भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा केवल दिल्ली, बम्बई या कोलकत्ता तक सीमित नहीं थी। निज़ाम शासित हैदराबाद राज्य भी इस ज्वाला से अछूता नहीं रहा। आर्य समाज के तपस्वियों और त्यागियों ने यहां अपने अद्वितीय बलिदान से गुलामी की जंजीरों को तोड़ा और हैदराबाद मुक्ति आंदोलन को आर्य समाज ने नई दशा दी।
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त्याग ही जीवन का अमृत
आर्य समाज का इतिहास त्याग और बलिदान का रहा है। धन्य है जो परिवार, समाज, देश और धर्म के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। सन् 1938 में निज़ाम सरकार की दमनकारी नीतियों ने हैदराबाद के आर्यों को हिंदुओं की रक्षा हेतु आंदोलत किया। क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी ने पंडित दत्तात्रेय प्रसाद वकील के नेतृत्व में अपने साथियों के साथ मिलकर आर्यन डिफेन्स लीग (आर्य रक्षा समिति) की स्थापना की। इसमें राजपाल, प्रताप नारायण, ए.बाल रेड्डी, सोहनलाल और विश्वनाथ जैसे नेता सक्रिय रहे है।

आर्य महा सत्याग्रह का बिगुल
निज़ाम शाही के विरुद्ध आर्य रक्षा समिति ने हैदराबाद सत्याग्रह का शंखनाद किया। गंगाराम जी के नेतृत्व और संगठन क्षमता के बल पर 22 जत्थों के सत्याग्रही जेल की यातनाएं सहते हुए धर्म और स्वतंत्रता की राह पर डटे रहे। इन जत्थों के सर्वाधिकारी थे पंडित दत्तात्रेय प्रसाद वकील, पंडित देवीलाल, दिगंबरराव शिवनगीकर, शंकरराव पटेल, दिगंबरराव लाठकर, बंसीलाल व्यास, शेषराव वाघमारे आदि। हैदराबाद राज्य से ही लगभग 5000 सत्याग्रही जेल गए। वाहनों पर ओ३म् के ध्वज फहराते और वैदिक धर्म के जयघोष के नारे से गूंजते रहे। हर स्टेशन पर सत्याग्रहियों का स्वागत होता गया। समाचार पत्रों में निज़ाम के जेलों में हो रहे अमानवीय अत्याचारों से भरे रहते, जो कायरों में भय और वीरों में जोश भरते थे।
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आर्य समाज की रणनीति
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ने सोलापुर अधिवेशन में आंदोलन का समर्थन किया। संचालन की जिम्मेदारी स्वामी स्वतंत्रता नंद जी को दी गई, जिन्होंने क्रांतिवीर पंडित गंगाराम को गुप्त संगठनात्मक कार्य सौंपा गया। देशभर से जत्थे तैयार हुए। प्रथम जत्था महात्मा नारायण स्वामी जी के नेतृत्व में और इस तरह सात जत्थे निज़ाम के विरुद्ध सत्याग्रह पर गिरफ्तार हुए। आठवें जत्थे का नेतृत्व पंडित विनायकराव विद्यालंकार कर रहे थे। हालांकि आंदोलन की सफलता को देखकर निज़ाम सरकार को झुकना ही पड़ा, सभी मांगे मान ली गई और जेल में बंद सभी को रिहा कर दिया गया।

हुतात्माओं का अमर बलिदान
हैदराबाद आर्य महासत्याग्रह में सैकडों सत्याग्रही वीरगति को प्राप्त हो गये। पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड से लेकर हैदराबाद राज्य तक की वीरों ने अपना जीवन अर्पित किया। इन अमर बलिदानियों ने ही निज़ाम शासन की नींव हिला दी। भाग्यनगर (हैदराबाद) की धरती पर उनके त्याग को स्थायी रूप से संजोया गया। हैदराबाद मुक्ति दिवस पर हमें उन अज्ञात वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए, जिन्होंने निजामशाही की बेडियों को तोड़कर स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर ही नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेनी चाहिए।
संकलन : भक्त राम, अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी पं गंगाराम स्मारक मंच
