कनाडा सरकार देगी कंस्ट्रक्शन वर्कर को पीआर, नये प्रोग्राम का ऐलान, इनको भी हो मिल सकता है लाभ

हैदराबाद : कनाडा में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को यहां स्थायी रूप से रहने की इजाजत भी दी जाती है। इसके लिए उन्हें परमानेंट रेजिडेंसी (पीआर) की सुविधा मिलती है। इसके लिए कनाडा सरकार कई तरह के प्रोग्राम चलाता है। इनके तहत विदेशी कर्मचारियों को पीआर दिया जाता है। हर साल कुछ नए पीआर प्रोग्राम्स का भी ऐलान किया जाता है, जो उन कर्मचारियों के लिए होता है, जिनकी कनाडा के लेबर मार्केट को जरूरत है। इसी कड़ी में साल 2025 में परमानेंट रेजिडेंसी देने के लिए कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को चुना गया है।

कनाडा इस साल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी के लिए एक नए प्रोग्राम को ला रहा है। इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने इसका ऐलान किया है। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी ये नहीं बताया गया है कि नए परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम को कब से लागू किया जाएगा। सरकार ने इस बात की भी जानकारी नहीं दी है कि कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को किन शर्तों को पूरा करना होगा, जिसके बाद उन्हें पीआर मिलेगा या दिया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह जरूर साफ कर दिया है कि परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम इसी साल लाया जाएगा।

सीआईसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा सरकार ने कहा है कि 14,000 विदेशी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी दी जाएगी, लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया है कि क्या इन लोगों को परमानेंट पाथवेज, टेंपरेरी पाथवेज या फिर दोनों के मिले-जुले प्रोग्राम के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी दी जाएगी? सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि कनाडा की सरकार 6000 अनडॉक्यूमेंटेड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को भी पीआर देने वाली है। ये लोग बिना किसी डॉक्यूमेंट्स के अवैध तरीके से देश में काम करने आए थे।

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मार्क मिलर ने आगे कहा कि हम देशभर में 6,000 तक अनडॉक्यूमेंटेड वर्कर्स के लिए जगह आरक्षित कर रहे हैं, ताकि वे नए कंस्ट्रक्शन पाथवेज का हिस्सा बन पाएं। इससे अभी तक छिप कर रहे लोगों को सामने आने का मौका मिलेगा।” मिलर ने बताया कि इनमें से बहुत से लोग कानूनी तरीके से देश में आए थे, लेकिन फिर इनका वीजा एक्सपायर हो गया। इसके बाद भी ये लोग छिपकर काम करते रहे। उन्होंने कहा कि ये वर्कर्स जिन पदों पर काम करते हैं, वो हमारे लिए फायदे का सौदा हो सकती हैं।

कनाडा के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले मजदूरों की कमी है। घरों की किल्लत का सामना भी करना पड़ रहा है। नए घरों को बनाने के लिए वर्कर्स नहीं हैं। सरकार के मुताबिक, 2030 तक 60 लाख घरों के निर्माण की जरूरत है। ऐसे में उसे मिस्री, प्लंबर, बढ़ई, वेल्डर्स जैसे कंस्ट्रक्शन वर्कर्स भी चाहिए, जिस वजह से वह विदेशी वर्कर्स को देश में लाना चाहता है। उन्हें लंबे समय तक देश में रोकने के लिए अब पीआर देने की तैयारी की जा रही है। कनाडा के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले 23 फीसदी लोग विदेशी ही हैं। (एजेंसियां)

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