हैदराबाद : अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गये ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के छह दिन बाद निंदा की है। साथ ही ईरान के दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए गए हैं। आज दिल्ली में स्थित ईरान के दूतावास पर भारत सरकार की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री पहुंचे। उन्होंने दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति संवेदना व्यक्त की।

गौरतलब है कि लंबे समय से सवाल यह उठाया जा रहा था। सवाल यह था कि भारत ने इस हमले की अब तक निंदा क्यों नहीं की। कांग्रेस सहित खई विपक्षी पार्टियां खुलकर भारत सरकार से सवाल कर रही थीं कि ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या की निंदा खुले मंच पर क्यों नहीं की गई। इतना ही नहीं कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी ने तो लेख लिखकर भारत सरकार की विदेश नीति की आलोचना की। इस बीच भारत सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा की है। सरकार की तरफ से बकायदा ईरान के दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत सरकार के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी।
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आपको बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने अचानक ही ईरान पर हमला कर दिया। मिसाइलों के आक्रमण से ईरान की राजधानी तेहरान शहर थर्रा गया। इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाया। इस हमले में खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। इस हमले के बाद से ईरान बौखला गया है और उसने खाड़ी देशों पर अंधाधुंध मिसाइल बरसानी शुरू कर दी हैं। पहले तो ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया, लेकिन बाद में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए आम लोगों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों पर भी हमले शुरू कर दिए। सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर, कुवैत सहित कई देशों को ईरान की तरफ से निशाना बनाया गया। इस समय ईरान ने तेल सप्लाई करने वाले सबसे बड़े मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया है। (एजेंसियां)
