हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति, हैदराबाद तेलंगाना की 137 वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ दया कृष्ण गोयल व समिति की महामंत्री ममता कुमारी जायसवाल की उपस्थिति में ऑनलाइन किया गया। गोष्ठी के दोनों सत्रों की अध्यक्षता डॉ दया कृष्णा गोयल द्वारा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ हर्ष लता दूधोडिया के सरस्वती वंदना द्वारा हुआ। यह सरस्वती वंदना उनके साहित्य सेवी पिता द्वारा लिखी गई थी। सरस्वती वंदना के उपरांत डॉ दया कृष्ण गोयल ने स्वागत भाषण में प्रस्तुत विषय “हिंदी काव्य साहित्य व सिने जगत में वर्षा ऋतु का वर्णन” संबंधित ज्ञान का संवर्धन किया।

इसी क्रम में विनय सिंह विषय प्रवर्तक के रूप में ने वर्षा ऋतु को ऋतुओं की रानी का उल्लेख करते हुए हिंदी काव्य साहित्य व इन जगत में वर्षा ऋतु पर अपने विचार सहज सुग्राहय रुप में प्रस्तुत किये। विषय के प्रति अपने अच्छा चिंतन को प्रस्तुत करते हुए विषय की प्रमुख प्रवक्ता डॉक्टर सुपर्णा मुखर्जी ने विषय कि वह विधाता उसकी समकालीन संस्कृत साहित्य से परिवर्तित करते हुए हिंदी साहित्य के चारों युगों पर सिंहावलोकन करते हुए सीने जगत में वर्षा ऋतु के छायांकन व प्रस्तुति पर अपने गहन अध्ययन की अमित छाप छोड़ते हुए सरल रूप से क्रमवार्ता से साहित्य सुधिगण को विषय ज्ञान से आप्लावित किया।
यह भी पढ़ें-
बैजनाथ सुनहरे ने प्राचीन साइन की जीत व साहित्य गीतों की अपनी स्मृति को सांझा किया। दर्शन सिंह ने क्रमवार रूप से विषय का परिचय दिया। प्रथम सत्र विषय चर्चा का संचालन समिति के महामंत्री ममता जायसवाल द्वारा संपन्न किया गया तथा द्वितीय सत्र काव्य गोष्ठी का संचालन इंदु सिंह ने संभाला।
इस अवसर पर गिरधारी लाल गुप्ता, तृप्ति मिश्रा, आचार्य प्रताप, मंजू राठी की उपस्थिति में गणमान्य कवियों श्रृति कांत भारती, गजानन पांडे, अजय कुमार पांडे, बैजनाथ सुनहरे,दर्शन सिंह, हर्षलता दुधोडिया, डॉ अर्चना पांडे, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, सीमा जख्वाल दामिनी, विनोद गिरि अनोखा, डॉ संगीता शर्मा, इंदू सिंह, वर्षा शर्मा, ममता जायसवाल, डॉ दया कृष्ण गोयल अन्य ने गजल गीत व कविताओं की प्रस्तुति की। डॉ दया कृष्ण गोयल के अध्यक्षीय भाषण के उपरांत विनोद गिरि अनोखा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
