हैदराबाद मुक्ति दिवस पर विशेष : पण्डित गंगाराम वानप्रस्थी जी का अमूल्य योगदान, जानें अन्य की भूमिका

17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस है। गुलामी से मुक्ति के लिए पण्डित गंगाराम वानप्रस्थी जी का अमूल्य एवं अभूतपूर्व योगदान रहा है। उन्होंने आर्यन डिफेंस लीग की नींव रखी। केवल इतना ही नहीं, आर्यसमाज के निर्माण में आरम्भ से लेकर अब तक शतश: आत्मायें अपना सर्वस्व त्याग चुकी है। उन्हीं की आहुतियां ने इस महान यज्ञ को प्रज्वलित किया है। इनका त्याग आर्यसमाज में सदैव नए जीवन का संचार करता रहेगा। आइए, जानते हैं ऐसे ही कुछ अनमोल रत्नों की कहानी जिन्होंने हैदराबाद मुक्ति आंदोलन, निज़ाम शासित शासन की मुक्ति, आर्य महा सत्याग्रह में अपने को न्योछावर किया।

वह मरता नहीं जिसकी खूबी हो बाकी ।
वह गायब नहीं जिसका जिकर हो बाकी।।

त्याग जीवन का रस है। त्याग से ही जीवन बनता है। त्याग से ही बढ़ता है और त्याग से ही उज्जवल होता है। त्यागमय जीवन ही दूसरे जीवनों को उत्पन्न करते हैं। वह नर नारी धन्य है जो परिवार, जाति, देश, धर्म तथा संस्कृति के लिए आत्म – त्याग करते हैं। इस मिट्टी के शरीर को कुन्दन बनाना हो तो त्याग की भावना को अपनाना चाहिए।

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बात सन् 1938 में आर्य समाज, हैदराबाद की निज़ाम सरकार की दमन दलन की नीतियों का प्रतिकार करने के लिए कटिबंध होने लगा। राज्य के आर्यसमाजी सरकार से टक्कर लेने पर तुले हुए थे। हैदराबाद के आर्यों की पीड़ा को सुनकर सारा आर्य जगत तिलमिला उठा। क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर आर्यन डिफेन्स लीग (आर्य रक्षा समिति) नाम की संस्था का गठन पंडित दत्तात्रेय प्रसाद जी वकील के नेतृत्व में किया। इस रक्षा समिति में श्री राजपाल, प्रताप नारायण, ए. बाल रेड्डी, सोहनलाल, विश्वनाथ जी आदि प्रमुख लोग थे। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के नेता अभी सोच – विचार करके पग उठाना चाहते थे तथा बातचीत करके इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहते थे।

पंडित दत्तात्रेय प्रसाद जी वकील ने कहा ” भाई तुम लोग सोचते रहो, हम तो सत्याग्रह आरम्भ करते हैं “। आर्य रक्षा समिति ने राज्य के स्तर पर सत्याग्रह का बिगुल बजा दिया। गंगाराम जी की नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता, संगठनात्मक संरचना के कारण आर्य रक्षा समिति के नेतृत्व में हैदराबाद निज़ाम शासन राज्य के प्रमुख विभिन्न स्थानों पर 22 सत्याग्रही जत्थे श्रृंखलाबद्ध निज़ाम की कारागारों में बंदी बनकर गये। इन 22 जत्थों के सर्वाधिकारियों के कुछ नाम इस प्रकार से हैं :- श्री शेषराव जी वाघमारे, पंडित देवीलाल जी, श्री नरहरि जी, पंडित दत्तात्रेय प्रसाद जी वकील, श्री दिगम्बर राव शिवनगीकर, शंकरराव पटेल जी, श्री शंकरदेव जी कापसे, श्री निवृत्ति रेड्डी जी, श्री गणपतराव जी कथले, श्री पंडित बंसीलाल जी व्यास, श्री दिगंबरराव जी लाठकर, श्री श्रीराम जी चौधरी आदि। निजाम स्टेट के लगभग पांच सहस्त्र ( केवल हैदराबाद राज्य से यह संख्या कोई मामूली नहीं है जो त्याग, तपस्या, बलिदान के लिए जो हथेली पर जान रखकर जेलों में बंद होने, यातनाएं सहने के लिए )आर्यों ने सत्याग्रह करके जेल यात्रा की।

