हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की 394 वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन 18 मई को डॉ शिवशंकर अवस्थी (महासचिव, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया नई दिल्ली) की अध्यक्षता में ऑन लाइन गूगल मीट के माध्यम से किया गया। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए डॉ अहिल्या मिश्र (क्लब अध्यक्षा) एवं मीना मुथा (कार्यकारी संयोजिका) ने बताया कि कार्यक्रम का आरंभ सासमिता नायक द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
डॉ अहिल्या मिश्र ने पटल पर उपास्थित समस्त साहित्यकारों का शब्द कुमुमों से स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी की सक्रियता ने ही कादम्बिनी क्लब को उंचाइयों तक ले जाने का कार्य किया है। अगले माह जून में संस्था 32 वें वर्ष में कदम रखने जा रही है। इस दीर्घ यात्रा में कुछ बिछड़े कुछ जुड़े। आज के प्रथम सत्र में “डॉ राजेंद्र अवस्थी की कहानियों में आधुनिक बोध” विषय पर डॉ उषा दुबे (भूतपूर्व – प्राचार्या, गवर्नमेंट वूमेन्स कॉलेज जबलपूर, म.प्र.) मुख्य वक्ता अपना प्रपत्र प्रस्तुत करेंगी। साथ ही अशोक अत्रेय (साहित्यकार एवं चित्रकार, जयपुर) विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थिति देंगे। डॉ शिवशंकर अवस्थी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए स्वीकृति दी है, यह हमारे लिए बड़ी उपलब्दि है।
संगोष्ठी सत्र संयोजक अवधेश कुमार सिन्हा ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि 1980 और 1999 में राजेंद्र अवस्थी से भेंट का अवसर प्राप्त हुआ। उन्हें आँचालिक कहानीकार माना जाता है, साथ ही आधुनिक कहानियों के कहानीकार के रूप में भी इनका नाम आता है। डॉ उषा दुबे जी विस्तार से हमें अवस्थी की कहानियों में आधुनिक बोध के बारे में जानकारी देंगी।
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डॉ उषा दुबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि राजेंद्र अवस्थी से नजदीकी परिचय रहा है। उनकी कहानियाँ बदलते जीवनमूल्यों को चित्रित करती हैं। आधुनिक लेखक की पहचान उसकी – सजगता होती है। आज के जीवन की जटिलता से वे सबको अवगत कराते रहें। युवा वर्ग को प्रेरणा देनेवाला उनका लेखन रहा है। समय के साथ साथ भाषा, भाव और शैली में परिवर्तन होता रहा। राजेंद्र अवस्थी का कहानी लेखन आदिवासियों के निश्चल अभिव्यक्ति से शुरू हुआ। पत्रकार, संपादक, दार्शनिक, कहानीकार, उपन्यासकार विविध पहलू हैं उनके जीवन के। डॉ उषा ने सौदा, बंगला नं. 10, जनसेवा, शीशे के परदे, औरत एक मक्खी आदि कहानियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजेंद्र अवस्थी का संपूर्ण कहानी साहित्य हार नहीं मानता, यह बार-बार गिरता है गिरकर फिर उठता है।
अवधेश कुमार सिन्हा ने कुछ प्रश्न का समाधान कराया । डॉ अहिल्या मिश्र ने कहा कि अवस्थी पहले दर्जे के पत्रकार थे आदिवासी समाज विशेष का चित्रण उनकी विशेषता रही। वे जमीन से जुड़े व्याक्तित्व रहें। लेखक जब तक भटके नहीं तब तक वह उस भोगे हुए क्षण को व्यक्त नहीं कर पाता है। अशोक अत्रेय ने विचार रखते हुए कहा कि राजेंद्र अवस्थी विभिन्न चरित्रों का निर्वाहन करते हुए महान साहित्यकार की भूमिका अदा की है। साथ ही अत्रेय जी ने अपनी पेंटिंग की संक्षिप्त जानकारी दी।
अध्यक्षीय टीप्पणी में डॉ शिवशंकर अवस्थी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पिताजी ने विभित्र शहरों में कादम्बिनी कल्ब की शुरुआत इस उद्देश्य से की कि साहित्य सबतक पहुँचे और सब- साहित्य तक पहुँचें। आज हमें गर्व है कि कादम्बिनी क्लब इस दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। साहित्य के प्रति प्रेम केवल अपने तक सिमित न रखकर इसे जनजन में फैलाया। उन्होंने समाज में जो देखा उसे कलमबद्ध किया। मानवीय भावनाओं को समझने की भावना उन्हें कहानियों की ओर मोड़ती रहीं। डॉ उषा दुबे ने कम समय में विस्तार से राजेंद्र जी के बारे में जानकारी रखी है। संदीप शर्मा (नई दिल्ली) ने कहा कि आज भी साहित्यकार धूप में तपता है। साहित्य को समझने की कोशिश करता है, तब कहीं जाकर लिख पाता है। संगोष्ठी सत्र का संचालन अवधेश कुमार सिन्हा ने किया।
दूसरे सत्र में डॉ शिवशंकर अवस्थी की अध्यक्षता व संदीप शर्मा के विशेष आतिथ्य में कविगोष्ठी संपन्न हुई। इसमें भावना पुरोहित, नीशी कुमारी, शीला भनोत, डॉ संध्या जैन, विनोदगिरी अनोखा, दर्शन सिंह, विनीता शर्मा, शोभा देशपांडे, रमा बहेड, मीरा ठाकुर, भगवती अग्रवाल, सुनीता लुल्ला, हर्षलता दुधोडिया, अशोक अत्रेय, वर्षा शर्मा, भगवती अग्रवाल, डॉ आशा मिश्र मुक्ता, डॉ अहिल्या मिश्र, संदीप शर्मा, मीना मुथा ने भाग लिया। डॉ शिवशंकर अवस्थी ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया।
डॉ मदनदेवी पोकरणा, चंद्रलेखा कोठारी, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, डॉ रमा द्विवेदी, डॉ कृष्णा सिंह, डॉ राशि सिन्हा, सरोज शर्मा, उषा शर्मा, उमा सोनी, शिल्पी भटनागर , मधु भटनागर, तृप्ति मिश्रा की पटल पर उपस्थिति रही। प्रवीण प्रणव व डॉ आशा मिश्र ‘मुक्ता’ ने तकनीकी सहयोग की जिम्मेदारी संभाली। मीना मुथा ने संचालन किया। विनोदगरी अनोखा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। पहलगांव में आतंकवादी हमले में मृतस्थ आत्माओं के प्रति कादंबिनी क्लब की ओर से भावभीनी श्रध्दांजलि एक मिनट का मौन रखकर दी गई।
