हैदराबाद: विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय युवा शटलर त्रिसा जॉली-गायत्री गोपीचंद ने शानदार प्रदर्शन से मचा दिया है। आज (20 अगस्त) हुए महिला डबल्स राउंड ऑफ 16 में जापान की 7वीं सीड जोड़ी रेन इवानगा-की नकानिशी को 21-16, 21-12 से सीधे गेम्स में हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है। विश्व रैंकिंग में 39वें स्थान पर मौजूद भारतीय जोड़ी ने शुरू से ही फुल अटैकिंग गेम दिखाया। त्रिसा ने अपने पावरफुल जंप स्मैश से विरोधियों पर जबरदस्त दबाव बनाया, जबकि गायत्री ने फ्रंट कोर्ट में माइंड-ब्लोइंग टाइमिंग के साथ पॉइंट्स बनाए। दोनों के परफेक्ट कोर्ट रोटेशन ने जापान की जोड़ी को कोई मौका नहीं दिया। विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 का आयोजन भारत के नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 17 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा।

येलो कार्ड और गोपीचंद का मास्टर प्लान
इस मैच के बीच में हाई-वोल्टेज ड्रामा भी हुआ। लाइन कॉल्स को लेकर भारतीय खिलाड़ियों और अंपायर के बीच हल्की बहस हुई, साथ ही जानबूझकर शटल मारने के लिए अंपायर ने त्रिसा को येलो कार्ड भी दे दिया। इस तनावपूर्ण समय में कोच पुलेला गोपीचंद ने कूल रहकर मैच को पलट दिया। अंपायर के फैसले से दबाव में आए बिना त्रिसा और गायत्री को शांत रखते हुए, टैक्टिकली गेम को होल्ड करने का मास्टर प्लान बनाया। इससे हमारे खिलाड़ियों ने और ज्यादा फोकस के साथ खेलकर मैच को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया।

चीन से आमना-सामना
क्वार्टर फाइनल में भारतीय जोड़ी का मुकाबला चीन की दुनिया की नंबर 4 जोड़ी जिया यी फैन-झांग शू शियान से होगा। अब तक इस चीनी जोड़ी से गायत्री-त्रिसा 3 बार भिड़ चुकी हैं, और एक बार भी जीत नहीं पाई हैं। लेकिन अगर मौजूदा फॉर्म को बरकरार रखते हुए जीत हासिल की, तो भारतीय जोड़ी विश्व चैंपियनशिप में पदक पक्का कर लेगी। साथ ही चीन के खिलाफ हार की लड़ी भी खत्म हो जाएगी।
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भारतीय महिला डबल्स के इतिहास में विश्व चैंपियनशिप में आखिरी बार ज्वाला गुट्टा-अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने 2011 में पदक जीतकर रिकॉर्ड बनाया था। उसके बाद लंबे समय तक कोई जीत नहीं मिली। कल (शुक्रवार) होने वाले हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल में अगर चीनी जोड़ी को हरा दिया, तो विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला डबल्स जोड़ी के रूप में गायत्री गोपीचंद-त्रिसा जॉली भारतीय बैडमिंटन इतिहास में एक और आइकॉनिक पन्ना लिख देंगी।
