विशेष लेख : “दम मारो दम…” स्वरसम्राज्ञी आशा भोंसले को भावभीनी श्रद्धांजलि

भारतीय संगीत जगत की महान और दिग्गज गायिका आशा भोंसले के निधन का समाचार पूरे देश के लिए अत्यंत दुःखद और स्तब्ध कर देने वाला है। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया।

आशा भोंसले ने अपनी बहन लता मंगेशकर के साथ संगीत की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी विशिष्ट पहचान बना ली। 1950 के दशक में बॉलीवुड में अपने कॅरियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने 1952 की फिल्म संगदिल से पहचान हासिल की। इसके बाद परिणीता और बूट पॉलिश जैसी फिल्मों ने उन्हें संगीतकारों की पहली पसंद बना दिया।

आठ दशकों से भी अधिक लंबे कॅरियर में उन्होंने हिंदी, मराठी समेत अनेक भाषाओं में हजारों गीत गाए। 1970 के दशक में “पिया तू अब तो आजा”, “दम मारो दम” और “चुरा लिया है तुमने” जैसे गीतों ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। महान गायक मोहम्मद रफ़ी के साथ उनके “मांग के साथ तुम्हारा”, “साथी हाथ बढ़ाना” और “उड़े जब-जब जुल्फें तेरी” जैसे गीत आज भी सदाबहार हैं।

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संगीतकार आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत में एक नया ट्रेंड स्थापित किया। “आजा आजा”, “ये मेरा दिल” जैसे डांस ने उन्हें युवाओं की पसंद बना दिया। वहीं, उन्होंने ग़ज़लों में भी अपनी अलग पहचान बनाई और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुईं। 1990 के दशक में फिल्म रंगीला के गीतों से उन्होंने नई पीढ़ी को भी अपना दीवाना बना लिया। उनके योगदान के लिए आशा को दादा साहब फाल्के और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।

आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि संगीत की एक जीवित विरासत थीं। उनका स्वर, उनकी शैली और उनका जादू सदैव संगीत प्रेमियों में जीवित रहेगा। आशा की याद में यही कहना उचित होगा-

“सुरों की यह देवी भले ही मौन हो गई हों,
लेकिन उनकी गूंज हमेशा अमर रहेगी।”

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’ 98484 93223
कवि लेखक अनुवादक
हैदराबाद

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