Chandra Grahan 2022: चंद्र ग्रहण को लेकर यह है मान्यता और परंपरा

हैदराबाद: इस साल का पहला चंद्र ग्रहण वैशाख पूर्णिमा सोमवार (16 मई) को विशाखा नक्षत्र और वृश्चिक राशि में लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है। आज वैशाख की पूर्णिमा भी है। इस दिन पवित्र नदियों में दान, स्नान आदि किया जाता है। लेकिन ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए और ऐसे में भगवान की पूजा भी नहीं की जाती है। वहीं सूर्य ग्रहण की तरह यह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस वजह से सूतक काल मान्य रहीं होंगे।

चंद्र ग्रहण का प्रारंभ सुबह 07 बजकर 58 मिनट से हो रहा है। चंद्र ग्रहण का समापन दिन में 11 बजकर 25 मिनट पर होगा। साल के पहले चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा क्योंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में पूर्णत: सूर्य की उपस्थिति के कारण चंद्र ग्रहण दृश्य नहीं होगा और न ही इसकी मान्यता होगी। यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। वैसे चंद्र ग्रहण के समय में 09 घंटे पूर्व से ही सूतक काल प्रारंभ हो जाता है।

परंपरा और मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में खाना बनाना और खाना दोनों ही वर्जित होता है। साथ ही इस दौरान बाल काटना, नाखून काटना, बाल करना आदि काम भी नहीं किये जाते हैं। ग्रहण काल में सोने (नींद) की भी मनाही होती है। मान्यताओं अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि ग्रहण की छाया का बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ने का खतरा रहता है। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को चाकू, कैंची, सुई जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग करने से भी बचना चाहिए। ग्रहण काल में किसी भी नये काम की शुरुआत न करें। इस दौरान भगवान की मूर्ति और तुलसी के पौधे को भी स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण काल में शारीरिक संबंध बनाने की भी मनाही होती है। (एजेंसियां)

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