कौशाम्बी (अमरदीप दिवाकर ‘पिन्टू’ की रिपोर्ट) : वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD) सुधवर चायल कौशाम्बी के तत्वावधान में शनिवार को प्रख्यात समाज सेविका एवं वीरांगना चाकली एलम्मा की 131वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चाकली एलम्मा के संघर्ष, साहस, त्याग और समाज सेवा के योगदान को स्मरण करते हुए उनके विचारों एवं संघर्षशील जीवन से समाज को प्रेरणा प्रदान करना था। कार्यक्रम प्रमुख समाज सेवी अनिल कुमार के आवास पर आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित लोगों द्वारा वीरांगना चाकली एलम्मा के छायाचित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इस अवसर पर एलम्मा के जीवन संघर्षों को याद करते हुए कहा गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस के साथ संघर्ष किया तथा समाज में सम्मान, समानता और अधिकारों की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन विशेष रूप से महिलाओं के आत्मसम्मान, संघर्षशीलता, सामाजिक चेतना, सामाजिक न्याय और सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरणादायी है।

कार्यक्रम में चाकली एलम्मा के साहस, त्याग, समाज सेवा और महिला समानता के लिए उनके संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने आगे कहा कि महान सामाजिक व्यक्तित्वों का स्मरण केवल जयंती मनाने तक सीमित न रहकर उनके विचारों को सामाजिक जीवन में अपनाने का माध्यम बनना चाहिए।
Also Read-
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए ममता दिवाकर ने उनके द्वारा समाज में वंचित तबकों, महिलाओं और किसानों के लिए किए गए योगदान की चर्चा की और बताया कि किस प्रकार आज से 100 वर्ष पूर्व ब्रिटिश निजाम और जमींदारों से अपने हक हुक़ूक़ की लड़ाई लड़ी और समाज में महिलाओं को उनका हक दिलाया। चाकली एलम्मा का जीवन गरीबी, सामाजिक भेदभाव और कठिन परिस्थितियों में बीता लेकिन वे जीवन भर समाज की बेहतरी के लिए संघर्ष करती रहीं और जमीदारों, सामंती लोगों की अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ डटकर लड़ीं और हर अत्याचार -उत्पीड़न का विरोध किया।

डॉ. संदीप दिवाकर ने कहा कि हमारे समाज के लोगों को वीरांगना चाकली एलम्मा से सीख लेने की आवश्यकता है कि वह संगठित रहकर एक दूसरे का साथ दें क्योंकि संगठन एक ऐसा माध्यम है जिससे जुड़कर व्यक्ति अपने हक के लिए लड़ना, बोलना और अपने हक की बात करना सीख जाता है, यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि समाज का नेतृत्व करने की क्षमता जिसके अंदर होती है वही व्यक्ति समाज को आगे बढ़ा सकता है।
ऊषा चौधरी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी समाज को आगे बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका सबसे अग्रणी है। महिलाएं ही परिवार की धुरी होती हैं। परिवार में जो वह कहेंगी वही लोग करते हैं। इसलिए हमको जरूरत है कि हम जब भी कहीं किसी सामाजिक बैठक में या किसी सामाजिक कार्यक्रम में जाएं तो अपनी बेटियों और पत्नियों को जरूर साथ ले जाएं जिससे वह अपने समाज के महान नायक-नायिकाओं के बारे में जानेंगे और सामाजिक कुप्रथाओं का त्याग करने के लिए प्रेरित होंगे।
ओम प्रकाश चौधरी के द्वारा वीरनारी चकली एलम्मा जी की अदम्य साहस और वीरता को अपनी स्वरचित रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया। राहुल दिवाकर ने कहा कि समाज में लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त कर लड़के-लड़कियों को एक बराबर अवसर प्रदान करना चाहिए जिससे लड़कियां भी आगे चलकर उच्च शिक्षा में समाज और परिवार का नाम रोशन कर सकें। श्रेयस दिवाकर ने कहा कि चकली एलम्मा सामाजिक न्याय की मूर्ति थी उन्होंने आजीवन अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी एवं अन्य समाज के लोगों को भी सम्मान दिलाया।

राजेश चौधरी ने कहा कि सामजिक संगोष्ठियां समाज को एक नई दिशा प्रदान करती हैं इसलिए समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बृजेन्द्र चौधरी ने कहा कि अगर हम समाज के लोग बैठकों में नहीं जा सकते हैं तो कम से कम उनके समर्थन के लिए अपने वेतन का अगर एक प्रतिशत भी आर्थिक सहयोग के तौर पर देते रहें तो समाज के किसी वंचित छात्र-छात्राओं के पढ़ाई में काम आ सकता है और जरूरत पड़ने पर आपदा में भी समाज का सहयोग किया जा सकता है।
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (वर्ड) के संस्थापक डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि संस्था आगे भी समाज के शिक्षा, रोजगार, सम्मान और सामाजिक सरोकारों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता एवं जनहित के कार्यक्रमों को बढ़ावा देती रहेगी। कार्यक्रम का संचालन अमरदीप दिवाकर द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन अनिल सरला चौधरी जी के द्वारा किया गया।
प्रसिद्ध गायक एवं कवि विमल चौधरी द्वारा शिक्षा पर एक बहुत ही प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया गया। इस अवसर राहुल दिवाकर के नवीन प्रतिष्ठान आर एस वर्मी कंपोस्ट खाद का अनावरण भी किया गया। कार्यक्रम में ओम प्रकाश चौधरी, बृजेन्द्र बहादुर, अनिल चौधरी, ममता दिवाकर, सरला चौधरी, ऊषा चौधरी, मोनिका, गुड़िया, आनंद दिवाकर, कामता प्रसाद चौधरी, राजेश चौधरी, प्रदीप चौधरी, विमल चौधरी, विष्णु प्रताप, तेजस, श्रेयस सहित समाज के तमाम लोग मौजूद रहे।
