दीपावली की ये हैं अनेक कथाएं, अयोध्या में होने वाला है यह खास, देखने को तरस रही हैं लाखों-करोड़ों आंखें

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावली और रूप चतुर्दशी मनाई जाती है। यह त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों के बाहर रंगोली सजाई जाती है और घर को साफ सफाई करके दीये लगाये जाते हैं। इस दिन यमदेव की पूजा करना अत्यंत शुभ होता है। परंपरा है कि घर के पीछे एक दिया यमदेव के नाम का जलाया/लगाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान हनुमान ने सूर्य को फल समझकर खा लिया था। इसलिए इस दिन हनुमान जी की भी विशेष पूजा की जाती है और उस दिन मीठे रो‌ठ का प्रसाद हनुमान पर चढ़ाया जाता है और पूजा की जाती है। इसके अलावा श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया था और उनकी कैद में से16000 स्त्रियों को मुक्ति दिलाई थी। नरकासुर ने इंद्रदेव के राज्य को अपने कब्जे में कर रखा था। उसका वध हो जाने पर देवताओं ने खुशी में इस दिन दिवाली मनाई थी। द्वारका में भी इस जीत की खुशी मनाई गई थी।

एक अन्नपूर्णा कथाओं के अनुसार रति देव नामक धर्मात्मा राजा थे। जब उनकी मृत्यु का समय आया, तो उन्हें नरक ले जाने के लिए यमदूत आये। तब उन्होंने उनसे पूछा कि मुझे किस अपराध के लिए नरक ले जा रहे हैं। तब यमदूत ने बताया कि आपके द्वार से एक बार एक ब्राह्मण भूखा वापस चला गया था। इस पाप के लिए आपको नर्क ले जाया जा रहा है। राजा ने अपना प्रायश्चित करने के लिए एक वर्ष का समय देने का आग्रह किया। तब यमदूत ने एक वर्ष का समय दे दिया।

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इस दौरान राजा ने अपने प्रायश्चित से छुटकारा पाने के लिए ऋषियों से उपाय सुझाने की विनती की। ऋषियों ने बताया कि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को व्रत करें तथा ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा प्रार्थना करें। राजा ने उसी प्रकार किया और पाप मुक्त हो गए। फिर उनको विष्णु लोक में जाने का अवसर मिला। कहते हैं उसी दिन से भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन व्रत करने की प्रथा प्रचलित हो गई। अर्थात पाप और नर्क से मुक्ति मिल सकें। तभी से छोटी दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन परंपराओं के अनुसार 7/11 दीए पूजा कर उनको घर के हर स्थान और बाहर रखे जाने की परंपरा है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है।

इस वर्ष अयोध्या के सरयू तट पर चतुर्दशी के दिन 28 लाख दीपक प्रज्जवलित करने का योजना है, जिससे विश्व रिकॉर्ड बनाया जा सके। इस कार्य के लिए 30000 से ज्यादा स्वयं सेवक लगाए गए हैं। यह खास तरह के दीपक है जो लंबे समय तक रोशनी देंगे और पर्यावरण के हिसाब से बने हुए हैं। जो किसी भी प्रकार के दाग धब्बे और कालिख पैदा नहीं करेंगे। वहीं श्री राम जन्मभूमि मंदिर को सजाने के लिए आकर्षक फूलों का इंतजाम किया जा रहा है। साफ सफाई की जा रही है, जिससे भक्त इस दिन सजे मंदिर और अयोध्या की छटा को देख सके और भगवान राम का आशीर्वाद पा सके। भगवान श्री राम दीपावली पर हम सबकी मनोकामना पूर्ण करें। सभी के लिए मंगलकारक हो दीपावली।

के पी अग्रवाल हैदराबाद

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