BJP MLA की निलंबित पर HC ने कहा- “रोक नहीं लगा सकते”, विधायक बोले- “कोर्ट में भी न्याय नहीं हुआ”

हैदराबाद: तेलंगाना हाईकोर्ट में निलंबित बीजेपी विधायकों को निराशा हाथ लगी है। हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक एम रघुनंदन राव, ईटेला राजेंदर और टी राजा सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बजट सत्र खत्म होने तक सदन से उनके निलंबन को चुनौती दी थी। आपको बता दें कि गुरुवार को याचिका पर सुनवाई कर चुके न्यायमूर्ति शमीम अख्तर ने शुक्रवार के लिए फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने भाजपा विधायकों के निलंबन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

भाजपा विधायकों ने उच्च न्यायालय से संविधान और विधानसभा के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए उन्हें विधानसभा से निलंबित करने और उन आदेशों को तत्काल रद्द करने और विधानसभा सत्र में भाग लेने का निर्देश देने के आग्रह किया था। निलंबन प्रस्ताव में विधानसभा सचिव को वीडियो रिकॉर्ड जमा करने का निर्देश देने की मांग की थी। इस मामले को लेकर बुधवार को सुनवाई करने वाली कोर्ट ने विधानसभा सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।

भाजपा विधायकों के वकील वकील देसाई प्रकाश रेड्डी ने आरोप लगाया कि विधानसभा के अध्यक्ष जिन्हें निष्पक्ष और पार्टियों से परे कार्य करना चाहिए था, ने नियमों का पालन नहीं किया और भाजपा विधायकों को निलंबित कर दिया। उल्लेख किया कि सदस्यों को केवल तभी निलंबित किया जा सकता है जब वे इस तरह से व्यवहार करते हैं जो विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुचती है। लेकिन वहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

महाधिवक्ता बीएस प्रसाद ने आरोपों का पता लगाने के लिए कार्यवाही की एक प्रति के अनुरोध पर आपत्ति जताई। हालांकि कोर्ट ने इसे नहीं माना। हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपनी अगली सुनवाई पूरी करते हुए विधानसभा सचिव को कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्ड पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। हालांकि, महाधिवक्ता बीएस प्रसाद ने कहा कि उनका विधानसभा सचिव से कोई संबंध नहीं है और अदालत के साथ सहयोग करने की दलीलें सुना रहे हैं। इस दौरान महाधिवक्ता ने अदालतों को विधानसभा के फैसलों में दखल नहीं देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया।

होईकोर्ट में भी न्याय नहीं हुआ

हाईकोर्ट के फैसले पर भाजपा विधायक रघुनंदन राव ने कहा कि उन्हें एकतरफा विधानसभा से निलंबित कर दिया है। विधानसभा सचिव ने उनके निलंबन पर कार्यवाही की प्रति भी नहीं दी। होईकोर्ट जाने के बाद भी उनके साथ न्याय नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए जाना चाहा तो हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं दी है। सरकार और अदालत उनका गला घोंटने की कोशिश करना गलत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

    Archives

    Categories

    Meta

    'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

    X