हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया एवं साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में 20 सितंबर को रामकोट स्थित सरोजिनी देवी सभागार में साहित्यकारों की विभिन्न कृतियों का लोकार्पण संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्षा) एवं प्रवीण प्रणव (महासचिव) ने संयुक्त रूप से बताया कि क्लब की 410वीं मासिक गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो ऋषभदेव शर्मा (साहित्यकार, हिन्दी परामर्शी दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र मानू) ने की। रमेश प्रसाद मिश्र (अधिकारी राजभाषा,पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि) मुख्य अतिथि के रूप में, प्रो. चंदनसिंह (वरिष्ठ कवि, साहित्यकार व संगीतज्ञ) विशिष्ट अतिथि, श्रीमती शांति अग्रवाल (वरिष्ठ कथाकार, समाजसेवी) आत्मीय अतिथि के रूप में मंचासीन हुए। साथ ही क्लब अध्यक्षा मीना मुथा व लेखिका वि. राजलक्ष्मी भी मंचस्थ हुईं।

सत्र का संचालन करते हुए मोनिका भट्ट ने मंचासीन अतिथियों को दीप प्रज्जवल हेतु सादर आमंत्रित किया। शुभ्रा महन्तो द्वारा निराला रचित सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से कार्यक्रम आरंभ हुआ। मंचासीन अतिथियों का स्वागत शाल माला से संस्था के पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्यों के करकमलों से किया गया। मोहिनी गुप्ता ने प्रो ऋषभदेव शर्मा, रमेश मिश्र एवं प्रो चंदन सिंह का परिचय दिया और तृप्ति मिश्रा ने शांति अग्रवाल, मीना मुथा व वी. राजलक्ष्मी का परिचय प्रस्तुत किया। मीना मुथा ने स्वागत संबोधन में कहा कि 16 सितंबर को क्लब की संस्थापिका डॉ अहिल्या मिश्र का जन्मदिवस हमेशा मनाया जाता रहा है और आज इस आयोजन के माध्यम से पुन: उनकी यादों को, कार्यों को, समर्पण को हम याद करेंगे। उनका मार्गदर्शन सदैव पथप्रदर्शक बनकर हमें साहित्यिक यात्रा में अग्रसर रखेगा।
कृपया वीडियो चैनल सब्सक्राइब करें
प्रवीण प्रणव ने डॉ अहिल्या मिश्र की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि उपरोक्त तीनों संस्थाओं की मजबूत शाखाओं की जड़ डॉ अहिल्या मिश्र हैं, तीनों संस्थाएँ अपनी अपनी दिशा में गतिमान है। हमारा प्रयास रहेगा कि वर्ष में 2 से 3 बार हम रूबरू गोष्ठियों का आयोजन करें जिससे कि साहित्यकार करीब से एक दूसरे को जानें और इस साहित्यिक यात्रा में सहभागिता निभाएँ। अमृता मिश्र ने डॉ अहिल्या मिश्र के विशाल व्यक्तित्व और कृत्तित्त्व का संक्षिप्त में परिचय देते हुए कहा कि वे शिक्षा के प्रति सदैव चिंतनशील रहीं और अपने भीतर हमेशा आत्मीयता बनाएं रखीं।

यह भी पढ़ें-
पुस्तक लोकार्पण की श्रृंखला में सर्वप्रथम “यायावरी के दृगपथों से” लेखिका डॉ अहिल्या मिश्र की यात्रावृत्तांत का परिचय डॉ सुपर्णा मुखर्जी ने देते हुए कहा कि अहिल्या जी ने मॉरीशस, यूरोप एवं भारत का भ्रमण करते हुए वहाँ की संस्कृति का सूक्ष्म अवलोकन कर वहाँ की सभ्यता और मनुष्यता को अपने वृत्तांत में शब्दबद्ध की हैं। समंदर के माध्यम से यात्रा करना हो या आसमान से गुज़रना हो वे हर परिस्थितियों में आत्मबल के साथ यात्राओं को जीती रहीं। परदेश में अपनी संस्कृति को थामें रखीं। तत्पशात् करतल ध्वनि से अतिथियों ने पुस्तक का लोकार्पण किया।

किताबों के परिचय की शृंखला में रवि वैद ने पुष्पक साहित्यकी का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि संपादकद्वय डॉ आशा मिश्र ‘मुक्ता’ एवं प्रवीण प्रणव के अथक प्रयासों से यह गुलदस्ता निरंतर समय पर प्रकाशित हो रहा है। यह पत्रिका साहित्य की विभिन्न विधाओं को समाये हुए हैं। प्रो चंदन सिंह की काव्यकृति “बारिश के पिंजड़े में” का परिचय डॉ रक्षा मेहता ने दिया और कहा कि इनकी कविता में जीवन के विभिन्न रंग और चित्र चरम पर है। मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ साथ ग्रामीण अंचल से कट जाने का भय भी है। आकर्षक शीर्षकों के साथ प्रत्येक कविता आशावाद की नई परतें खोलती हैं।
लेखिका वी. राजलक्ष्मी ने स्वयं की कृतियाँ “सरोज स्मृति” और “सरोज (कविता और भजन संग्रह)” का परिचय देते हुए कहा कि सरोज उनकी माता का नाम है। ये पुस्तकें उन्हीं की याद में हृदय से निकले हुए भाव हैं। कादम्बिनी क्लब के मंच से इसका लोकार्पण मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उपर्युक्त सभी किताबों का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों के कर कमलों से संपन्न हुआ। राजलक्ष्मी ने मंचासीन अतिथियों को गणेश की प्रतिमा और पौधा भेंट किया।

