“जीवन संग्राम-क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी” पुस्तक लोकार्पित, वक्ताओं ने किया अपने-अपने अनुभवों को साझा

हैदराबाद: स्वतंत्रता सेनानी पण्डित गंगाराम स्मारक मंच की ओर से 28 अक्टूबर को “जीवन संग्राम-क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी” पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम आर्य कन्या विद्यालय हाई स्कूल, देवीदीन बाग, हनुमान टेकडी, सुल्तान बाजार में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण वैदिक विद्वान और इस पुस्तक के प्रकाशन में अपना अमूल्य मार्गदर्शन करने वाले पण्डित प्रियदत्त शास्त्री के करकमलों से किया गया। कार्यक्रम का आरंभ गायत्री मंत्र के साथ आरंभ हुआ।

इस पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए पंडित प्रियदत्त शास्त्री ने कहा कि कैसे पंडित राजेंद्र जिज्ञासु जी को जीवनी लिखने के लिए आग्रह किया और उन्होंने इसके लिए कैसे स्वीकृति दी। साथ ही बताया कि जिज्ञासु जी एक-एक संदर्भ लिखते हैं तो वह कैसे-कैसे जांच परख करते हैं। उन्होंने श्री क्षितिज वेदालंकार के संदर्भ में बात बताई और कहा कि इस जीवनी पर भी इन्होंने पूरी जानकारी प्राप्त की और उसके बाद ही जांच परख करके ही जीवनी लिखी है।

पुस्तक की प्रतियों को निकालते हुए पंडित प्रियदत्त शास्त्री। साथ में मंच के मंत्री श्रुतिकांत भारती और भक्तराम

इस अवसर पर पंडित हरिकिशन वेदालंकार ने बताया कि उन्होंने 2 वर्ष तक दयानंद उपदेश विद्यालय में पंडित गंगाराम जी से हिंदी कैसे सीखी है। जिसमें श्री कृष्णा रेड्डी भी उनके साथ में रहते थे। पंडित जी कभी इन बालकों को क्रोध में कभी कुछ नहीं कहा और न ही कभी क्रोध में ही दिखाई दिये। इस दौरान अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कैसे आर्य समाजियों में पंडित गंगाराम जी के द्वारा सत्यार्थ प्रकाश की कथा बहुत ही अच्छी तरह से व्याख्या कर बताया और उनका प्रभाव पर पडा।

मंच को संबोधित करते हुए पंडित हरिकिशन वेदालंकार

इस संदर्भ में डॉ. धर्म तेजा ने बताया कि वह बचपन से ही पंडित गंगाराम जी के संपर्क में रहे हैं। संक्रांति मेले में प्रतिवर्ष उनकी प्रतीक्षा करते थे। संक्रांति पर्व केशव स्मारक विद्यालय नारायणगुड़ा में संक्रान्ति मेले का आयोजन दिनभर चलता था। उन्होंने इस वर्ष भी संक्रांति मेले को पुनः प्रारम्भ करने का आर्य समाज के पदाधिकारियों से अनुरोध किया।

डॉ विजयवीर विद्यालंकार को “जीवन संग्राम-क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी” पुस्तक भेंट करते हुए मंच के अध्यक्ष भक्तराम

श्री सुनील सिंह आर्य ने बताया कि कैसे उनके दादाजी देवी सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। श्री दिनेश सिंह जी ने अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि सत्यार्थ प्रकाश पर गंगाराम जी की व्याख्या सुनकर बहुत प्रभावित हुए। इसके चलते उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन किया। श्री ऋषि राम ने बताया कि कैसे उनके पिताजी पंडित गंगाराम जी ने उन्हें देश प्रेम की प्रेरणा देते रहे हैं।

‘तेलंगाना समाचार’ को “जीवन संग्राम-क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी” पुस्तक भेंट करते हुए मंच के अध्यक्ष भक्तराम

डॉ प्रताप रूद्र ने उनके पिताजी गणेश राव के विषय में जानकारी दी कि कैसे पंडित गंगाराम जी के साथ मिलकर सत्याग्रह में सत्याग्रहियों के समय और स्थान पर पहुंचाते थे। पठान तथा रजाकारों के दमन से कैसे हिंदू महिलाओं को सुरक्षा और उनके चिंगुल से निकालाते थे। श्री सोमनाथ जी ने बताया कि कैसे आर्यन आर्ट स्टूडियो में पंडित गंगाराम जी के साथ प्रतिदिन बैठक होती थी और अनेक विषयों पर विचार विमर्श होता था और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करते थे। कई प्रकरण उन बैठकों में मुझे सुनने का मौका मिला था थी।

श्री रणधीर सिंह ने अपने जीजाजी पंडित गंगाराम जी के साथ हर आर्य समाज के कार्यक्रम सभा और अन्य आयोजनों में साथ में लेकर चलते थे और गंडीपेट आश्रम को भी मिलकर ही जाते-जाते थे। कोई कार्यक्रम अछूता नहीं होता सभी कार्यक्रमों में सम्मिलित होते थे। श्री प्रेमचंद मुणोत जी ने कहा कि उन्होंने पंडित गंगाराम जी को देखा नहीं है। लेकिन इस मंच से जुड़कर बहुत कुछ जानकारी मिली है और पुस्तक पढ़ने पर और भी बहुत कुछ नई-नई बातें जानने को मिलेगी जो निश्चित ही प्रेरणादायक साबित होगी।

श्रीमती सुधा ठाकुर ने कहा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की मंच में सम्मिलित होने का अवसर मिला था। अब जीवन संग्राम पंडित गंगाराम जी की जीवनी को पढकर युवकों को प्रेरणा मिलेगी। पण्डित गंगाराम जी के परिवार के साथ घनिष्ट संबंध होने के कारण अनमोल ज्ञान प्राप्त हुआ है। उन्होंने उनके कॉलेज में पंडित गंगाराम जी के जीवनी के बारे में प्रति सप्ताह विद्यार्थियों को बताने का संकल्प लिया।

श्रीमती उमा तिवारी ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि हर शनिवार हवन के पश्चात अपने विद्यार्थियों को इस जीवनी के बारे में बताया जाएगा और प्रेरणा दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन मंच के मंत्री श्रुतिकांत भारती ने किया। स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच के अध्यक्ष भक्त राम ने “जीवन संग्राम – क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी ” पुस्तक के लेखन से लेकर प्रकाशन तक सहयोग करने वाले डॉ विजयवीर ‌विद्यालंकर, के राजन्ना, पंडित प्रियदत्त शास्त्री, परोपकारिणी सभा अजमेर, आर्य प्रतिनिधि सभा आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के प्रति आभार व्यक्त किया। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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