हैदराबाद: जनजीवन की मुख्यधारा में आ रहे पूर्व माओवादी पढ़ाई के जरिए अपने नए जीवन की राह बना रहे हैं। ‘बंदूक से कलम की ओर’ कदम बढ़ाते हुए उनके द्वारा हासिल की जा रही असाधारण सफलताएं समाज में नया उत्साह भर रही हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ में दसवीं की परीक्षा देने वाले पूर्व माओवादियों में ‘वेसु’ नामक आदिवासी कॉमरेड ने सबसे ज्यादा अंक हासिल कर टॉप पर रही है। समाज में सम्मान के साथ जीना हो, रोजगार पाना हो तो कम से कम शैक्षिक योग्यता कितनी जरूरी है, यह समझकर कई पूर्व माओवादी उस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। पुनर्वास कैंपों में ट्रेनिंग लेनी हो तो भी यह योग्यता अनिवार्य होने से वे मेहनत से पढ़कर सफलता हासिल कर रहे हैं।
सुनील (हरियाणा/ओडिशा): ओडिशा के उदंती इलाके में DVCM के तौर पर काम कर गरियाबंद में सरेंडर करने वाले हरियाणा के सुनील की पहल से मार्च 2026 में दसवीं की परीक्षा देकर प्रथम श्रेणी में पास हुए। उनकी प्रेरणा से और भी कई लोग वहीं परीक्षा में पास हुए।

डॉक्टर चम्पा: कई दशकों तक जन डॉक्टर के तौर पर, गुरिल्लाओं का विश्वास जीतने वाली आदिवासी कॉमरेड चम्पा बाहर नर्स के तौर पर जन चिकित्सा सेवाएं देने के लिए 12वीं का सर्टिफिकेट अनिवार्य हो गया। नेतृत्व के प्रोत्साहन से उन्होंने अगस्त में दसवीं की परीक्षा देकर फर्स्ट क्लास में पास किया। फिलहाल वे 12वीं की तैयारी कर रही हैं।
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दूला मडकाम (छत्तीसगढ़/तेलंगाना): तेलंगाना में सरेंडर करने वाले छत्तीसगढ़ के कॉमरेड दूला दिहाड़ी मजदूर के तौर पर जीवन बिताते हुए ही दसवीं की परीक्षा देकर द्वितीय श्रेणी में पास हुए। वे भी अब 12वीं की तैयारी कर रहे हैं।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल सिस्टम करीब 20 साल पहले शुरू हुआ था। इसमें न्यूनतम शैक्षिक योग्यता न होने पर भी, उम्र सही हो और आधार कार्ड हो तो सीधे परीक्षा देने की सुविधा है। हालांकि, पूर्व माओवादियों के शिक्षा यज्ञ को पुलिस भी पूरी तरह प्रोत्साहित कर रही है। आंदोलन के जीवन से बाहर आकर नया रास्ता चुनने वालों को शिक्षक भी विद्यार्थियों की तरह हाथ पकड़कर चला रहे हैं। अब इतनी सारी सफलताओं से मिले आत्मविश्वास से आने वाले दिसंबर महीने में होने वाली परीक्षाओं में और भी ज्यादा पूर्व माओवादी हिस्सा लेने के लिए तैयार हो रहे हैं। पढ़ाई के जरिए अपना भविष्य संवारने वालों पर हर तरफ से बधाइयों दी जा रही है।
