हैदराबाद : इंदिरा प्रियदर्शिनी गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन (स्वायत्त), नामपल्ली, हैदराबाद के हिंदी विभाग द्वारा “संत चेतना-मानवतावाद की आध्यात्मिक एवं सामाजिक आधार भूमि” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 10 और 11 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ।
संगोष्ठी का उद्देश्य आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों की खोज करना है। इस कार्यक्रम को भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है।

संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र कॉलेज के संगोष्ठी हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर डी.एस.आर. राजेन्द्र सिंह, संयुक्त निदेशक, महाविद्यालयीन शिक्षा विभाग मुख्य अतिथि थे। प्रोफेसर बाबू राव कुलकर्णी, निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। डी. के. भंवरलाल, क्षेत्रीय कार्यालय हैदराबाद के प्रमुख, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, विशेष अतिथि थे।
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कॉलेज की प्राचार्या और हिंदी अकादमी की निदेशक प्रोफेसर चंद्रा मुखर्जी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि आधुनिक विश्व को सामाजिक समरसता प्राप्त करने, अंतर को समाप्त करने तथा वैश्विक शांति, समुदाय एवं सामाजिक कल्याण के लिए मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए। इस संगोष्ठी के संचालिका प्रोफेसर भाग्यवति तथा समानंतर सत्र की संचालिका डॉ मंजू रही।

केंद्रीय हिंदी अकादमी के निदेशक ने कहा कि हिंदी के प्रोफेसरों को विभिन्न राज्यों में व्याख्यान देने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हिंदी के छात्रों को हिंदी उपभाषा अधिगम और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विषयों से संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख ने संगोष्ठी में भाग लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए अपना सहयोग देने का आश्वासन दिया। भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसर विभिन्न तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता करेंगे, जिनमें भारत के विभिन्न भागों से आए हिंदी के 60 शिक्षाविद संगोष्ठी के विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
