हैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा 16 सितंबर तक स्थगित हो गई है। इस संबंध में विधान सभा को एक दिन बढ़ाते हुए सरकार ने फैसला लिया है। 16 सितंबर को विधान सभा में एल नीनो पर लंबी चर्चा होने वाली है। बारिश की कमी की स्थिति से कैसे निपटा जाए? किसानों के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर सदस्य चर्चा करेंगे। साथ ही, निषिद्ध भूमि सूची (22ए) के विषय पर चर्चा का मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जवाब देने वाले हैं।

ज्ञातव्य है कि 7 सितंबर 2026 को तेलंगाना विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हुआ था। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की मीटिंग में स्पीकर ने एक सप्ताह तक विधानसभा सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया था। शेड्यूल के अनुसार यह सत्र 12 सितंबर को समाप्त होना था। लेकिन सरकार ने विधानसभा सत्र को एक दिन बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत विधान सभा 16 सितंबर तक स्थगित हो गई है। उस दिन एल नीनो की स्थिति पर सदन में चर्चा होगी। तेलंगाना में भारी हंगामा मचा रही निषिद्ध भूमि सूची (22ए) के विषय पर 12 सितंबर को विधान सभा में सरकार ने अल्पकालिक चर्चा की। इस दौरान सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस पार्टी के बीच जुबानी जंग हुई। लंबी चर्चा करते हुए मंत्री पोंगुलेटी ने पिछली बीआरएस सरकार पर हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि 22ए को उनकी सरकार नया नहीं लाई है, 1999 में ही 22ए नियम लागू हुआ था।
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मंत्री ने बताया कि असाइन्ड और सरकारी भूमियों को बचाने के लिए ही 22ए लाया गया था। पोंगुलेटी ने कहा कि 2015 में 22ए विषय पर पांच सदस्यीय बेंच ने फैसला दिया था। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार 22ए भूमियों को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया, उसके बाद 2016 में जीओ नंबर 121 लाया गया। हालांकि जीओ जारी करने के बावजूद उससे संबंधित कार्यविधि घोषित नहीं की गई। पोंगुलेटी ने आरोप लगाया कि धरणी लाने के क्रम में कोर्ट के आदेशों को किनारे कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 2017 से 2025 तक 28,611 मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन समस्याओं के कारण भू-पीड़ितों को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े। मंत्री ने बताया कि कोर्ट ने निषिद्ध भूमि सूची को पब्लिक डोमेन में रखने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा सुझाए गए नियमों के अनुसार कमेटी का गठन कर, निषिद्ध सूची को पब्लिक डोमेन में रखा गया है।
पोंगुलेटी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने नई कोई भी भूमि निषिद्ध सूची में नहीं जोड़ी है। उन्होंने बताया कि पहले से मौजूद भूमियां ही वर्तमान में निषिद्ध सूची में हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि 22ए सूची में गलतियां होना सच है, लेकिन अधिकारियों ने जानबूझकर या स्वार्थ के लिए वे गलतियां नहीं की हैं। पोंगुलेटी ने बताया कि हुई गलतियों को सरकार ने युद्धस्तर पर सुलझाया है। उन्होंने कहा कि तीन चरणों में मंडल स्तर से राज्य स्तर तक अधिकारियों के साथ चर्चाएं कीं। उन्होंने बताया कि संबंधित प्रतियां, रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। मंत्री ने खुलासा किया कि केवल दो दिनों में ही 22ए से संबंधित गलतियों को सुलझाकर रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू कर दिए गए हैं।
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बीजेपीएलपी नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी ने मांग की कि 22ए विषय पर बोलने के लिए उन्हें मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज न दबाए। उन्होंने मांग की कि आखिर 22ए में कितनी भूमि हैं, इसका विवरण बाहर लाया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार वह विवरण पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं रख रही है। उन्होंने पूछा कि यह बताइए कि पिछली बीआरएस सरकार के कार्यकाल में हुई गलतियों पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि धरणी की जगह कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए भू-भारती पोर्टल में भी गलतियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की भूमि की रक्षा करने की जिम्मेदारी सरकार पर है। उन्होंने सवाल किया कि यह बताइए कि जो भूमि हैं ही नहीं, उन्हें निषिद्ध सूची में क्यों डाला गया।
