हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा तेलंगाना राज्य निर्मल जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 8 से 20 तक 489वें नवीकरण पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन समारोह सोमवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने आभासीय मंच के माध्यम से की।
इस पाठ्यक्रम के संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, अतिथि प्रवक्ता एवं डॉ. एस. राधा उपस्थित थीं। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के स्वागत में गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 24 (महिला-16, पुरुष-08) प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।

इस उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने आभासी मंच के माध्यम से कहा कि प्रशिक्षण के लिए आए हुए शिक्षकों के मन में जो भी जिज्ञासा है या शंकाएँ हैं वे दो सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद स्वतः दूर हो जाएँगें। इस प्रशिक्षण शिविर से हिंदी भाषा के अलावा कौशल विकास भी होगा। आपके अंदर की प्रतिभाएँ भी सामने आएँगी। इस दौरान आपको विषय के इतर बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
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पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि छात्रों को शिक्षा केवल शिक्षक ही दे सकता है। तकनिकी के माध्यम से केवल विषय ही पढ़ा जा सकता है। उसकी बारीकियों को जानने के लिए तथा नैतिक शिक्षा एवं संस्कार बिना शिक्षक के मिलना असंभव है। सकारात्मक सोच के साथ अगर प्रशिक्षण लिया जाएगा, तो यह प्रशिक्षण आपके लिए लाभप्रद होगा।

इस अवसर पर कार्यालय अधीक्षक डॉ. एस. राधा ने कहा कि अहिंदी भाषियों को हिंदी पढ़ाना बहुत ही कठिन कार्य है, जिसे आप शिक्षक बहुत ही लग्न के साथ पढ़ाते हैं और राष्ट्र भाषा के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देते हैं। डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि हिंदी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। उसके बिना व्यापार एवं नौकरी दोनों करना कठिन कार्य है। क्षेत्रीय भाषा से आप केवल एक सीमित स्थान पर सिमट कर रह जाते हैं जबकि हिंदी का फलक बहुत बड़ा है।
प्रतिभागी अध्यापक शशिराज जी. चौव्हान शिव कुमार, रमादेवी चिलुवेरी एवं अरूणा राणी ने इस प्रशिक्षण हेतु अपनी व्याकरण संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अपेक्षा व्यक्त की तथा संस्थान से आए हुए प्राध्यापकों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से उनके निराकरण के लिए आश्वस्त किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपेश व्यास ने सभी का परिचय कराते हुए विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस. राधा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस पाठ्यक्रम में तकनीकी सहयोग सजग तिवारी ने दिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ।