मंचासीन अतिथियों में शांति अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ अहिल्याजी की कमी महसूस होती रहेगी। उन्होंने मुझे क्लब से जोड़ा, किताबों का लोकार्पण करवाया, बड़ी मेहनत से तीनों संस्थाओं को उन्होंने सींचा है। प्रो चंदनसिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आदरणीय अहिल्या जी के साथ अधिक समय नहीं मिला, अब छटपटाहट हो रही है कि मैं पूर्व में ही उनसे क्यों न मिला। रमेश कुमार मिश्र ने बताया कि ये संस्थाएं राजभाषा के विकास को साहित्य के माध्यम से आगे ले जा रहे हैं। यात्रा के माध्यम से हम बहुत कुछ सीखते हैं। अनुभव मायने रखता है। हिन्दी के प्रति जनजन में सम्मान की भावना हो यह प्रयास हम सभी का होना चाहिए।

प्रो ऋकमदेव शर्मा ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इन तीनों संस्थाओं की पुष्ट शाखाओं की जड़ आदरणीया डॉ अहिल्या मिश्र रही हैं। वे कृतिशेष हैं। यात्रा में वे नदी, पहाड़ या झरनों को नहीं बल्कि मनुष्यता को देखती थीं। सामाजिक प्रतिबंध, रूढी उन्हें विश्व नागरिक बनने से रोक नहीं सकती। उनकी यह यात्रा वृत्तान्त टूरिस्ट गाइड नहीं बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के दस्तावेज है। प्रो चंदन सिंह के काव्य संग्रह की कविताएँ बहुत कुछ कहती हैं और सोचने के लिए मजबूर करती हैं। उन्होंने राजलक्ष्मी की प्रकाशित पुस्तकों की रचनाओं की सराहना की और उन्हें साधुवाद दिया साथ ही पुष्पक साहित्यिकी के संपादकों को भी बधाई दी। अवसर पर स्वाती बालूरकर की किताब “गूंज” का भी लोकार्पण किया गया। प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने कहा कि “गूंज” लेखिका की हिन्दी में प्रथम कहानी संग्रह है और लेखन जगत में लेखिका आगे बढ़ने की संभावना रखती हैं। प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन विनोदगिरी अनोखा ने किया।

द्वितीय कविता पाठ सत्र की अध्यक्षता प्रो. चन्दन सिंह ने की। पुष्पा वर्मा (वरिष्ठ रचनाकार), श्रुतिकांत भारती, प्रो. ऋषभदेव शर्मा एवं मीना मुथा मंचासीन हुए। आर्या झा ने सत्र का संचालन किया। काव्यपाठ में सीताराम माने, चंद्रप्रकाश दायमा, रवि वैद, डॉ संगीता शर्मा, किरण सिंह, डॉ प्रतिभा गर्ग, मोहिनी गुप्ता, आशा ठाकुर, गीता अग्रवाल, धीरेंद्र कुमार झा, विनोद गिरी अनोखा, मोहित, सुरज कुमारी गोस्वामी, इंदु सिंह, भगवती अग्रवाल, हर्षलता दुधोडिया, वर्षा शर्मा, नितिश पाण्डेय, उमा सोनी, प्रतिमा सिंह, प्रियंका पांडे, मोनिका भट्ट, सुहास भटनागर, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, प्रवीण प्रणव, डॉ आशा मिश्र ‘मुक्ता’, पुष्पा वर्मा, प्रो ऋषभदेव शर्मा, श्रुतिकांत भारती, मीना मुथा, आर्या झा आदि ने काव्यपाठ किया।
साथ ही प्रो. चंदनसिंह ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया और सभी कवियों को साधुवाद दिया। डॉ मदनदेवी पोकरना, डॉ स्वाति गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, के राजन्ना, डॉ कृष्णा सिंह, डॉ रेखा शर्मा, प्रशांत सिंह, डॉ इर्शाद, ममता, जमीया, अनुपमा सिंह, डॉ सुरभि दत्त, प्रदीप दत्त, जी. परमेश्वर, जितेंद्र प्रकाश, प्रताप सिंह, राजेश सोनी, जितेंद्र सिंह, विपीन अग्रवाल, शालिनी अग्रवाल, मुखविंदर सिंह आदि गणमान्यों की उपस्थिति रही। मीना मुथा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन के बाद सभी ने स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया। संपूर्ण कार्यक्रम के प्रायोजक मानवेंद्र मिश्र एवं आशा मिश्र रहे। राष्ट्रगीत के साथ सत्र का समापन हुआ।
