बाल दिवस जिंदाबाद : ‘क से कविता’ समारोह में इस आयु के कविता प्रेमियों ने किया चुलबुली कविताओं का पाठ, याद आया बचपन

[नोट- प्रकाशित समाचार पर हमने ‘क से कविता’ के प्रमुख प्रवीण प्रणय से कुछ शंकाओं का समाधान करने का अनुरोध किया। साथ ही हमने कहा कि ‘क से कविता’ पर विस्तार से एक लेख भेजिए। हिंदी पाठक वर्ग समझ सकें। मैं अब भी समझ नहीं पाया कि कवि, कविता और कविता प्रेमी को कैसे समझे। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कविता है। इस संदेह पर प्रवीण जी ने समाधान भेजा है। उसे ‘तेलंगाना समाचार’ के पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं।

कवि मुख्यतः कविता लिखता है। ‘क से कविता’ मंच से स्वरचित रचनाओं को पढ़ने की अनुमति नहीं है चाहे आप कितने भी बड़े कवि क्यों न हों। यह मुख्य रूप से पाठकों का मंच है जहाँ कवि होने की मनाही नहीं है लेकिन यहाँ अपनी रचनाएं न पढ़ कर पहले से चयनित कवि या विषय विशेष की कविताएं पढ़ी जाती है।’ -प्रवीण प्रणय]

हैदराबाद : हिंदी-उर्दू कविता को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित संस्था ‘क से कविता’ ने यहाँ मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के पुस्तकालय में, ‘बाल दिवस’ के संदर्भ में विशेष समारोह आयोजित किया। इस सुरुचिपूर्ण समारोह में 5 वर्ष के नन्हें बच्चे से लेकर 75 वर्षीय बुजुर्ग तक ने अपने प्रिय कवियों की चुलबुली बाल कविताओं का अत्यंत उत्साहपूर्वक वाचन किया।

हैदराबाद-सिकंदराबाद के विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों में तो अपनी पसंद की बाल कविता पढ़ने का उत्साह था ही, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य सदस्यों ने भी अपने विद्यार्थी जीवन में पढ़ी बाल कविता का सस्वर पाठ कर एक बार पुनः अपने बचपन के दिनों को याद किया।

कार्यक्रम के संयोजक-द्वय प्रवीण प्रणव और मोहित ने बताया कि ‘क से कविता’ और दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र द्वारा हर महीने के दूसरे शनिवार को सायं 3 से 5 बजे तक कविता-केंद्रित कार्यक्रम का आयोजन किया जाता‌ है, जिसमें उपस्थित सदस्य पहले से चयनित किसी कवि या शायर‌ की रचनाओं का पाठ करते हैं।‌ यह विशेष रूप से पाठकों का मंच है, जहाँ स्वरचित कविताओं को पढ़ने की अनुमति नहीं है। मंच का उद्देश्य हिंदी-उर्दू के साहित्यिक पुरोधाओं और उनकी रचनाओं से परिचित होना‌ है। ‘क से कविता’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध चैनल ‘हिंदी कविता’ का उपक्रम है, जहाँ देश-विदेश की जानी-मानी हस्तियों ने हिंदी कविता का पाठ किया है।

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बाल दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के अलावा कॉलेज के विद्यार्थियों, विभिन्न स्कूल से शिक्षकों, विभिन्न विभागों में कार्यरत युवाओं, साहित्यकारों, गृहिणियों और सेवानिवृत्त लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ‘फिर क्या होगा उसके बाद’, ‘हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ’ ‘जीना जिलाना मत भूलना’, ‘चिड़िया का संसार’, ‘हाथी आया, हाथी आया’, ‘चाँद का कुर्ता’, ‘बादल’, ‘मुझे यह बात समझ में नहीं आई’, ‘बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी’, ‘अक्कड़ मक्कड़’, ‘आराम करो’, ‘खिलौने वाला’, ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’, ‘चूहे की दिल्ली यात्रा’, ‘चेतक’, ‘पर्यावरण बचाओ’, ‘पुष्प की अभिलाषा’, ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ और ‘पन्ना धाय’ जैसी प्रसिद्ध बाल कविताओं का पाठ किया गया।

बाल कविताओं का पाठ करने वालों में स्वाधि मिश्रा, रीत आहूजा, सानवी लोहिया, अथर्व लीला, विवान प्रसाद, रूमी पुरी, रिधान यादव, ओज वीर लोधा, डॉ. इरशाद अहमद, अमृता मिश्रा, धनभद्र लपसिरिकुल, डॉ. रक्षा मेहता, अमरीश कुमार, मोहम्मद सिराजुद्दीन ‘असीम’, हर्षित रस्तोगी, अनुराग मुस्कान, हीना आहूजा, शकुंतला मिश्रा, दीपा, विशाल कुमार, स्वाति बालूरकर, मऊ मल्लिक डे, डॉ. संगीता शर्मा, टी. गायत्री, मुस्कान कुमारी, शैली सिंह, गरिमा गौतम, प्रो. छाया‌ राय, सरिता दीक्षित, अभिषेक, मधु शर्मा, विशाल, वरुण पुरी, शिल्पा गोयल और पल्लवी पुरी सम्मिलित हैं।

आरंभ में सभी आगंतुकों का चॉकलेट से स्वागत किया गया और अंत में अल्पाहार की व्यवस्था की गई। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और बाल दिवस का उपहार भी दिया गया।‌ ‘क से कविता’ कोर टीम से ज़ीनत ने कार्यक्रम का संचालन किया। सुदर्शन ने फ़ोटो-वीडियोग्राफी की ज़िम्मेदारी सँभाली।

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