हैदराबाद : आर्य समाज महर्षि दयानंद मार्ग, सुल्तान बाजार में स्वामी श्रद्धानन्द जी की 170 वीं जयन्ती का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र आर्य प्रतिनिधि सभा के मुखपत्र के संपादक और लातूर समाचार साप्ताहिक के परामर्शदाता डॉ नयन कुमार आचार्य ने प्रवचन और आर्य के विकास पर अमूल्य संदेश दिया। इससे पहले साप्ताहिक यज्ञ आयोजित किया गया।

डॉ. नयन कुमार आचार्य के ओजस्वी उद्बोधन में काल की अश्वगती से चलते रहने पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि स्वामी श्रद्धानद कैसे मुंशी राम से महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य भक्त बनकर गुरुकुल प्रथा का पुनरुद्धार किया। उन्होंने आगे कहा कि शुद्धि आंदोलन के प्रणेता, कांग्रेस में हिन्दी बोलने वाले प्रथम व्यक्ति, एक साधारण व्यक्ति से महान व्यक्ति बनने में उनके त्याग, तपस्या, पुरुषार्थ और सत्य की राह पर अडिगता ही उनके आदर्शों को दर्शाता है। डॉ. आचार्य जी ने सभी से प्रण लेने के लिए कहा और स्वामी श्रद्धानंद जी के पथ पर चलने और विश्व को आर्य बनाने की राह पर सदा चलते रहने का आह्वान किया।
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इस अवसर पर डॉ. प्रताप रूद्र ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया और प्रवचन के लिए मंच पर आमंत्रित किया। प्रवचन के पश्चात संगठन सूत्र और आर्य समाज के नियम व उद्देश्य का पाठ किया गया। इस कार्यक्रम में नगरद्वय के प्रतिष्ठित आर्य सज्जन डॉ. धर्म तेजा, भरत मुनि, प्रदीप दत्त, राज भूषणम, शिवाजी, अरविंद कुमार, दयानंद रेड्डी, अरुण कुमार लाठकर, रणधीर सिंह, प्रदीप जाजू, काशीराम, के. संदीप, एम. राधिका, सुचित्रा चंद्र, मीरा आर्य, सौ. मनीषा नयन कुमार आचार्य, चि. अजिंक्य, नयन कुमार आचार्य, भक्त राम और अन्य ने भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया। शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
