पिहानी (हरदोई, उत्तर प्रदेश) : कस्बे में काव्य धारा का ऐसा अमृत प्रवाह बहा कि तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर देर तक गुंजायमान होता रहा। अवसर था गायत्री प्रज्ञा पीठ पर आयोजित भव्य साहित्योत्सव और काव्य पाठ का। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों से आए दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। कवियों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में इंसानी फितरत, राजनीति, भ्रष्टाचार और देशप्रेम जैसे गंभीर विषयों पर जमकर कटाक्ष किए और प्रस्तुतियां दीं।
सीतापुर से पधारे हास्य और व्यंग्य के कवि अरुणेश मिश्र ने श्रोताओं को उठाकर लगाने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय कवि ठाकुर प्रसाद यादव की कविताओं को श्रोताओं ने पसंद किया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आई ए एस अधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर ने स्वरचित कविताएं सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। साथ ही कवि झंकार नाथ शुक्ल ने इंसानी स्वभाव पर गहरा तंज कसते हुए पढ़ा— “आदमी आजीवन शेर की तरह गुर्राया, कभी सियार की तरह हुआया। लेकिन खुद चोट खाया, तो आदमी आदमी की तरह चिल्लाया।

कवि कार्तिकेय कुमार शुक्ला ने सादगी के साथ पढ़ा— “सुबह सुबह उतर गया शामियाना, कुर्सियों से। कवि सतीश शुक्ल की पंक्तियों पर खूब तालियां बजीं— “दुपट्टा है हवा के रूख से फट जाये तो क्या होगा, सियासत बात से अपनी पलट जाये तो क्या होगा। नदी की धार में तुम यार नंगे होके मत उतरना, ये पानी एक दम से ठहर जाये तो क्या होगा। कवि श्रवण मिश्र ‘राही’ ने अपनों के बीच बढ़ते फासलों पर कहा— “अपनो से अपने छल करते रहते हैं, और आँखों में ख्वाब सजाये लगते हैं।
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लखीमपुर खीरी (जंग बहादुर गंज) से आए कवि श्रीकांत सिंह ने दफ्तरों के हाल बयां करते हुए पढ़ा— “दफ्तर में फाइल धरी फाइल मांगे दाम। बिना दाम के हो भला, कैसे कोई काम। सीतापुर से पधारे कवि रजनीश मिश्रा ने युवाओं में जोश भरते हुए देशप्रेम की अलख जगाई— “हर युवा मस्त मतवाला हो, भारत का रखवाला हो।.इस सफल काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। अंत में आयोजक अतुल कपूर ने सभी आगंतुक कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
