हैदराबाद : महर्षि दयानंद सरस्वती सत्यार्थ सिद्धांत प्रचार समिति पालमूरु (महबूबनगर) जिला की ओर से गायत्री फंक्शन हॉल में ‘अग्निहोत्र महाविज्ञान’ अग्नि मुनि वानप्रस्थ की तेलुगु पुस्तक का लोकार्पण परोपकारी सभा अजमेर के प्रधान ओम मुनि के करकमलों से किया गया। इस कार्यक्रम का आरंभ यज्ञ से हुआ।

यज्ञ के पश्चात मंच पर ओममुनि प्रधान, परोपकारिणी सभा अजमेर, IAS पूर्व प्रधान सचिव मध्य प्रदेश सरकार दायमा, भरत मुनि, मर्री कृष्णा रेड्डी, अग्नि मुनि व राममुनि आसीन हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता भरत मुनि ने की।अग्नि मुनि की अग्निहोत्र महाविज्ञान तेलुगु में लिखित पुस्तक साइंटिफिक कार्यों को दर्शाते हुए लिखा गया है।

इस अवसर पर मर्री कृष्णारेड्डी ने अपने संबोधन में कई विषय प्रस्तुत किए। मुख्य रूप से कैसे अनुवाद किया गया। इस दौरान आये अनेक विकट परिस्थितियों के बारे में बताया। इस पुस्तक की सफलता और असफलता पाठकों पर छोड़ दिया। दायमा ने कहा कि आर्य समाज की सफलता के लिए क्या किया जाए उसके उपाय बताये और समाधान के सुझाव भी दिये।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव रह चुके श्रीमान दायमा को भरत मुनि को ‘जीवन संग्राम क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी’ और ‘ऋषि चरित्र प्रकाश’ भेंट करते हुए पंडित गंगाराम स्मारक मंच के अध्यक्ष भक्तराम व अन्य
ओममुनी ने अनेक किस्से सुनाएं और सभी से आर्य समाज का प्रचार प्रसार कैसे किया जाये इस पर विस्तार से बताया। कृष्णा रेड्डी ने बताया की कैसे पंडित गंगाराम जी ने 4 वर्षों तक उन्हें हिंदी पढाया। आज जो भी हम हिंदी पढ़ लिख रहे है वह दयानंद उपदेश महाविद्यालय में पंडित जी के सानिध्य में हुआ।

ओम मुनि प्रधान परोपकारिणी सभा अजमेर राजस्थान ने पंडित गंगाराम जी के बारे में बताया कि कैसे पहला बम विस्फोट सशस्त्र क्रान्ति हैदराबाद निजाम के विरुद्ध किया गया। पण्डित गंगाराम जी की जीवनी लिखने में कैसे उन्होंने परोपकारी कार्यालय से सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि राजेन्द्र जिज्ञासु जी और स्वयं गंगाराम जी के घर पर आए थे और पण्डित जी न मिलने पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती इंद्राणी देवी को शॉल द्वारा सम्मानित किया था।
