हैदराबाद : आर्य समाज मंदिर, मुशीराबाद, लातूर (महाराष्ट्र) में नवनिर्मित सभागृह में स्वर्गीय श्रीमती सुखदा भक्तराम की तीसरी पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर चतुर्वेद शतकम् महायज्ञ का आयोजन पंडित प्रियदत्त शास्त्री के ब्रह्मत्व में के नेतृत्व में किया गया। इस कार्यक्रम गांव के सैकड़ों पुरुषों और महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति से भाग लिया और यज्ञ को सफल बनाया।
इस अवसर पर डॉ. जनार्दनराव वाघमारे (भूतपूर्व राज्यसभा सांसद एवं भूतपूर्व कुलपति स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय नांदेड़) ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच, हैदराबाद के चेयरमैन भक्तराम द्वारा प्रकाशित ‘ऋषी चरित्र प्रकाश’ मराठी अनुवाद पुस्तक का विमोचन किया। गौरतलब है कि डॉ. महेंद्र गौशाल ने इसका हिंदी से मराठी में अनुवाद किया है।

मुख्य अतिथि डॉ. वाघमारे ने अपने संबोधन में बताया कि बचपन में हैदराबाद मुक्ति के बाद लातूर में हुए प्रथम आर्य महासम्मेलन में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। सम्मेलन में महाशय खुशालचंद (आनंदस्वामी) अध्यक्ष थे और क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी स्वागताध्यक्ष थे। पंडित गंगाराम जी से आगे चलकर संबंध गहरे हो गए और पारिवारिक संबंध भी बन गये। पंडित गंगाराम जी के बारे में उन्होंने बताया कि कैसे-कैसे उन्होंने शुद्धि कार्य में कार्य किया और सैंकड़ों हिंदुओं की घर वापसी कराई।
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अनुवादक डॉक्टर महेंद्र गौशाल ने अपने अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की भाषा बहुत ही सरल है। सभी के लिए पढ़ने योग्य है। यह पुस्तक 80 वर्ष के बाद भी काफी रोचक है। यह एक ज्ञानवर्धक लघु जीवनी है। इस पुस्तक को हर घर में रहना चाहिए। डॉक्टर नयन कुमार आचार्य ने बताया कि कैसे बचपन से क्रांतिवीर पंडित गंगाराम जी साहसिक कार्य करते रहे और प्रगति करते रहे। सेवा भाव जीवन के अंत तक रहा। वह एक लेखक, संपादक, हिंदी के प्रति प्रेम और महर्षि दयानंद सरस्वती के कार्यों को लगातार करते रहे हैं। डॉ चंद्रशेखर लोखंडे ने हैदराबाद मुक्ति संग्राम के कई संस्मरण प्रस्तुत किए और बताया कि वह हर समय खोज करते रहते हैं और लुप्त जानकारी को प्रकाश में लाकर पाठकों को देते रहते हैं।

मंचासीन सभी गणमान्य अतिथियों का शाल उढाकर और श्रीफल भेंट से सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. जनार्दन राव वाघमारे, डॉ. महेंद्र गौशाल, डॉ. चंद्रशेखर लोखंडे, डॉ. नयन कुमार आचार्य, प्रा. शरद चंद्र डूमने, पंडित प्रियदत्त शास्त्री अन्य शामिल हैं। मंच का संचालन उदगीर के सुबोध अंबेसंगे ने किया। कार्यक्रम के अन्त में पाटिल परिवार और पंडित गंगाराम स्मारक मंच की ओर से सुरेश पाटिल ने धन्यवाद दिया गया। शांति पाठ के साथ सभा की समाप्ति हुई। अंत में सभी ने यज्ञ प्रसाद ग्रहण किया।
