राजस्थान लेखिका साहित्य संस्था के 37 वें वर्ष पर सम्मान समारोह एवं पुस्तक विमोचन, पढ़े इस वरिष्ठ साहित्यकार के विचार

जयपुर : वरिष्ठ साहित्यकार फारूक आफरीदी ने कहा राजस्थान का महिला लेखन नये विश्वास और संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। नारी शक्ति सृजन की प्रतीक है और वह अपने संघर्षों से ही निखरी है। शब्दों की शक्ति, स्त्री संवेदना और सृजन की ऊर्जा से ही उसने ऊंचा मुकाम पाया है। महिलाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपना परचम फहराने के लिए साहित्य की हर विधा में निष्णात होना पड़ेगा और स्त्री-पुरुष लेखन का परंपरागत ढांचा तोड़ना होगा। इसके लिए सभी महिला लेखक संघों को एक मंच पर आकर रचनात्मक आंदोलन को गति देनी होगी। आफरीदी राजस्थान लेखिका साहित्य संस्था के 37 वें वर्ष पर सम्मान समारोह एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता वक्तव्य में यह बात कही।

मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार नीलिमा टिक्कू ने कहा कि प्रदेश में महिला लेखन को प्रोत्साहित करने के सभी कदम उठाए जाएंगे। महिला लेखन संघर्षों के बीच नई चेतना से नये आयाम स्थापित करेगा। स्वतंत्र मंचों की बढ़ती संख्या के बावजूद इस संस्थान की जड़ें सबसे सशक्त हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. शारदा कृष्ण ने राजस्थानी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने पर ज़ोर दिया सारस्वत अतिथि प्रतिष्ठित डॉ. रमा सिंह ने स्त्री लेखन को समाज परिवर्तन की प्रभावी धुरी बताया। उन्होने राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की रचनात्मक उपस्थिति को बढ़ाने के लिए साहित्यिक समर्पण के साथ आलोचना की दिशा में कार्य करने की बात कही।

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संस्थान की अध्यक्ष डॉ. जयश्री शर्मा ने संस्थान की 37 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि संस्थान की संस्थापिका नलिनी उपाध्याय के योगदान को याद किया और कहा कि यह मंच आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लेखिकाओं की पहचान स्थापित कर चुका है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष डॉ. रेखा गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक ‘हौसलों की उड़ान’ सहित आभा सिंह, सुशीला शर्मा की कृतियों का विमोचन किया गया।

वाग्मणि सम्मान: सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मंजु चतुर्वेदी, कर्मश्री सम्मान: वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आरती भदोरिया, वेणु सम्मान: वरिष्ठ साहित्यकार आभा सिंह, श्रीमती नलिनी उपाध्याय सम्मान: वरिष्ठ साहित्यकार शशि सक्सेना और डॉ. सुमन मेहरोत्रा सम्मान: प्रख्यात कवयित्री सुषमा चौहान ‘किरण’ प्रदान किया गया। साथ ही संस्था के प्रबंध निदेशक सुधीर उपाध्याय, डॉ. जयश्री शर्मा डॉ. रेखा गुप्ता, रेनू शब्दमुखर और डॉ. सुषमा शर्मा ने सम्मनितों को शॉल, प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर नवाजा।

संस्थान की सचिव डॉ. सुषमा शर्मा ने वर्ष 2027 से दो बाल साहित्य पुरस्कार प्रारंभ करने की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की सहसचिव रेनू ‘शब्दमुखर’ ने किया। उपाध्यक्ष डॉ. कंचना सक्सेना ने आलोचना विधा में एक पुरस्कार प्रारम्भ करने का घोषणा की और धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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