इस समय ईरान-इजरायल के बीच युद्ध जारी है। दोनों देश लड़ रहे हैं। नुकसान दोनों देशों का हो रहा है। दोनों देशों के लोगों का बुरा हाल है। भारत तटस्थ है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका पर किसी प्रकार का हमला नहीं किया और न ही कोई चेतावनी दी है। फिर भी अमेरिका ने ईरान पर बेवजह शनिवार आधी रात को हमला किया। लोग इसे तीसरे विश्व युद्ध का संकेत मान रहे हैं। इसीलिए आपको नहीं लगता है कि बेवजह ईरान पर हमला करने वाले अमेरिका को सबक सिखाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो सद्दाम हुसैन, मुअम्मर गद्दाफी की तरह ही ईरान के प्रमुख नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का भी वैसा ही अंत होगा। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका भविष्य में किसी भी देश पर हमला कर सकता है। इसीलिए हमारा मानना है कि अमेरिका के अहंकार को कुचलने के लिए सभी देशों को एकजुट होने का समय आ गया है।
हैदराबाद: अमेरिका ने ईरान के इन तीन परमाणु स्थलों पर 6 GBU-57 बम गिराए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान पर हमले की पुष्टि की है। अमेरिका ने शनिवार आधी रात को ईरान के तीन परमाणु स्थल- फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर कुल 6 GBU-57 बंकर बस्टर बमबारी हैं। इसके बाद अमेरिकी सेना वापस आ रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, ”फोर्डो खत्म हो गया।” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के “खतरनाक और सक्रिय” परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। आपको बता दें कि अमेरिका ने अपने B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से इन महा विशालकाय बमों को गिराए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिकी मीडिया को बताया है कि अमेरिका ने 30 हजार पाउंड यानी करीब साढ़े 13 हजार किलो के बंकर बस्टर GBU-57 Massive Ordnance Penetrator (MOP) बम ईरान के परमाणु स्थलों पर गिराए हैं।
इस GBU-57 को परमाणु बमों के बाद दुनिया के सबसे खतरनाक बम माना जाता है। ईरान के फोर्डो परमाणु स्थल के बारे में कहा जाता है कि वो पहाड़ी क्षेत्र में बना है और वो करीब 90 मीटर धरती के अंदर है। वहीं इस हमले से कुछ ही घंटे पहले इजरायल ने भी ईरान के एक अनुसंधान केंद्र पर भी हमला किया था, जिसमें तीन वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी मारे गए थे। अमेरिका के हमले को अब इस बढ़ते क्षेत्रीय युद्ध में उसकी सीधी एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
यह GBU-57A/B MOP बम एक 30,000 पाउंड (लगभग 13,600 किलोग्राम) वजनी है। इसे खासतौर पर अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों और भूमिगत परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए बनाया गया है। इसे अमेरिका के B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स से गिराया जाता है, ताकि रडार सिस्टम इसे पकड़ न सके और बम सटीकता के साथ अपने गहरे लक्ष्य तक पहुंच जाए। इस बम की सबसे खास बात है इसकी गहराई तक घुसने की क्षमता है। कहा जाता है कि ये करीब धरती के 60 मीटर तक घुसता है और फिर अंदर विस्फोट करता है, जिससे कंक्रीट-से-सुरक्षित बंकर तक उड़ जाते हैं। इसका विस्फोटक भार लगभग 5300 पाउंड H6 (एक शक्तिशाली मिलिट्री ग्रेड विस्फोटक) यानी करीब 2500 किलो होता है। इस बम को बनाने का मकसद ही ईरान जैसे देशों के उन गुप्त ठिकानों को नष्ट करना रहा है, जो जमीन के नीचे गहराई में बनाए गए हैं और सामान्य बम या मिसाइल उनसे टकराकर असर नहीं डाल सकते। अभी तक की जानकारी के मुताबिक नतांज, फोर्डो और इस्फहान के परमाणु स्थलों पर दो-दो GBU-57 बम गिराए गये हैं।
