गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें अपने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी देती है। इसी सोच के साथ सलारपुरिया सत्त्वा ग्रुप, बेंगलुरु में इस वर्ष गणेश उत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए ‘ग्रीन गणेश’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के बीच पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की प्रतिमाओं, गैर-पर्यावरण-अनुकूल रंगों और हानिकारक सजावटी सामग्रियों के उपयोग को हतोत्साह करना था।
इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर फाइनेंस टीम से दीपक एस एन, ध्रुवराज, किरण एस रहे हैं। साथ ही द्वितीय स्थान पर शोभा वैभवी और रश्मि रही हैं और तृतीय स्थान पर प्रिया, इंदुमती और लवीना ने जीता हैं। अभियान के माध्यम से कर्मचारियों को मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने और उत्सव के बाद उनका उचित पुनर्चक्रण करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल को कर्मचारियों ने न केवल उत्साहपूर्वक अपनाया, बल्कि अपनी रचनात्मक सोच और नए विचारों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के संदेश को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

इसी उद्देश्य से रचनात्मक जागरूकता प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी कल्पना शक्ति, कला और रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सुंदर माहौल देखने को मिला। कर्मचारियों ने पूरे उत्साह से भाग लिया। अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि उत्सव की खुशी और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी एक साथ निभाई जा सकती है।
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इस पहल का उद्देश्य केवल एक प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच को प्रोत्साहित करना था जो उत्सव के बाद भी हमारे व्यवहार का हिस्सा बने। हर छोटी पहल एक बड़े बदलाव की शुरुआत होती है। सलारपुरिया सत्त्वा बेंगलुरु के कर्मचारियों की यह उत्साहपूर्ण सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जब आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी एक साथ आती हैं, तो उत्सव केवल मनाया नहीं जाता, बल्कि वह समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश भी छोड़ जाता है।
आइए, इस गणेश चतुर्थी एक ऐसा संकल्प लें, जिसमें हमारी भक्ति के साथ प्रकृति के प्रति हमारा दायित्व भी जुड़ा रहे।
बप्पा की भक्ति भी,
प्रकृति की शक्ति भी।
आस्था भी,
जागरूकता भी।
उत्सव भी,
पर्यावरण संरक्षण भी।
गणपति बप्पा मोरया!
अमृता श्रीवास्तव (बेंगलुरु) की कलम से…