भाग्यनगर (हैदराबाद) का धर्म युद्ध छिड़ा हुआ था। भारतवर्ष एवं आर्य जगत में सर्वत्र एक जागृति की लहर दौड़ रही थी। जहां देखो, लोग हैदराबाद आर्य सत्याग्रह की बातें करते दिखाई देते थे। समाचार पत्र सत्याग्रह की खबरों से भरे रहते थे। यहां के जेल की अमानुषित अत्याचार की खबरें प्रकाशित होती रहती थी। वे खबरें जहां कायरों के हृदय में कंपकंपी पैदा करती थी, वहां वीरों के हृदयों को धर्म पर मरने के लिए उछाल देती थी। गाड़ियों में ओम् के झण्डे लहराते और वैदिक धर्म के जय घोष सुनाई देते थे। स्टेशनों पर सत्याग्रहियों के स्वागत सत्कार और चढ़ने उतरने से सदा चहल पहल रहती थी। सर्वत्र जोश और रोष का साम्राज्य था। सत्याग्रही धड़ाधड़ बड़ी संख्या में युद्ध – क्षेत्र की और कूच करने के लिए प्रतिबद्ध थे।

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ने सोलापुर में एक विशेष बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया कि इस सत्याग्रह में सभा को भाग लेना है।सत्याग्रह का संचालन करने स्वामी स्वतंत्रतानन्द जी को फील्ड मार्शल बनाया गया। स्वामी जी ने पंडित गंगाराम जी को बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य सोंपा। उनका कार्य था की सही समय पर सत्याग्रहियों को इकट्ठा करें और सत्याग्रह स्थल पर पहुंचकर सफल बनाएं और अपने आप को गिरफ्तार न होने दें। जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी और बहुत ही गुप्त/गोपनीयता के साथ यह कार्य को पूरा किया जाना था। ताकि यह सत्याग्रह बीच में ही समाप्त न हो जाए। आर्य जगत के जाने पहचाने इन सातों नेताओं को सर्वाधिकारी के रूप में बारी-बारी से जत्थे लेकर जेल जाने का गौरव प्राप्त हुआ। पूजनीय श्री महात्मा नारायण स्वामी जी, कुंवर चांदकरन जी शारदा, श्री खुशहालचंद जी (महात्मा आनंद स्वामी जी), श्री राजगुरु धुरेंद्र शास्त्री जी, पंडित वेदव्रत जी वानप्रस्थी, महाशय कृष्ण जी, श्री ज्ञानेंद्र जी सिद्धांतभूषण।

आठवें सर्वाधिकारी श्री पंडित विनायकराव जी विद्यालंकार के जत्थे के 1500 वीरों का जत्था अहमदनगर से चलने को तैयार खड़ा था कि हैदराबाद शासन के निज़ाम ने आर्य समाज के महा सत्याग्रह की सफलता को भांप, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की सभी मांगे मान ली और सत्याग्रह को विराम दिया गया तथा जेल से सभी सत्याग्रही बन्दी को मुक्त/छोड़ दिया गया।

हम यहां हैदराबाद आर्य महासत्याग्रह के इतिहास की झांकी ही दे सकते हैं। पूरा इतिहास तो नहीं लिख सकते। भारतवर्ष के कोने-कोने से तथा विदेशों से कई आर्य सत्याग्रहीयों ने कारागार की यातनाएं सहकर जेल में ही वीरगति पा ली। कुछ अन्य जेल की यातनाओं के कारण तथा जेल के भोजन के अनुकूल न पढ़ने पर रिहा होने के थोड़ा समय पश्चात जेल से चिपके रोग के कारण धर्म की बलिवेदी पर प्राण दे दिए।

हैदराबाद राज्य के बाहर से आकर इन हुतात्मायों ने अपने प्राणों की आहुति दी है ( कुछ ही नाम दिए जा रहे हैं। हम क्षमा प्रार्थी हैं कि पूरे नामों की सूची बहुत लंबी होने के कारण, कुछ कठिनाई/असमर्थ हैं ) :-