खबर है कि फोर्डो फ्यूल इनरिचमेंट प्लांट, ईरान का भूमिगत युरेनियम संवर्धन केंद्र जो पहाड़ों के नीचे स्थित है। नतांज, ईरान का मुख्य संवर्धन केंद्र है, जहां हजारों सेंट्रीफ्यूज काम करते हैं, जिससे परमाणु बम बनाने के स्तर तक यूरेनियन को संवर्द्धित किया जाता था और इस्फहान, यूरेनियम रूपांतरण संयंत्र है, जहां गैस रूपांतरण से लेकर ईंधन छड़ों का निर्माण होता था। अमेरिका ने तीनों परमाणु स्थलों के खत्म होने की बात कही है। ईरान ने हमले की पुष्टि की है, लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है कि क्या तीनों स्थल पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं? बमबारी से पहले B-2 बॉम्बर्स को ईरान की वायु-सीमा के पास देखा गया था और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हमला अत्यंत सटीक और गहन तैयारी के बाद किया गया।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के क्षेत्रीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस्फहान, नतांज और फोर्डो परमाणु सुविधाओं पर हमला किया गया है। दोनों सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और आईआरएनए के मुताबिक कोम क्षेत्र के संकट प्रबंधन केंद्र के प्रवक्ता ने कहा है कि “कुछ घंटे पहले, कोम एयर डिफेंस सिस्टम के एक्टिव होने और शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों की पहचान के बाद, फोर्डो परमाणु स्थल के क्षेत्र के एक हिस्से पर दुश्मन की वायु सेनाओं द्वारा हमला किया गया।” रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए बी-2 बॉम्बर्स ने हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया एयरबेस से उड़ान भरे थे।

6 GBU-57 बम
इस बीच, अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने अचानक हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। साथ ही, चूंकि ईरान द्वारा किसी भी समय इजरायल और अमेरिका पर हमला किए जाने की आशंका है, इसलिए उसने लोगों को बाहर जाने के बजाय बंकरों में जाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही, कई लोग चिंता जता रहे हैं कि ईरान और इजरायल के बीच युद्ध अमेरिका के प्रवेश करने से यह तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ा रहा है। (एजेंसियां)
यह भी पढ़ें-
మిస్సైల్స్తో ఇరాన్ పైన విరుచుకుపడిన అమెరికా
హైదరాబాద్ : ఇజ్రాయెల్, ఇరాన్ దేశాల మధ్య జరుగుతున్న ప్రత్యక్ష యుద్ధంలోకి అమెరికా కూడా ఎంటర్ అయింది. ఇప్పటికే పలు మార్లు ఇరాన్ ను హెచ్చరించిన అమెరికా అధ్యక్షుడు ట్రంప్ అన్నట్లుగానే ఇరాన్ లోని అణు ఆయుధ కేంద్రాలపై శనివారం అర్ధరాత్రి దాడులకు జరిపారు.
ఈ దాడులపై ఇరాన్లోని ఇస్ఫహాన్ ప్రావిన్స్ డిప్యూటీ గవర్నర్ అక్బర్ సలేహి స్పందిస్తూ నతాంజ్, ఇస్ఫహాన్ అణు కేంద్రాలపై దాడి జరిగిందని అన్నారు. ఇరాన్లోని మూడు అణు కేంద్రాలు అయిన ఫోర్డో, నతాంజ్, ఇస్ఫాహన్ లపై అమెరికా యుద్ధ విమానాలు బాంబులు వేసాయని అధ్యక్షుడు ట్రంప్ శనివారం రాత్రి ప్రకటించారు. ఈ దాడి అనంతరం అనేక వీడియోలు సోషల్ మీడియాలో వైరల్ గా మారాయి.
ఆ వీడియోల్లో అమెరికా దాడుల అనంతరం పెద్ద ఎత్తున కాలిపోతున్న అణు ఆయుధ కేంద్రాలు కనిపించాయి. అలాగే అమెరికా, ఇజ్రాయెల్ సంయుక్తంగా దాడులు చేశాయి. బీ-2 స్పిరిట్ బాంబర్లతో ఇరాన్ పై ఈ దాడులు చేసి.. సురక్షితంగా అన్ని విమానాలు వెనక్కి వచ్చినట్లు ట్రంప్ ప్రకటించారు.
కాగా అమెరికా దాడులతో ఇరాన్ లో ఒక్కసారిగా హై అలర్ట్ ప్రకటించారు. అలాగే ఏ క్షణం అయిన ఇజ్రాయెల్, అమెరికాలపై ఇరాన్ దాడులు చేసే అవకాశం ఉండటంతో ప్రజలను బయట తిరగకుండా బంకర్లలోకి వెళ్లాలని ఆదేశాలు జారీ చేసింది. దీంతో ఇరాన్, ఇజ్రాయెల్ మధ్య ఉన్న యుద్ధం కాస్త ఆమెరికాకు పాకడంతో మూడో ప్రపంచ యుద్ధం వైపు అడుగులు పడుతున్నాయని పలువురు ఆందోళన వ్యక్తం చేస్తున్నారు. (ఏజెన్సీలు)
