सोमवार की शाम से खेल जगत और मीडिया में एक नाम सुर्खियों में है और वह वैभव सूर्यवंशी। अब इस चौदह साल के क्रिकटर के बारे में खूब लिखा जा रहा है। यह सब कुछ संयोग से हो गया है। वह संयोग है- राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन चोटिल हो जाने से हो पाया है।
वैभव शुरुआती मैचों में बेंच पर ही दिखाई दे रहे थे। जैसे ही मौका मिला वैभव सूर्यवंशी ने 18 साल के इतिहास में कोई भारतीय क्रिकेटर नहीं कर पाया था। राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए वैभव ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंद पर शतक लगा दिया। सबसे खास बात है कि वैभव सिर्फ 14 साल के हैं। गुजरात के लिए इस मैच में 7 गेंदबाजों ने गेंदबाजी की। इसमें सभी इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुके हैं। वैभव ने किसी को नहीं छोड़ा। सबकी पिटाई कर दी।

वैभव सूर्यवंशी का मुंबई, कोलकाता, चेन्नई या दिल्ली जैसे महानगर से संबंध नहीं है। वह किसी शहर से भी नहीं है। मार्च 2011 में जन्मे वैभव बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर ब्लॉक का रहने वाला है। उसके क्रिकेट का सफर इसी जगह से शुरू हुआ। जब वैभव चार साल के थे तो उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने देखा कि प्लास्टिक की बॉल को काफी ताकत से वह हिट कर था। संजीव एक किसान थे। फिर भी इस खेल में आने के बाद वैभव को अंडर आर्म बॉल डालकर प्रैक्टिस करवाते थे।
Also Read-
इसके बाद संजीव ने अपने घर के पीछे एक छोटी सी प्रैक्टिस की जगह बना दी। इससे वैभव को अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिला। अपने बेटे के जुनून और लगन से प्रभावित होकर उसने वैभव को समस्तीपुर की एक एकेडमी में ले गए। वहां ब्रजेश झा नामक कोच से वैभव को ट्रेनिंग मिली। उनके अधीन ट्रेनिंग करने के बाद वैभव पटना पहुंच गए। जहां मनीष ओझा से वैभव के क्रिकेटिंग स्किल को और भी निखारने में मदद की।

इसी बीच एक समस्या उत्पन्न हुई। ताजपुर से पटना की दूसरी करीब 75 किलोमीटर है। इसलिए ट्रैवल करना आसान नहीं था। ऐसे में संजीव ने बेटे को ट्रेनिंग ले जाने के लिए कार खरीदी। वह हर दूसरे दिन वैभव को ट्रेनिंग करवाने के लिए पटना लेकर जाते थे। वैभव को क्रिकेटर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी।

वैभव के माता पिता
इसके बाद वैभव ने बिहार के इंटर डिस्ट्रिक्ट टूर्नामेंट हेमन ट्रॉफी में रनों की बरसात कर दी। इसके बाद वैभव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2023 के वीनू मांकड़ ट्रॉफी में 5 मैच में वैभव ने 109 की स्ट्राइक रेट और 78 की औसत से 393 रन बनाएं। इसमें एक शतक और तीन अर्ध शतक शामिल थे। यह भारत का घरेलू अंडर-19 टूर्नामेंट था और उसमें खेलने के समय वैभव 13 साल के भी नहीं हुए थे।
वैभव ने 12 साल 9 महीने और 10 दिन की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया। मुंबई के खिलाफ जनवरी 2024 में उन्होंने अपना पहला रणजी मैच खेला था। वह रणजी ट्रॉफी में खेलने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी बन गए। नवंबर 2024 में वह 13 साल और 241 दिन की उम्र में टी20 खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गये। अगले महीने वह लिस्ट ए खेलने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी भी बन गए।
सितंबर 2024 में भारत और ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के बीच यूथ टेस्ट हुआ था। वैभव ने अपने डेब्यू मुकाबले में ही सिर्फ 58 गेंद पर शतक ठोक दिया था। यह अंडर-19 क्रिकेट में किसी भी भारतीय खिलाड़ी का रिकॉर्ड है। वहीं ओवरऑल अंडर-19 में दूसरा सबसे तेज शतक था। फिर अंडर-19 एशिया कप में भी उनका बल्ला बोला। यूएई के खिलाफ 46 गेंद पर 76 रन बनाने के बाद सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 36 गेंद पर 67 रन बनाये। इस समय तक वैभव हर तरफ छा गए थे। इसका असर हुआ कि जेद्दाह में हुए आईपीएल 2025 की नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 1 करोड़ 10 लाख रुपये में खरीदा।
राजस्थान रॉयल्स के लिए वैभव शुरुआती मैचों में बेंच पर ही बैठे रहे। इसी बीच दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मुकाबले में कप्तान संजू सैमसन चोटिल हो गए। ऐसे में लखनऊ के खिलाफ वैभव को डेब्यू करने का मौका मिला। अपने आईपीएल कॅरियर की पहली गेंद पर छक्का मार दिया। यह गेंद शार्दुल ठाकुर डाली थी फिर आवेश खान को भी उसने नहीं छोड़ा। अब गुजरात के खिलाफ मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, ईशांत शर्मा, राशिद खान और करीम जनत जैसे गेंदबाजों को कूट-कूटकर 38 गेंद पर 101 रन बवाये। इसके चलते हरेक जुबान पर वैभव – वैभव ही है।
