हैदराबाद : महिला काव्य मंच आंध्र-प्रदेश इकाई द्वारा दीपावली स्नेह मिलन समारोह एवं बाल दिवस विशेष कार्यक्रम का ऑनलाइन आयोजन किया गया। अध्यक्ष सरिता सुराणा ने समारोह में उपस्थित समस्त महिला और बाल रचनाकारों का शब्द-पुष्पों से हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और संस्था की गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। हर्षलता दुधोड़िया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से समारोह आरम्भ हुआ।
इस काव्य गोष्ठी में मंच के चेयरमैन नरेश नाज़ सर का सान्निध्य प्राप्त हुआ। इकाई अध्यक्ष सरिता सुराणा ने इस समारोह की अध्यक्षता की। मकाम की राष्ट्रीय महासचिव सरला विजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में और कर्नाटक इकाई अध्यक्ष ममता सिंह ‘अमृत’ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। इसके आरम्भ में कानपुर, उत्तर-प्रदेश से वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती कुसुम सिंह अविचल ने महिला क्रिकेट टीम के विश्व चैम्पियन बनने पर अपनी उत्साहवर्धक रचना का पाठ किया। तत्पश्चात् रांची, झारखंड से बाल रचनाकार अंशुमान मिश्रा ने अपनी स्वरचित रचनाओं का पाठ करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
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वरिष्ठ कवयित्रियों- अमिता श्रीवास्तव, शोभा देशपांडे, हर्षलता दुधोड़िया, विमलेश सिंघी और सूरज कुमारी गोस्वामी ने दीपावली और बाल दिवस से सम्बन्धित एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। कटक, उड़ीसा से कहानीकार रिमझिम झा ने बच्चों के लिए रचित विशेष रचना- ये दंतुरित नादान प्रस्तुत की तो बैंगलुरू से एडवोकेट अमृता श्री ने – खामोश अकेले जलते क्यूं हो/ ऐ दीपक….जैसी खूबसूरत रचना प्रस्तुत करके समां बांध दिया। हैदराबाद से वरिष्ठ कवयित्री विनीता शर्मा ने – दुर्गम पथ वो चला न जाए/हाथ पकड़ कर मुझे चलाना/तुम आश्वासन बनकर आना रचना बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत की। उदयपुर, राजस्थान से सुश्री मृणाल जोशी ने बहुत ही जोशीले अंदाज में अपनी रचनाओं – ओ बादल राजा/गरज-गरज के बरस रहे हो क्यूं बादल राजा? तथा श्याम श्याम श्याम कारे/चित चोर वंशी वारे की शानदार प्रस्तुति दी।
इस समारोह में तमिलनाडु इकाई से मकाम की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मंजू रुस्तगी ने समस्त सदस्यों को दीपावली की शुभकामनाएं प्रदान की और कहा कि जब हम सब आपस में मिलते हैं, तभी त्यौंहार जैसा वातावरण बन जाता है। उन्होंने बहुत ही सुन्दर रचना – उत्साह के रंगों से पूरित आस की रंगोली सजाना प्रस्तुत करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। ममता सिंह ‘अमृत’ ने – कहाँ-कहाँ से बिखरा हूँ मैं/तब जाकर निखरा हूँ मैं की सुन्दर प्रस्तुति दी। सरला विजय सिंह ने अमावस की गहन रात में एक दीप जलाना है तथा तुम्हीं हो रचनाओं का शानदार ढंग से वाचन किया।
सरिता सुराणा ने अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए सभी रचनाकारों की रचनाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और अपनी रचना – दीप जल, तम हर, प्रकाश कर/अपने अंदर भी उजास भर की प्रस्तुति दी। उसके पश्चात् नरेश नाज़ सर ने अपना आशीर्वचन प्रदान किया और अपनी रचनाओं की सस्वर प्रस्तुति से सबको भावविभोर कर दिया। उन्होंने मेरे प्यारे देशवासियों! सुनो देश का हाल जैसी चार पंक्तियों के माध्यम से देश की वर्तमान स्थिति का सटीक चित्रण किया। नन्ही बालिका सुश्री जिनांशी दुधोड़िया ने भी काव्य पाठ किया। बहुत ही उल्लासमय वातावरण में गोष्ठी सम्पन्न हुई। अध्यक्ष सरिता ने सभी सहभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
