वाराणसी : विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी काशी ने एक ऐसे अभियान का साक्षी बनकर इतिहास रचा, जिसने उद्योग, पर्यावरण, शिक्षा और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरो दिया। “नई पीढ़ी – प्लास्ट संकल्प अभियान” के औपचारिक शुभारंभ के साथ देश भर से आए उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवा उद्यमियों और पर्यावरण प्रेमियों ने सस्टेनेबल भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया। यह केवल एक सेमिनार नहीं था, बल्कि प्लास्टिक उद्योग के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने तथा रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी।
सीआईपीईटी महानिदेशक ने दिया नवाचार और जिम्मेदारी का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीआईपीईटी (CIPET) के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) शिशिर सिन्हा रहे। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और भविष्य की चुनौतियों का समाधान नवाचार, कौशल विकास, रिसाइक्लिंग और जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने आगे कहा कि प्लास्टिक को समस्या के रूप में नहीं, बल्कि उसके जिम्मेदार उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन के दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने “नई पीढ़ी – प्लास्ट संकल्प अभियान” को उद्योग और समाज के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने वाली एक सार्थक पहल बताया।

काशी विद्यापीठ बना विचार-मंथन का केंद्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने इस अभियान को शिक्षा, उद्योग और समाज के बीच एक सशक्त सेतु बताया।
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विशिष्ट वक्ता के रूप में इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट (IPI) के अध्यक्ष एवं यूफ्लेक्स लिमिटेड में सस्टेनेबिलिटी गतिविधियों का संचालन कर रहे राकेश शाह ने प्लास्टिक उद्योग की वर्तमान चुनौतियों, अवसरों और सर्कुलर इकॉनमी की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने सक्रिय सहभागिता की।
जब शिष्य के संकल्प को गुरुदेव ने दिया आकार
इस पूरे अभियान के पीछे एक ऐसी प्रेरक कहानी भी जुड़ी है, जो भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बन गई। नई पीढ़ी फाउंडेशन द्वारा संचालित इस अभियान की तैयारियां पिछले कई महीनों से चल रही थीं। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित एवं सस्टेनेबल भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए प्लास्टिक उद्योग को पर्यावरण संरक्षण, रीसाइक्लिंग और रियूज के सिद्धांतों से जोड़ना था। लेकिन 28 मई को अभियान के संस्थापक शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी की अचानक तबीयत खराब हो गई। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर आशंकाएं उत्पन्न होने लगीं।

ऐसे समय में पद्मश्री सम्मानित, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात आध्यात्मिक विद्वान पूज्य श्री हरिहर कृपालु त्रिपाठी महाराज शिष्य के दृढ संकल्प को देखते हुये स्वयं आगे आए। आध्यात्मिक साधना में व्यस्त रहने वाले गुरुदेव पिछले कई महीनों से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं गए थे, फिर भी उन्होंने अपने शिष्य के संकल्प को अधूरा नहीं रहने दिया। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में वे स्वयं सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित हुए और पूरे आयोजन का मार्गदर्शन किया।
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काशी विश्वनाथ धाम में दिलाया गया संकल्प
कार्यक्रम के अगले दिन, जब संस्थापक की तबीयत पुनः बिगड़ गई और काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में प्रस्तावित संकल्प कार्यक्रम अनिश्चित दिखाई देने लगा, तब गुरुदेव स्वयं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। वहीं बाबा विश्वनाथ के सान्निध्य में गुजरात और देश के अन्य भागों से आए उद्यमियों को पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबिलिटी, रीसाइक्लिंग और रियूज के सिद्धांतों को उद्योग और जीवन का अभिन्न अंग बनाने की शपथ दिलाई गई।

इस अवसर पर सौराष्ट्र प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SPMA) के अध्यक्ष जे. के. पटेल, पूर्व अध्यक्ष पराग सांघवी, गुजरात स्टेट प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GSPMA) के सचिव मनसुख सांवलिया, कोषाध्यक्ष देवांग पाठक तथा अन्य उद्योग प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष श्री राकेश शाह भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
सोमनाथ से विश्वनाथ तक सस्टेनेबिलिटी का संदेश
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरक क्षण तब आया, जब सोमनाथ की धरती से आए उद्यमियों ने विश्वनाथ की धरती पर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संकल्प लिया। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सस्टेनेबल भारत के विजन को आगे बढ़ाने, प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने, रीसाइक्लिंग और रियूज की संस्कृति को मजबूत करने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित भारत के निर्माण में योगदान देने की शपथ ली। यह दृश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक राष्ट्रीय संदेश था।
एमएसएमई राज्य मंत्री ने बढ़ाया उत्साह
4 जून को आयोजित कार्यक्रम के बाद बाहर से आये अतिथियों के सम्मान में शहर के एक प्रतिष्ठित होटल रात्रिभोज में उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होने बाहर से आए उद्यमियों से संवाद करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने “नई पीढ़ी – प्लास्ट संकल्प अभियान” को उद्योग और पर्यावरण के बीच सकारात्मक संतुलन स्थापित करने वाला प्रेरणादायक प्रयास बताया।
उद्योग और चेतना का संगम
काशी से प्रारंभ हुआ “नई पीढ़ी – प्लास्ट संकल्प अभियान” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार, एक आंदोलन और एक राष्ट्रीय संदेश है। यह संदेश है कि विकास और पर्यावरण विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यह संदेश है कि उद्योग, समाज, शिक्षा और अध्यात्म मिलकर ही सस्टेनेबल भारत का निर्माण कर सकते हैं। और शायद यही इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि यहां केवल प्लास्टिक उद्योग की बात नहीं हुई, बल्कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और भविष्य की भी बात हुई। काशी से उठी यह संकल्पध्वनि आने वाले वर्षों में देशभर के प्लास्टिक उद्योग को जिम्मेदार विकास, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सस्टेनेबल भविष्य की दिशा में प्रेरित करती रहेगी।
