आर्य समाज मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया महर्षि बोधोत्सव, यह रहा खास आकर्षण

मूलशंकर को आज ही के दिन महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत और जागरण, शिव मंदिर में करने पर एक चूहे ने जो कर दिखाया उनके चक्षु खुल गए और उन्होंने सच्चे ईश्वर की प्राप्ति के लिए जो की निराकार, सच्चिदानंद स्वरूप, अजन्मा, अनन्त, सर्वशक्तिमान को पहचानने और जानने में अपना जीवन लगा दिया। इन्हीं की कृपा से वेदों को पुनः स्थापित कर सभी को इस ओर आकर्षित किया। वेद का पढ़ना – पढ़ाना व सुनना – सुनाना सभी आर्यों का परम धर्म है बताया।

हैदराबाद : आर्य समाज (आर्य समाज महर्षि दयानन्द मार्ग, सुल्तान बाजार) में रविवारीय साप्ताहिक यज्ञ के साथ महर्षि बोधोत्सव हर्षोल्लाह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. प्रताप रूद्र ने महर्षि के गुणगान गाये और अरुण कुमार लाठकर को पर्व सन्देश बोलने के लिए मंच पर आमंत्रित किया।

स्वतंत्रता सेनानी एडवोकेट दिगंबर राव लाठकर के पुत्र और समाजसेवी एडवोकेट अरुण कुमार लाठकर ने क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी द्वारा रचित “ऋषि चरित्र प्रकाश” पुस्तिका के महत्वपूर्ण बोधोत्सव विषय पर प्रकाश डाला। उपस्थित श्रोताओं ने उसे ध्यानपूर्वक श्रवण किया। महर्षि के अन्य उपकारी कार्यों का भी उन्होंने वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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इस अवसर पर विशेष पधारने वाले रणधीर सिंह, काशीराम, शिवाजी, भक्त राम और अन्य ने आर्य समाज द्वारा सभी वैदिक प्रेमी सज्जनों से विनम्र निवेदन किया गया कि रविवारीय यज्ञ में सम्मिलित हों और अपनी आहुति प्रदान करें। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

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