अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर बवाल, जानें वजह और इन देश के नेताओं की टिप्पणी

हैदराबदा/नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर बवाल मच गया है। खाड़ी में तनाव और बढ़ गया है। इजरायल ने लेबनान पर बड़े हमले किए हैं। इस हमले में जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। इसके चलते ईरान के इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। साथ ही कहा है कि इजरायल ने सीजफायर का उल्लंघन किया है।

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आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को को कहा है कि पूर्ण समझौता नहीं हुआ तो हमले और ज्यादा तेज होंगे। पूर्ण समझौते तक हमारे सैनिक, युद्धपोत खाड़ी में मौजूद रहेंगे। होर्मुज सुरक्षित और खुला रहेगा। दरअसल, सीजफायर के पक्षकारों ने पाकिस्तान पर संदेह जता दिया। इजरायल ने जहां सीधे कह दिया कि पाकिस्तान विश्वसनीय देश नहीं है। जबकि भारत में ईरानी प्रतिनिधि ने कह दिया कि भारत और भारतीय बहुत अच्छे हैं। ईरानी प्रतिनिधि तो पाकिस्तान का नाम लेने से भी बचते दिखे। विश्लेषक भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

भारत में इजरायल के राजदूत

भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा कि हम पाकिस्तान को भरोसेमंद देश नहीं मानते हैं। मेरा मानना है कि अमेरिका ने अपनी वजहों से पाकिस्तान की सुविधा का इस्तेमाल किया है। रुवेन अजार ने आगे कहा कि हमने पहले भी देखा है कि अमेरिका ने कैसे समस्या खड़ी करने वाले देशों कतर और तुर्की को भी मैनेज किया। अमेरिका ने हमास से समझौते कराने के फायदे के लिए इन देशों का इस्तेमाल किया। अजार ने यह भी कहा कि हमारे लिए यह बेहद अहम है कि हम अमेरिका के साथ तालमेल बिठाए रखें। वह भी जब बात किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की हो और जो हम देखना चाहते हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि

इसी क्रम में अमेरिका-ईरान युद्ध में भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. माजिद हकीम इलाही ने कहा कि हमारे राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन या इससे ज्यादा बार बात की। यह बातचीत बहुत अच्छी रही है। कई बार भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री अराघची से भी बात की है। यह सकारात्मक सोच वाली रही है। इलाही ने आगे कहा कि भारत में हमारे भाई-बहनों के बारे में मैं बयां नहीं कर सकता। मैं जब भी उनको याद करता हूं तो भावुक हो जाता हूं। वे अभूतपूर्व हैं। मैं इन अच्छे लोगों की वॅल्यु को शब्दों में बया नहीं कर सकता है। मैं भारत में अपने सभी खूबसूरत भाइयों-बहनों को बधाई देता हूं। वो असाधारण लोग हैं।

विश्लेषक

एक विश्लेषक ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि भारत ने कभी भी अन्य देश के मामलों में दखल नहीं दिया है। वह पाकिस्तान के मामले में भी किसी तीसरे का दखल बर्दाश्त नहीं करता रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने कभी रूस-यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता नहीं की। वह हमेशा से दोनों पक्षों के साथ संपर्क में रहा है। भारत ने इसी तरह अमेरिका-ईरान युद्ध से भी दूरी बनाए रखी। हालांकि, उसने लगातार दोनों पक्षों से बात की। उसका मानना है कि सीधे बातचीत और कूटनीति से मसले सुलझाए जा सकते हैं।

ट्रंप की ईरान को धमकी

इसी बीच अमेरिकी अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है। दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर का ऐलान करने के कुछ ही घंटों के अंदर उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखे पोस्ट में कहा, “अमेरिका के सभी जहाज़, वॉरप्लेन और मिलिट्री फ़ोर्स एक्स्ट्रा हथियारों के साथ ईरानी बॉर्डर पर रहेंगे। अगर होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला गया तो हमले ज़रूर होंगे। हमारे पास पहले से कमज़ोर दुश्मन को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सब कुछ है। हमारी मिलिट्री तब तक पीछे नहीं हटेगी जब तक कि हमारा सोचा हुआ रियल एग्रीमेंट पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता।” (एजेंसियां)

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