  1. हुतात्मा सुनहरा, पिता : जयराम, जि. रोहतक ग्राम : बुटाना
  2. हुतात्मा फकीरचंद्र, पिता : बालाराम, जि. करनाल, तहसील: कैथल, ग्राम : सेरधा
  3. हुतात्मा शांति प्रकाश, पिता: पंडित रामरत्न, जि.गुरदासपुर, ग्राम : कलानौर अकबरी
  4. हुतात्मा चौधरी मातुराम, पिता: गूगन सिंह, जि. हिसार, तहसील: हांसी, ग्राम: मालिकपुर
  5. हुतात्मा भक्त अरुडामल, सरगोधा से
  6. हुतात्मा रतिराम, पिता: मुसद्दीलाल, जि. रोहतक, ग्राम सांपला
  7. हुतात्मा परमानन्द, पिता: गोकुल प्रसाद, जि. हरिद्वार
  8. हुतात्मा छोटेलाल, पिता: पंडित सभोखे प्रसाद, जि. मैनपुरी, ग्राम अलालपुर
  9. हुतात्मा वीरवर बदनसिंह, पिता: ठाकुर टीका सिंह, जि. सहारनपुर, ग्राम: मुजफ्फराबाद
  10. हुतात्मा ठाकुर मलखान सिंह, पिता :ठाकुर दलवीर सिंह, जि. सहारनपुर, तहसील : रुड़की, ग्राम : रामपुर
  11. हुतात्मा स्वामी कल्याणानंद, पिता:चौधरी शाहमल सिंह, जि.मुजफ्फरनगर, ग्राम : किनौनी, डाकखाना : वघरा
  12. हुतात्मा चौधरी ताराचंद, पिता: चौधरी केहरसिंह, जि. मेरठ, ग्राम : लूम्ब
  13. हुतात्मा ब्रह्मचारी दयानंद, पिता : रघुनन्दन जी शर्मा, जि. हरदोई, ग्राम : सुरसा
  14. हुतात्मा धर्मवीर वैद्यनाथ, पिता : धरिच्छन राम, जि. चंपारण, ग्राम : नरकटिया गंज
  15. हुतात्मा अशर्फीलाल, जि. चंपारण, ग्राम : नरकटिया गंज

और अब हैदराबाद राज्य के महानुभावों ने जो सत्याग्रह यज्ञ में अपने जीवन की पवित्र आहुति प्रदान की, उनके भी कुछ नामों की सूची देखें :-

  1. हुतात्मा वेदप्रकाश (पूर्व नाम दासप्पा) पिता : शिव दासप्पा, निवास: गुंजोटी
  2. हुतात्मा धर्मप्रकाश (पूर्व नाम नागप्पा) पिता: सायवण्णा, ग्राम: कल्याणी
  3. हुतात्मा धर्मवीर महादेव, निवास : अकोलगा सत्यवान
  4. हुतात्मा श्यामलाल, पिता: भोला प्रसाद (भोलानाथ) जि. बीदर, ग्राम: भालकी
  5. हुतात्मा वेंकटराव जि. निजामाबाद ता : कंधार
  6. हुतात्मा विष्णु भगवान, तांडूर
  7. हुतात्मा महादेव सदाशिवराव, जि: उस्मानाबाद, तालुका: लातूर
  8. हुतात्मा पांडुरंग, जि. उस्मानाबाद
  9. हुतात्मा राधाकृष्ण, पिता : जीतमल, जि. निजामाबाद
  10. हुतात्मा लक्ष्मणराव, हैदराबाद
  11. हुतात्मा शिवचंद्र, पिता: अणवसप्पा, निवास : दुबलगुण्डी पायेगाह12. हुतात्मा रामाकृष्णा, ग्राम :लावसी
  12. हुतात्मा भीमराव पटेल, जि. उदगीर, ग्राम : हुपला
  13. हुतात्मा मानिकराव, जि. उदगीर, ग्राम: हुपला
  14. हुतात्मा सत्यनारायण, जि. बीदर, ग्राम : अबोलगा

और भी कई हुतात्माओं ने अपने प्राण देकर इस हैदराबाद आर्य महासत्याग्रह को सफल बनाया/अपने लक्ष्य को पहुंचा दिया। आइए, हम हैदराबाद मुक्ति दिवस पर उन हुतात्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हैदराबाद निज़ाम शासन को हटाने में मदद/सहयोग करने वालों को हृदय से नमन करते हैं, जिनके बलिदानों के कारण आज हम स्वतंत्र रूप से इस पुण्य धरती पर सांस ले रहे हैं।

भाग्यनगर (हैदराबाद) में इन आर्य हुतात्माओं की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए क्या किया ? इन हुतात्माओं के इतिहास को ही हमसे छुपाया गया/नहीं बताया गया। जो सज्जनों के हृदय में वीर के प्रति श्रद्धा का भाव जगाता रहेगा तथा युवकों के हृदय में धर्म के प्रति प्रेम तथा उत्कट उत्साह और बलिदान की ज्योति को प्रदीप्त करता रहेगा।

भक्त राम
अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच

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