हैदराबाद: नामपल्ली कोर्ट ने एआईएमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के भड़काऊ भाषण मामलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने अकबरुद्दीन ओवैसी को खिलाफ निर्मल और निजामाबाद जिले में दर्ज किये गये भड़काऊ भाषण मामलों में बुधवार को बरी कर दिया। वैसे तो मंगलवार को इस मामले का फैसला आना था। मगर कोर्ट ने फैसले को बुधवार तक टाल दिया।
हालांकि कोर्ट ने चेतावी दी कि भविष्य में भड़काऊ इस प्रकार के भाषण न दें। कोर्ट ने साफ किया कि मामले खारिज किये जाने के चलते जश्न भी न मनाये। करीब 10 साल पहले दर्ज मामले की लंबी सुनवाई के बाद नामपल्ली कोर्ट ने आज फैसला सुनाया। अकबरुद्दीन के वकील ने कहा कि अदालत ने मामले को इसलिए खारिज कर दिया कि पुलिस ने ठोस कोई सबूत पेश नहीं किया।
लंबी सुनवाई
हालांकि, लंबी सुनवाई के दौरान 38 गवाहों से पूछताछ करने वाली अदालत ने एसएफएल रिपोर्ट की भी जांच की। निर्मल और निजामाबाद में दस साल से पहले अकबरुद्दीन के भड़काऊ बयान से कोहराम मच गया था। पुलिस ने कथित तौर पर नफरत फैलाने के आरोप में अकबरुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 153ए, 295 और 188 के तहत मामला दर्ज किया है।
40 दिन जेल
इस मामले में 8 जनवरी 2013 को गिरफ्तार किये गये अकबरुद्दीन 40 दिन तक जेल में रहे थे। उच्च न्यायालय ने नामपल्ली न्यायालय को निर्देश दिया कि वह इन दोनों मामलों के संबंध में निर्मल में दर्ज प्राथमिकी को ही मुख्य मामला मानें। इस संदर्भ में दर्ज मुकदमा दस साल तक चला।
अदालत ने फैसले राहत
नामपल्ली कोर्ट द्वारा अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ दर्ज भड़काऊ भाषण के मामलों को खारिज किये जाने से प्रशासन को बड़ी राहत मिली है। क्योंकि अकबरुद्दीन के मामले के फैसले के मद्देनजर पुराने शहर में मंगलवार से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। आज मामला खारिज किये जाने से सभी ने राहत महसूस की है। मुख्य रूप से चारमीनार, मक्का मस्जिद और चाद्रायानगुट्टा की स्थिति पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समय-समय पर समीक्षा करते पाये गये थे। मामले पर फैसला आने के साथ ही सस्पेंस खत्म हो गया।
