दुनिया के सामने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुंह हो गया काला, ईरानी जनता की हो गई जीत

हैदराबाद/तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका के पागल, सनकी और खून खोर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आखिर ईरानी जनता के सामने घुटने टेक दिया। पिछले 40 दिन में ट्रंप ने पूरे मध्य पूर्व को खतरे में डाल दिया था। ट्रंप के रवैये का ईरानी जनता ने साहस के साथ मुकाबला किया और जीत हासिल की। इस पर ईरानी जनता खुशी और गर्व से जश्न मनाई। हालांकि अमेरिका की जीत का दावा करने वाले देश में ऐसा कोई जश्न दिखाई नहीं दी। इस तरह डोनाल्ड ट्रंप का मुंह काला हो गया है। दुनिया के सामने अमेरिका गर्व चकनाचूर हो गया।

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की जीत बताते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर को क्रेडिट देते हुए ईरान के साथ दो हफ्तों के लिए युद्धविराम की घोषणा कर दी। ट्रंप का युद्धविराम को लेकर पोस्ट उनके ईरान को दिए गये डेडलाइन के करीब ही था। लेकिन ईरान ने युद्धविराम की घोषणा इस शर्त के साथ की है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका ‘अधिकार’ होगा।

इस युद्धविराम के साथ शायद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी इज्जत बचाने की कोशिश की है। उन्हें युद्ध से बाहर आने के लिए कोई सम्मानजनक मोड़ चाहिए था। उन्होंने ईरान की सभ्यता को मिटाने की कसम खा रखी थी। लेकिन युद्धविराम की शर्तों और अमेरिका के युद्ध शुरू करने की वजहों को जब तराजू पर तोलते हैं तो अमेरिका के हाथ खाली दिखते हैं। ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान की प्रतिक्रिया से डरकर भाग खड़े हुए हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के अधिकारियों को ‘इस्लामाबाद समझौते’ के लिए शुक्रवार को आमंत्रित किया है। अब अगले दो हफ्तों तक अस्थाई युद्धविराम को शांति स्थापना तक पहुंचाने के लिए बात होगी। आने वाले दिनों में ये बातचीत आसान नहीं दिख रही है लेकिन बाजार में शुभ संकेत मिल रहे हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। अमेरिकी स्टॉक में जबरदस्त उछाल आया है। लेकिन सवाल ये है कि ईरान जब युद्ध से पहले भी अमेरिकी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था तो वो अब क्यों मानें?

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डोनाल्ड ट्रंप अपने ही घर में बुरी तरह से घिर गये हैं। उन्हें पद से बर्खास्त करने के लिए आर्टिकल-25 का हवाला दिया जा रहा है। ईरानी सभ्यता को खत्म करने की बात पर डेमोक्रेटिक पार्टी ने कड़ी निंदा की। कुछ तो यहां तक कह गए कि उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए। सांसद जोकिन कास्त्रो ने X पर लिखा “यह साफ है कि राष्ट्रपति का स्तर लगातार गिर रहा है और वह नेतृत्व करने के काबिल नहीं हैं।” अमेरिकी सीनेट में शीर्ष डेमोक्रेट चक शूमर ने कहा “कोई भी रिपब्लिकन जो ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए वोट देने में शामिल नहीं हुआ वह इस सब के जो भी बुरे नतीजे होंगे उन सबका जिम्मेदार होगा।”

जॉर्जिया से रिपब्लिकन सांसद और हाउस आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के सीनियर सदस्य ऑस्टिन स्कॉट, जो ट्रंप की पार्टी की नेता हैं, उन्होंने अपने राष्ट्रपति की उस धमकी की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने किसी सभ्यता के खत्म होने की बात कही थी। विस्कॉन्सिन के सीनेटर रॉन जॉनसन जो आम तौर पर ट्रंप के वफादार माने जाते हैं, उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप अपनी बमबारी की मुहिम को आगे बढ़ाते हैं तो यह एक “बहुत बड़ी गलती” होगी।

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 13 हजार से ज्यादा हमले किए। इसमें निश्चित तौर पर ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हुई है। लेकिन इतनी भी नहीं कि वो घुटने टेक थे। उसक भंडार में अभी भी सैकड़ों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की क्षमता बनी हुई है। अमेरिका, ईरान के इस्लामिक शासन को आतंकवादी शासन कहता था, लेकिन ये शासन नुकसान के साथ अब और मजबूत हो गया है। ईरान ने होर्मुज से टोल वसूलना अपना हक बता दिया है।

अमेरिका ने ईरान के उस 10 प्वाइंट को स्वीकार किया है जिनमें ईरान से प्रतिबंध हटाना, उसका पुननिर्माण, युद्ध से नुकसान का मुआवजा जैसी बातें हैं। डोनाल्ड ट्रंप शायद अभी सिर्फ इस बात से खुश हो सकते हैं कि उनकी ‘सभ्यता को खत्म करने की धमकी’ से ईरान युद्धविराम के लिए तैयार हुआ है। लेकिन इससे ज्यादा उनके हाथ में कुछ भी नहीं है।

ईरान के साथ युद्धविराम ने इजरायल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को बुरी तरह नाराज कर दिया है। सऊदी और UAE में अमेरिका पर धोखा देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन दोनों देशों में पाकिस्तान के लिए भी भारी गुस्सा है। किंगडम के करीबी कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर ने पाकिस्तान पर धोखा देने और इस घटना को याद रखने की चेतावनी दी है।

इसीलिए युद्धविराम को बस इतना ही नहीं माना जाना चाहिए। अभी इंतजार करने की जरूरत है और दो हफ्ते तक डेवलपमेंट्स को देखने की जरूरत है कि क्या ईरान, वाकई युद्ध से पहले अमेरिका की जो शर्तें थी उसे मानता है या ट्रंप के पास कोई और रास्ता नहीं छोड़ता है।

इसी क्रम में अमेरिका के साथ युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद ईरान ने भले ही हमले रोक दिए हों लेकिन उसने चेतावनी दी है कि ‘हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं।’ ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक केन्द्रीय नेतृत्व ने अमेरिका के साथ दो हफ्ते के संघर्ष-विराम समझौते के बाद ईरान की सेना को गोलीबारी पूरी तरह से रोकने का निर्देश दिया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और यदि आवश्यक हुआ तो ईरान आगे और तनाव बढ़ने की स्थिति के लिए भी तैयार है।

ईरान की सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक आधिकारिक बयान में ईरान के नेतृत्व ने कहाके आदेश का पालन करना होगा।’ इसके साथ ही अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ‘यदि अमेरिका या उसके सहयोगी कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करते हैं तो देश के सेना अभी भी जवाब देने के लिए तैयार है।’ ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि ‘युद्धविराम ‘सभी सशस्त्र बलों को युद्धविराम का मतलब युद्ध की समाप्ति नहीं है। उसने कहा कि ‘देश की सेना अभी भी पूरी तरह से सतर्क है और किसी भी उल्लंघन पर कड़ा जवाब देगी। (एजेंसियां)

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