अंतरिक्ष विभाग हिंदी समिति की बैठक में प्रो. ऋषभदेव शर्मा की दो पुस्तकें लोकार्पित, पढ़ें वक्ताओं के विचार

हैदराबाद/नई दिल्ली : भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग की नवगठित संयुक्त हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली के सभागार में संपन्न हुई। अध्यक्षता करते हुए अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों की जानकारी आम लोगों तक पहुँचाने के लिए सरल, सुबोध किंतु सटीक भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने पारिभाषिक शब्दावली के स्तर पर हिंदी और अंग्रेज़ी के सहगामी प्रयोग को अपनाने की व्यावहारिकता भी बताई।

इसी क्रम में समिति के सदस्य के रूप में पहली बार मनोनीत, हैदराबाद के वरिष्ठ हिंदी विद्वान एवं साहित्यकार प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने यह याद दिलाया कि राजभाषा विभाग द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार केंद्र सरकार के अन्य मंत्रालयों और विभागों द्वारा हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन की योजनाओं को बंद कर दिया गया है। अब यह पुरस्कार योजना केवल राजभाषा विभाग द्वारा चलाई जा रही है।

इसमें वर्तमान में विज्ञान संबंधी सभी शाखाओं की पुस्तकों के लिए केवल एक योजना है, जिसमें अधिकतम तीन पुरस्कार दिए जा सकते हैं। इससे वैज्ञानिक विषयों पर हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन करने वालों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उनकी अभिरुचि कम होती नजर आ रही है। आगे उन्होंने सुझाव दिया कि इस स्थिति में इसरो में हिंदी में प्रकाशित विभिन्न तकनीकी विषयों की पुस्तकों के लेखकों और अनुवादकों को प्रोत्साहित करने हेतु ‘विक्रम साराभाई मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना’ को पुनः आरंभ किया जाए।

Also Read-

इसके अलावा प्रो. शर्मा ने यह भी सुझाव दिया कि ‘अनुवाद कौशल’ को ‘एप्रेंटिस एक्ट’ में शामिल किया जाए, ताकि युवा अनुवादक विभिन्न विभागों से जुड़कर तकनीकी अनुवाद का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें और राजभाषा अनुभागों को भी सेवाओं का लाभ मिल सके। बैठक के समापन से पूर्व, राज्य मंत्री (अंतरिक्ष) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अन्य पुस्तकों के अलावा, प्रो. ऋषभदेव शर्मा की दो काव्यकृतियों “इक्यावन कविताएँ” और “द थ्रेशोल्ड” को सहर्ष लोकार्पित किया।

राज्य सभा सांसद एवं संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने अपने अनुभव के हवाले से बताया कि प्रायः हिंदीभाषी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों की तुलना में ‘इसरो’ और परमाणु ऊर्जा विभाग की इकाइयाँ हिंदी में काम करने के लक्ष्यों की पूर्ति में कहीं आगे हैं। लोक सभा सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने भी दोनों विभागों की हिंदी-निष्ठा की सराहना की।

अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिवों तथा इसरो एवं अन्य केंद्रों के निदेशकों और वैज्ञानिकों ने अपने वक्तव्यों और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रशासनिक, तकनीकी और जन संपर्क आदि कार्यों में हिंदी के व्यापक व्यवहार की जानकारी दी। विभिन्न राजभाषा अधिकारियों ने भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अवसर पर प्रो. टी. आर. भट्ट, डॉ. दामोदर खड़से, डॉ. अशोकानंद झा, सुधीर हेब्बालकर, डॉ. भारमल पटेल, डॉ. साधना बलवटे आदि विद्वान सदस्यों ने दोनों वैज्ञानिक विभागों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

    Archives

    Categories

    Meta

    'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

    X