवं स्वास्थ्य’ विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने आंत्र सूक्ष्मजीव समुदाय (गट माइक्रोबायोम) और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर चर्चा की। साथ ही, प्रारंभिक जीवन के कारकों, आहार एवं जीवनशैली के प्रभावों पर भी प्रकाश डाला।

समारोह के मुख्य अतिथि और डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति, प्रो. चक्रपाणि घंटा ने ‘खाद्य पदार्थों में न्याय का अधिकार’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने खाद्य एवं पोषण के व्यापक सामाजिक पहलुओं को स्पष्ट करते हुए लोगों को खाद्य पदार्थों के चयन के संबंध में जागरूक एवं सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर पोषण एवं स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने वाले युवा शोधकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। डॉ. कृष्ण कल्याण कालहस्ती को उनके उत्कृष्ट पीएच.डी. अनुसंधान के लिए शोधार्थी श्रेणी में श्रीमती मालती तुलपुले पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि सौमम दत्ता को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों तथा अनुसंधान एवं वैज्ञानिक गतिविधियों में योगदान के लिए प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत 25 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। इस समारोह में संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों तथा एन.आई.एन. परिवार के अन्य सदस्यों ने भाग लिया। यह समारोह पोषण अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के निरंतर योगदान को उजागर करने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

वर्ष 1918 में स्थापित आई.सी.एम.आर.-एन.आई.एन., भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है, जो पोषण के क्षेत्र में वैज्ञानिक साक्ष्य उत्पन्न करने तथा देश में पोषण संबंधी वर्तमान एवं उभरती जनस्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान हेतु अनुसंधान कार्यों में समर्पित है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुब्बाराव एम. गवरवरपु, वैज्ञानिक ‘जी’ द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. एम. महेश्वर वैज्ञानिक ‘एफ’ सहित संस्थान के वैज्ञानिक, स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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