हैदराबाद : रक्षा मंत्रालय के उपक्रम मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए 10 अप्रैल को हिंदी कार्यशालाओं की श्रृंखला का उद्घाटन किया गया। यह हिंदी कार्यशाला की श्रृंखला मिधानि की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के तत्वावधान में आरंभ की गई।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उद्यम के मानव संसाधन विभाग के प्रभारी अपर महाप्रबंधक हरिकृष्ण वी. ने प्रतिभागियों का हिंदी कार्यशाला में स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कार्यालय के दैनिक काम-काज में हिंदी के प्रयोग में आने वाली कठिनाइयों को हल करने, इसके प्रयोग के सरल तरीकों पर चर्चा करके उपयोगकर्ताओं की झिझक दूर करने के लिए किया जाता है।

यह विशेष ध्यान रखा जाता है कि कार्यक्रम में मानक हिंदी लिपि, व्यावहारिक व्याकरण, प्रशासनिक एवं तकनीकी शब्दावली का दैनिक काम-काज में प्रयोग, व्यावहारिक अनुवाद, आलेखन एवं टिप्पण, राजभाषा नीति आदि विषयों को शामिल किया जाए। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि कार्यशाला के सत्रों का लाभ उठाएँ और राजभाषा कार्यान्वयन संबंधी प्रबंधन की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करें।
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कार्यशाला के प्रथम सत्र में आरसीआई के सहायक निदेशक (राजभाषा) डॉ. काजिम अहमद ने राजभाषा के कार्यान्वयन में कर्मचारियों की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राजभाषा नीति के संवैधानिक प्रावधान, राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 की जानकारी दी। राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार के कार्यालय में किए जा रहे प्रयासों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने प्रतिभागियों को हिंदी में कामकाज करने के लिए प्रेरित किया।

द्वितीय सत्र में हिंदी शिक्षण योजना, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के सहायक निदेशक (से.नि.) मु. कमालुद्दीन ने कार्यालयीन कामकाज में प्रयुक्त प्रशासनिक शब्दावली व संक्षिप्त नेमी टिप्पणियों पर व्याख्यान दिया। प्रशासनिक शब्दावली के निर्माण पर विस्तार से चर्चा करते हुए उनके अनुप्रोयग के विभिन्न संदर्भों से प्रतिभागियों का परिचय कराया। साथ ही, उन्होंने कार्यालयीन भाषा की शब्दावली के प्रयोग का अभ्यास भी कराया।

तृतीय सत्र में इस्कॉन हैदराबाद के गीता संदेश प्रबंधक ऋषिकेश दास ने एक बेहतर व्यक्तित्व विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान स्वयं के सबसे बुरे और बेहतर संस्करण के गुणों से प्रतिभागियों को परिचित कराया। उन्होंने बुरे और बेहतर संस्करण के गुणों की उदाहरण के साथ व्याख्या की और बेहतर संस्करण के गुण जैसे कि सत्यनिष्ठता, कृतज्ञता, क्षमाशीलता, वफादार/निष्ठावान, जिम्मेदरी और सक्रियता, स्थिर मन/ध्यान पूर्ण, संसाधन संपन्नता, देशभक्त, अनुशासित, दृढ़ निश्चयी, दूरदर्शीता, तकनीकी रूप से कुशलता, दयालु व दूसरों को शिक्षित करना, दूसरों की मदद करना, संतुष्टता तथा आध्यात्मिकता को अपने जीवन में अपनाने के लाभों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
उन्होंने स्वयं का बेहतर संस्करण बनाने के लिए दृष्टिकोण बदलने और जीवन में सत्संगती, अच्छी पुस्तकों का पठन, ध्यान, आहार और सद्भावपूर्ण क्रियाकलापों से जुड़ने का सुझाव दिया। ऋषिकेश दास ने प्रतिभागियों को कार्यालय का काम राजभाषा में करने के लिए राजभाषा शपथ भी दिलाई। कार्यशाला का संचालन उद्यम के प्रबंधक (हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार) डॉ. बी. बालाजी ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्रीमती डी. वी. रत्नकुमारी, कनिष्ठ कार्यपालक और डाक अनुभाग के जयपाल का सक्रिय योगदान रहा।
