बेंगलुरु/हैदराबाद: जापान के हिरोतोषी तनाका नामक एक युवक अंग्रेजी सीखने के लिए 2019 में कर्नाटक के बेंगलुरु आया था। हालांकि, कोचिंग सेंटर के मालिक से झगड़े के कारण उसे पुलिस स्टेशन और फिर सेंट्रल जेल जाना पड़ा। न्याय के लिए हाईकोर्ट गये इस युवक ने अपने साथ हुए अन्याय को लेकर कर्नाटक मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की। हालांकि इस केस की सुनवाई के दौरान ही 2021 में उसे जबरन स्वदेश भेज दिया गया। करीब 7 साल बाद कर्नाटक मानवाधिकार आयोग ने कर्नाटक सरकार को आदेश दिया कि उसे 75 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
बार-बार क्लास रद्द होने से नाराजगी
जापान के शिज़ुओका इलाके के रहने वाले हिरोतोषी तनाका (36) ने साइकोलॉजी पढ़ी है। अंग्रेजी सीखने के साथ-साथ भारत में कुछ समय बिताने के इरादे से वह 2019 में बेंगलुरु आया था। यहां उसने एक प्राइवेट इंग्लिश एकेडमी में एडमिशन लिया। लेकिन बार-बार क्लास रद्द होना और पढ़ाई ठीक से न होने से वह नाराज हो गया। ऐसा क्यों हो रहा है, यह उसने कई बार एकेडमी के हेड से पूछा। लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे बात बढ़कर बहस हो गई। सामने वालों के उकसाने पर धैर्य खोकर तनाका ने एकेडमी हेड के गाल पर थप्पड़ मार दिया।
पुलिस में शिकायत
इसके बाद एकेडमी वालों ने तनाका के खिलाफ आरटी नगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। केस छोटा होने के कारण उसे बेल मिल सकती थी, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था के बारे में जापानी युवक को कुछ भी जानकारी नहीं थी, और केस की प्रक्रिया समझाने वाला भी कोई नहीं था। इसलिए 23 नवंबर 2019 को उसे गिरफ्तार कर बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया गया। 19 दिन जेल में रहने के बाद तनाका 11 दिसंबर को बाहर आया।
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एक कैदी ने की मदद
तनाका के गिरफ्तार होने और जेल जाने पर पुलिस या मजिस्ट्रेट के सामने किसी ने भी उसे केस के बारे में नहीं बताया। उस पर किन-किन धाराओं में केस लगा है, कस्टडी, बेल, मजिस्ट्रेट, वकील जैसे शब्दों का भी उसे कुछ पता नहीं था। लेकिन जेल में एक कैदी ने तनाका की मदद की। तीन हत्या के मामले में जेल आया शंकर नामक कैदी कानूनी लड़ाई में तनाका के साथ खड़ा रहा। जब तनाका के पास बेल के लिए भी पैसे नहीं थे तब शंकर ने उसका साथ दिया। तनाका ने कहा कि शंकर न होता तो शायद मैं बाहर न आ पाता। जेल स्टाफ और सुपरिंटेंडेंट ने भी अपनी तरफ से तनाका की मदद की।
सेहत खराब हो गई
जेल जाने से पहले तनाका ADHD (एकाग्रता की कमी) और नींद न आने की समस्या का इलाज करवा रहा था। लेकिन जेल में 19 दिन रहने के दौरान उसने दवाएं नहीं लीं। इससे उसकी सेहत खराब हो गई। उसकी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन हॉस्टल में थी। मेडिकल डॉक्यूमेंटेशन वाली इन दवाओं को जेल का डॉक्टर लिखकर नहीं दे सकता था।
जमानत पर बाहर
जमानत पर बाहर आने के बाद तनाका अपना सामान लेने पुलिस स्टेशन गया। उसकी हालत देखकर एक कांस्टेबल ने उसे 1500 रुपये दिए। लेकिन एसआई ने उससे रिश्वत मांगी। इसलिए तनाका ने उस पुलिस अधिकारी को 5500 रुपये दिए। कुछ दिन बाद जब वह कोर्ट में सुनवाई के लिए हाजिर हुआ तो उसी पुलिस अधिकारी ने केस सेटल करने के लिए 3000 रुपये की मांग की। लेकिन तनाका इसके लिए राजी नहीं हुआ।
कर्नाटक हाईकोर्ट
अपने खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस को चुनौती देते हुए तनाका ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया। इसी बीच कोरोना शुरू हो गया था। कोचिंग सेंटर के हेड ने समस्या सुलझाने पर सहमति जताई। इसलिए 2 नवंबर 2020 को हाईकोर्ट ने तनाका पर लगा केस खारिज कर दिया। उससे रिश्वत मांगने वाले पुलिस अधिकारी की शिकायत करते हुए तनाका ने दिसंबर 2020 में कर्नाटक मानवाधिकार आयोग से संपर्क किया। एक दिन डीएसपी के भाई से तनाका की हॉस्टल में अचानक मुलाकात हुई। बातचीत में तनाका ने अपनी कहानी बताई तो उसने मानवाधिकार आयोग जाने की सलाह दी।
