हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा तेलंगाना राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, गुरुकुल विद्यालय के माध्यमिक हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 487वें नवीकरण पाठ्यक्रम का आयोजन 4 से 16 अगस्त तक किया जाएगा। इसका उद्घाटन समारोह 4 अगस्त को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने अभासीय मंच के माध्यम से की।

मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे और विशिष्ट अतिथि के रूप में एमजेपीटीबीसीडब्ल्यूआरईआईएस, मासाब टैंक, हैदराबाद के संयुक्त सचिव डॉ. जी. तिरुपति उपस्थित रहे। इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, अतिथि प्रवक्ता एवं डॉ. एस. राधा उपस्थित थीं। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के स्वागत में गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 58 (महिला-32, पुरुष-26) प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।

इस प्रशिक्षण के दौरान डॉ. फत्ताराम नायक रस, छंद एवं अलंकार, शब्द, शक्तियाँ, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय जीवन पद्धति भारतीय संस्कृति और दर्शन, व्यक्ति समाज एवं राष्ट्र निर्माण में साहित्य की भूमिका, डॉ. दीपेश व्यास हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी भाषा का उद्भव व विकास, भारतीय बहुधार्मिकता और समन्वय, डॉ. अनीता गांगुली भाषाविज्ञान तथा उसके विविध पक्ष, ध्वनि, उच्चारण, भाषा परिमार्जन, डॉ. सी. कामेश्वरी हिंदी व्याकरण तथा उसके विविध पक्ष, संधि, समास, भाषा कौशल, लेखन कौशल, डॉ. राजीव कुमार सिंह सृजनात्मक लेखन शिक्षा मनोविज्ञान, पाठनियोजन, भाषा शिक्षण, पाठयोजना (गद्य/पद्य), विषय पर कक्षा अध्यापन कार्य करेंगे। डॉ. साकेत सहाय हिंदी शिक्षण में प्रौद्योगिकी का प्रयोग (विशेषकर- A।), हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ विषय पर विशेष व्याख्यान से प्रतिभागियों को ज्ञानार्जित करेंगे।

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इस उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया में हिंदी को लेकर जो स्थिति दिखाई जाती है। वह सही नहीं है। हिंदी भाषा को लेकर आमजन मानस एवं अध्यापकों में कोई असमंजस नहीं है। पिछले पच्चीस वर्षों में हिंदी केवल देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपना स्थान बना पाई है। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. गंगाधर वानोडे ने कहा कि अध्यापकों को अद्यतन रहना चाहिए। भाषा कौशल सुनना, बोलना पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आज अहिंदी क्षेत्र होने के कारण छात्रों के पास हिंदी के ज्यादा शब्द नहीं होते। शिक्षक ही हिंदी के शब्द देता है और उसे सुनता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. जी. तिरूपति ने कहा कि जीवन में हमें प्रकृति कुछ न कुछ सिखाती है उसी तरह कक्षा में भी बच्चों से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। बच्चों की त्रुटियाँ कैसे दूर की जाए यह शिक्षक को पता होना चाहिए। हिंदी शिक्षक को बोलते समय ज्यादातर हिंदी शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।

पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि शिक्षक सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माता होता है। वह कच्ची मिट्टी की तरह छात्रों को पकाकर पका हुआ घड़ा बनाता है। प्रशिक्षण में आए हुए सभी प्रतिभागियों की सभी समस्याओं का समाधान इन प्रशिक्षण के दौरान किया जाएगा। प्रतिभागी अध्यापक कोंडागुर्ला डाईश्वर, बी. मनीषा जैस्वाल, एम. डी. अब्दुल खादर एवं एम. डी. नूरजहाँ ने इस प्रशिक्षण हेतु अपनी व्याकरण संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अपेक्षा व्यक्त की तथा संस्थान से आए हुए प्राध्यापकों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से उनके निराकरण के लिए आश्वस्त किया। कार्यक्रम के संचालक डॉ. दीपेश व्यास ने सभी का परिचय कराते हुए विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस. राधा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस पाठ्यक्रम में तकनीकी सहयोग श्री सजग तिवारी ने दिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ।