आरटी नगर पुलिस स्टेशन के एसआई ने रिश्वत ली
तनाका ने उससे रिश्वत लेने वाले आरटी नगर पुलिस स्टेशन के एसआई के खिलाफ HRC में शिकायत की। लेकिन तब तक वह रिटायर हो चुका था। केस खत्म करने के लिए रिश्वत मांगने वाले एसआई पर कार्रवाई करने और अपने यात्रा खर्च दिलवाने की मांग उसने की।
मानवाधिकार आयोग
तनाका पर दर्ज केस को हाईकोर्ट के खारिज करने और उसके वीजा की अवधि खत्म होने के कारण फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस ने उसे 28 फरवरी 2021 तक भारत छोड़ने का आदेश दिया। लेकिन मानवाधिकार आयोग में उसका केस अभी सुनवाई की अवस्था में ही था, इसलिए तनाका स्वदेश वापस जाना नहीं चाहता था।
प्लास्टिक की कुर्सी चुराई
इसलिए 28 फरवरी की रात 1 बजे तनाका जेसी नगर एसीपी ऑफिस गया और वहां से जानबूझकर एक सफेद प्लास्टिक की कुर्सी चुराकर घर ले गया। एसीपी ऑफिस में कुर्सी के साथ फोटो खिंचवाकर उसे X (Twitter) पर पोस्ट कर दिया। उसका मकसद था कि इस छोटे केस में पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले, तो उसे स्वदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन पुलिस ने तनाका की प्लानिंग भांप ली। सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट वायरल होने के बावजूद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज नहीं किया।
जापान से ही कानूनी लड़ाई
इसके बाद तनाका ने सोचा कि वो कुर्सी वापस एसीपी ऑफिस में देगा। लेकिन ऐसा करने से पहले ही पुलिस ने उसे डिपोर्टेशन सेंटर भेज दिया। अप्रैल 2021 में तनाका को जापान डिपोर्ट कर दिया गया। इसके बाद बेंगलुरु के एक वकील की मदद से तनाका ने जापान से ही कानूनी लड़ाई जारी रखी। 9 मई 2022 को मानवाधिकार आयोग ने तनाका के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कर्नाटक सरकार को उसे 75 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही रिश्वत मांगने वाले पुलिस अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी आदेश दिया।
वकील के खाते में 75 हजार रुपये ट्रांसफर
दो महीने बीत जाने के बाद भी मानवाधिकार आयोग के आदेश लागू न होने पर तनाका ने सितंबर 2022 में आदेश लागू करवाने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वो केस सालों तक चलता रहा। आखिरकार अप्रैल 2026 में कर्नाटक सरकार ने तनाका के वकील के खाते में 75 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए एफिडेविट दाखिल किया। इस साल 22 जून को तनाका के वकील के खाते में पैसे जमा कर दिए गए।
कानूनी लड़ाई लड़कर जीता
अंग्रेजी सीखने के लिए भारत आए तनाका को 19 दिन जेल में बिताने पड़े। इसके साथ ही उसने हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग में कानूनी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। इस दौरान उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, साथ ही उसने कई दोस्त भी बनाए। इसी दौरान उसे पूर्वोत्तर राज्य की एक लड़की से प्यार हो गया।
दोनों की सगाई हुई
मार्च 2024 में वो लड़की तनाका से मिलने जापान गई। तब दोनों की सगाई हो गई। 2025 में दोनों ने शादी कर ली। अभी वो बेंगलुरु में ही रहती है। तनाका को डिपोर्ट किए जाने के कारण उसका नाम ब्लैक लिस्ट में है। इसलिए वह भारत वापस नहीं आ पा रहा है। मुंबई के एक वकील की मदद से तनाका अपना नाम ब्लैक लिस्ट से हटवाने की कोशिश कर रहा है। अगर भारत आ पाया तो वह नॉर्थ ईस्ट में अपने ससुराल जाकर पत्नी के सभी परिजनों से मिलना चाहता है।
